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आज भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानी और बंगाल के सीएम रहे भारत रत्न डॉ. बिधानचंद्र रॉय की याद में मनाया जाने वाला यह दिन इस बार विशेष भी है। आज का दिन दिन-रात जुटे उन डॉक्टर्स को सलाम करने का है जिनके लिए कोरोनावायरस को हराना ही एकमात्र लक्ष्य है।

दुनिया के हर देश में पहुंचे कोरोना से लड़ने के लिए इन फ्रंटलाइन डॉक्टर्स की हजारों कहानियां है। त्याग, समर्पण और संघर्ष की इन कहानियों में ही जिंदगी की उम्मीदे जगमगा रही हैं क्योंकि इस 2020 के डॉक्टर्स डे पर ऐसा लगता है कि हमारा हर दिन डॉक्टर्स की मेहरबानी पर है।

आज इस दिन के मौके परफोटो में देखते हैं फिलीपींस के दो डॉक्टर की कहानी जो बताती है कि हालात कितने मुश्किल हैं और डॉक्टर कितनी हिम्मत के साथ डटे हैं। (सभी फोटो रायटर्सएजेंसी के सौजन्य से)

सबसे पहले फिलीपींस के मनीला में काम कर रही डॉ जेन क्लेरी डोराडो की कहानी। यहां की राजधानी मनीला के ईस्ट एवेन्यू मेडिकल सेंटर हॉस्पिटल में कोविड-19 के इमरजेंसी रूम में काम की जिम्मेदारी लेने वाली इस डॉक्टर की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। जब उन्होंने काम शुरू किया तो सबसे पहले मन में आया कि अब घर नहीं जाना है ताकि परिवारजनों को इंफेक्शन से बचा सकूं, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाईं।

बीते दो महीने से डॉ. जेन हर रोज बड़े हौसले के साथ कोविड-19 इमरजेंसी रूम में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हर रोज वे करीब 12 घंटे की शिफ्ट करने के बाद घर लौटती हैं तो उनके मन में हमेशा यही डर होता है कि मैं कहीं इंफेक्शन का कारण न बन जाऊं।
30 साल की डॉ. जेन के पैरेंट्स ने अपनी डॉक्टर बेटी पर बहुत दबाव बनाया कि वह उनके साथ घर में रहें, लेकिन बेटी उनसे दूर रहना चाहती थी। ऐसे में उनके पिता ने अपने स्टोरेज रूम में ही एक प्लास्टिक शीट और फॉइल लगाकर आइसोलेशन एरिया बना दिया। अब हर रोज डॉ. जेन हॉस्पिटल से घर पहुंचकर बाहर शूज उतारती हैं और उसी आइसोलेशन एरिया में रात बिताती हैं।
उनके पैंरेट्स की चिंता है कि वे बेटी के लिए कुछ कर सकें। इसीलिए वे उसके लिए खाना पहले ही एक स्टूल पर रख देते हैं और खुद प्लास्टिक शीट में बनी खिड़की से उसे देखते रहते हैं। डॉ. जेन भी उनका वहीं से हालचाल पूछती हैं। वे अपनी प्यारी बिल्ली को दुलार भी उसी खिड़की से कर लेती हैं।
डॉ. जेन डोराडो कहती हैं कि, ये सबसे मुश्किल घड़ी होती है क्योंकि मैं अपनों के पास होकर भी उनसे दूर हूं। लेकिन, ये करना ही पड़ेगा क्योंकि और कोई विकल्प भी नहीं है। मेरी मां की इच्छा मुझे को गले लगाने की होती है, लेकिन मैं उन्हें ऐसा न करने देने के लिए मजबूर हैं।
हॉस्पिटल में डॉ. जेन और उनके साथियों का अधिकतर समय आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की देखभाल में बीतता है। उनके देश में कोरोना के कारण सैकड़ों मेडिकल वर्कर्स संक्रमित हुए हैं और 30 से ज्यादा डॉक्टरों की भी मौत हो चुकी है। बावजूद इसके वे पूरे हौसले से जुटी हुई हैं।
यह दूसरी कहानी मनीला की ही एक अन्य डॉक्टर की है जो बच्चों को बचाने में जुटी हैं। 38 साल की पेडियाट्रिशियन डॉ. मीका बास्टिलो मनीला के एक दूसरे हिस्से में बच्चों के हॉस्पिटल में काम करती है जो कि अब एक कोविड रेफरल फेसिलिटी बना दिया गया है। डॉ. मीका कहती हैं कि, मेरी फैमिली चाहती हैं कि मैं अपना काम छोड़ दूं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा करना सही नहीं, क्योंकि मैं जहां जाऊंगा कोरोना को तो फेस करना ही पड़ेगा।
डॉ. मीका के पिता और उनकी बहन भी काफी बीमार हैं और उन्हें भी मेडिकल सपोर्ट पर रखा गया है, बावजूद इसके उनके परिवार ने अपने घर के बाहर अस्थायी जगह बना दी है जिसमें जरूरत भर का सामान है। डॉ. मीका रोज यहीं रहती है और इसे अपना "क्वारैंटाइन होम" कहती हैं।बारिश से बचने के लिए इस तंबू नुमा जगह को प्लास्टिक शीट से ढंक दिया गया है और इसी के जरिये उनका परिवार आपस में सुरक्षित सोशल डिस्टेंसिंग रखता है।
डॉ. मीका कहती हैं, "मेरी मां ने इसमें परदे और टेबल क्लॉथ लगा दिए हैं जिससे कि ये घर जैसा नजर आए.... और मेरे भाई ने प्लास्टिक शीट से सेपरेशन बना दिया है।कोरोना के कारण बिगड़ते हालात के बीच डॉ. मीका हर रात N95 लगाकर परिवार के साथ प्रार्थना करती है कि ईश्वर हमें इस विपदा से उबार ले और इसी के साथ अगले दिन की तैयारियों में जुट जाती है क्योंकि उन्हें हॉस्पिटल में अपना कर्त्तव्य निभाना होता है।

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National Doctors Day 2020; How doctors shield families from COVID-19 with 'quarantent', safe spaces


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दुनियाभर के मरीजों को बचाने में कोरोनावॉरियर यानी डॉक्टर्स जुटे हैं। संक्रमण के बीच वो मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं और खुद को बचाने की जद्दोजहद में भी लगे हैं। आज नेशनल डॉक्टर्स डे है, जो देश के प्रसिद्ध चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधानचंद्र रॉय के सम्मान में मनाया जाता है। केंद्र सरकार ने देश में डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत 1 जुलाई 1991 में की। 1 जुलाई उनका जन्मदिवस है। जानिए उनकी लाइफ से जुड़े 5 दिलचस्प किस्से...

डॉ. बिधान चंद्र रॉय बापू के पर्सनल डॉक्टर भी थे और एक दोस्त भी।

किस्सा 1 : जब बापू ने बिधान चंद्र से कहा, तुम मुझसे थर्ड क्लास वकील की तरह बहस कर रहे हो

1905 में जब बंगाल का विभाजन हो रहा था जब बिधान चंद्र रॉय कलकत्ता यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने की जगह अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और धीरे-धीरे बंगाल की राजनीति में पैर जमाए। इस दौरान वह बापू महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे।

1933 में ‘आत्मशुद्धि’ उपवास के दौरान गांधी जी ने दवाएं लेने से मना कर दिया था। बिधान चंद्र बापू से मिले और दवाएं लेने की गुजारिश की। गांधी जी उनसे बोले, मैं तुम्हारी दवाएं क्यों लूं? क्या तुमने हमारे देश के 40 करोड़ लोगों का मुफ्त इलाज किया है?

इस बिधान चंद्र ने जवाब दिया, नहीं, गांधी जी, मैं सभी मरीजों का मुफ्त इलाज नहीं कर सकता। लेकिन मैं यहां मोहनदास करमचंद गांधी को ठीक करने नहीं आया हूं, मैं उन्हें ठीक करने आया हूं जो मेरे देश के 40 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि हैं।इस पर गांधी जी ने उनसे मजाक करते हुए कहा, तुम मुझसे थर्ड क्लास वकील की तरह बहस कर रहे हो।

यह तस्वीर उस दौर की है जब डॉ. रॉय पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री थे।

दूसरा किस्सा : रॉय इतने बड़े हैं कि नेहरू भी उनके हर मेडिकल ऑर्डर मानते हैं

डॉ. बिधान चंद्र रॉय की तारीफ का सबसे चर्चित किस्सा देश के पहले प्रधाानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से जुड़ा है। बिधानचंद्र देश के उन डॉक्टर्स में से एक थे जिनकी हर सलाह का पालन पंडित जवाहर लाल पूरी सावधानी के साथ करते हैं। इसका जिक्र पंडित जवाहर लाल ने वॉशिग्टन टाइम्स को 1962 में दिए एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने उस दौर की बात अखबार से साझा की जब वो काफी बीमार थे और इलाज के लिए डॉक्टर्स का एक पैनल बनाया गया था, जिसमें रॉय शामिल थे। इंटरव्यू के बाद अखबार ने लिखा था, रॉय इतने बड़े हैं कि नेहरू भी उनके हर मेडिकल ऑर्डर का पालन करते हैं।

डॉ. रॉय ने बंगाल में कई संस्थानों और 5 शहरों की स्थापना की। इनमें दुर्गापुर, कल्यानी, अशोकनगर, बिधान नगर और हाबरा शामिल है।

तीसरा किस्सा : सामाजिक भेदभाव का शिकार हुए, अमेरिक रेस्तरां ने रॉय को बाहर निकल जाने को कहा

1947 में बिधानचंद्र खाने के लिए अमेरिका के रेस्तरां पहुंचे तो उन्हें देखकर सर्विस देने से मना कर दिया गया। पूरा घटनाक्रम न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, रॉय अपने पांच दोस्तों के साथ रेस्तरां पहुंचे। उनको देखकर रेस्तरां ऑपरेटर ने महिला वेटर से कहा, उनसे कहें, यहां उन्हें सर्विस नहीं जाएगी, वो यहां से खाना लेकर बाहर जा सकते हैं।

यह बात सुनने के बाद रॉय वहां से उठे और चले गए। घटना के बाद इस सामाजिक भेदभाव का पूरा किस्सा रिपोर्टर से साझा किया और भारत लौट आए।

डॉ. रॉय को 1961 में भारत सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया था।

चौथा किस्सा : आर्थिक तंगी से जूझ रहे सत्यजीत रे को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई

जाने माने फिल्मकार सत्यजीत रे को अपनी फिल्म पाथेर पंचाली बनाने के लिए आर्थिक संघर्ष से जूझना पड़ा था। कई दिक्कतों के बाद उनकी मां ने उन्हें अपने परिचितों से मिलवाया। रॉय उनमें से एक थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री भी थे। रॉय सत्यजीत रे के इस प्रोजेक्ट से काफी प्रभावित हुए और उन्हें सरकारी आर्थिक मदद देने के लिए राजी हुए। इतना ही नहीं फिल्म पूरी होने के बाद रॉय ने जवाहर लाल नेहरू के लिए इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी रखवाई। फिल्म में गरीबी से जूझते देश की कहानी दिखाई गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय साल्ट लेक सुधार स्कीम के उद्घाटन के दौरान। यह तस्वीर 16 अप्रैल 1962 की है। काले चश्मे में डॉ. रॉय (दाएं)

पांचवा किस्सा : डीन से 30 मुलाकातों के बाद उन्हें लंदन में मिला एडमिशन

रॉय हायर स्टडी के लिए 1909 में लंदन के सेंट बार्थोलोमिव्स हॉस्पिटल पहुंचे थे। लेकिन यहां उनके लिए एडमिशन लेना आसान नहीं रहा। सेंट बार्थोलोमिव्स हॉस्पिटल के डीन ने रॉय को एडमिशन न देने के लिए काफी कोशिशें की। उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक रॉय को रोके रखा ताकि वे वापस लौट जाएं। रॉय ने भी एडमिशन के अपनी कोशिशें जारी रखीं। डीन से एडमिशन के लिए 30 बार मुलाकात की। अंतत: डीन का दिल पिघला और एडमिशन देने के लिए राजी हुए।



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National Doctors Day 2020; Four Interesting Facts About Dr Bidhan Chandra Roy


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महामारी के छह महीने बीत चुके हैं लेकिन न तो वैक्सीन तैयार हो पाई है न ही मामले थमते नजर आ रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना का आंकड़ा एक करोड़ पार कर चुका है। इन छह महीनों में डॉक्टर्स और अस्पतालों ने कोरोना पीड़ितों के इलाज के दौरान कई नई बातें सीखी और समझी हैं। कोविड-19 के मामले सर्दी, सूखी खांसी और सांस की तकलीफ के साथ शुरू हुए थे लेकिन अब इसके लक्षणों में भी बढ़ोतरी हुई है। ब्रेन स्ट्रोक, पेट में तकलीफ, शरीर में खून के थक्के समेत कई नए लक्षण नजर आ चुके हैं। आज नेशनल डॉक्टर्स डे है। इस मौके परजानिए कोरोना के जरिए विशेषज्ञों को मिली ऐसी पांच सीख जो इलाज में काम आईं...

पहली सीख : कोविड के मरीजों में खून के थक्के जमने पर थिनिंग एजेंट देने से घटे

कोरोना से जूझ रहे मरीजों में खून के थक्के जमने के मामले बेहद आम हो रहे हैं। जो ब्रेन स्ट्रोक की वजह बन सकते हैं। इसका असर दिमाग से लेकर पैर के अंगूठों तक हो रहा है। अमेरिका की ब्रॉउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले दो महीने से कोरोना संक्रमितों में त्वचा फटने, स्ट्रोक और रक्तधमनियों के डैमेज होने के मामले भी दिख रहे हैं।

खून को पतला करने वालों की दवाओं (थिनिंग एजेंट) से कोरोना पीड़ितों की हालत को 50 फीसदी तक सुधारा जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के मुताबिक, वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को अगर ऐसी दवाएं दी जाएं तो उनके बचने की दर 130 फीसदी तक बढ़ जाती है। दवा से गाढ़े खून को पतला करने के इलाज को एंटी-कोएगुलेंट ट्रीटमेंट कहते हैं। शोध करने वाली न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम की टीम का कहना है कि यह नई जानकारी कोरोना के मरीजों को बचाने में मदद करेगी।

दूसरी सीख : फेफड़े के अलावा वायरस हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर अटैक कर सकता है

कोरोना वायरस अब सिर्फ फेफड़े ही नहीं हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर भी अटैक कर सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ब्रेन थैरेपी को कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए मददगार बताया है। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, मस्तिष्क के कुछ जरूरी हिस्से ऐसे होते हैं जो सांसों और रक्तसंचार को कंट्रोल करते हैं।

अगर ऐसे हिस्सों को टार्गेट करने वाली थैरेपी का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया जाए तो उन्हें वेंटिलेटर से दूर किया जा सकता है। अब मरीजों में कोरोना शरीर के दूसरे अंगों को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, डॉक्टर्स इसे भी मॉनिटर कर रहे हैं।


तीसरी सीख : एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन और प्लाज्मा से बेहतर नतीजे मिल रहे

रिसर्च में अब तक एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन ही दो ऐसी दवाएं हैं जिनका असर कोरोना के मरीजों पर बेहतर असर दिखा है। कई देशों में इसका इस्तेमाल मरीजों पर करने की अनुमति भी मिल चुकी है।

अमेरिकी फार्मा कंपनी गिलीड साइंसेज के पास रेमडेसिवीर का पेटेंट हैं। ग्लेन फार्मा और हेटरो लैब्स के बाद अब सिप्ला ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिवीर की जेनरिक मेडिसिन पेश की है। इसका नाम सिप्‍रिमी रखा गया है। हाल ही में भारत में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने हेटरो लैब्‍स को रेमेडेसिवीर के जेनरिक वर्जन के मैन्युफैक्चर और सप्लाई की अनुमति दी थी। हेटरो यह दवा भारत में कोविफॉर नाम से बेचेगी जो गेम चेंजर साबित हो सकती है।

कोरोना के मरीजों में कौन सी दवा सटीक काम कर रही है, इस सर गंगाराम हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. माला श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ मरीजों में एंटीवायरल, स्टीरॉयड दवाएं बेहतर काम कर रही हैं कुछ में प्लाज्मा थैरेपी। कोरोना के मरीजों के लिए कौन सी एक दवा बेहतर है, यह कहना मुश्किल है।

चौथी सीख : जितनी ज्यादा टेस्टिंग करेंगे उतनी तेजी से हॉस्पिटल में मरीजों का दबाव घटेगा

विशेषज्ञों का कहना मरीजों की संख्या बढ़ने की बड़ी वजह यह नहीं है कि वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है बल्कि जांच में तेजी आने से मरीज सामने आ रहे हैं। अधिक से अधिक जांच बेहद जरूरी है। मरीज जितनी जल्दी सामने आएंगे मामले कम होंगे और हॉस्पिटल में बढ़ रहे मरीजों की संख्या घटेगी। उन पर इलाज करने का दबाव कम होगा।

हाल ही में आईसीएमआर ने भी अपनी जांच करने की रणनीति का दायरा बढ़ाया है। एसिम्प्टोमैटिक, सिम्प्टोमैटिक की जांच के अलावा इनसे मिलने वालों का भी आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की गाइडलाइन जारी की है।


पांचवी सीख : दुनियाभर में कोरोना से जुड़ी हर नई जानकारी डॉक्टर्स तक पहुंचना जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के मरीजों में दिख रहे नए लक्षण, रिसर्च और वैक्सीन से जुड़े हर अपडेट की जानकारी दुनियाभर के विशेषज्ञों तक पहुंचना जरूरी है। जैसे खाने का स्वाद न मिलना और खुश्बू को न पहचान पाना जैसे लक्षण अमेरिका और ब्रिटेन के कोरोना पीड़ितों में देखे गए, बाद में ये हर देशों के मरीजों में दिखे। ऐसे मामले आम होने के बाद इसके लक्षण अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सीडीसी ने अपनी गाइडलाइन में शामिल किया। देश में भी इसे कोरोना का लक्षण माना गया। ऐसे मामलों की जानकारी विशेषज्ञों को कोरोना के मामले समझने में मददगार साबित होती है।



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National Doctors Day 2020; what covid teached to doctors and hospitals 5 learning of corona pandemic


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दो साल से भी कम समय में वोडाफोन आइडिया ने 11.613 करोड़ ग्राहकों को खो दिया है और 32.5 करोड़ यूजर बेस के साथ कंपनी तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। इसी अवधि के दौरान, रिलायंस जियो ने अपने यूजर बेस को मजबूत किया और भारती एयरटेल ने अपनी बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखने में कामयाबी हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया ने 19 महीने में बीएसएनएल के वायरलेस यूजर बेस की तुलना में अधिक ग्राहकों को खो दिया है।

2018 में वोडा-आइडिया का संयुक्त यूजर बेस 44.165 करोड़ था

  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों के अनुसार, बीएसएनएल का वायरलेस सब्सक्राइबर बेस अगस्त 2018 के अंत में 11.358 करोड़ था। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर का 31 अगस्त, 2018 को विलय हो गया था और विलय के बाद इनका संयुक्त यूजर बेस 44.165 करोड़ हो गया। इसी दौरान, भारती एयरटेल का यूजर बेस 34.588 करोड़ था, जबकि रिलायंस जियो का 23.923 करोड़ था। अगस्त 2018 तक वोडाफोन आइडिया 37.85% शेयर के साथ बाजार में आगे था, इसके बाद एयरटेल 29.64% और रिलायंस जियो 20.50% पर था। बीएसएनएल का वायरलेस शेयर 9.73% था।

19 महीने में बदल गई बाजार की तस्वीर

  • लेकिन 19 महीनों के बाद, बाजार की गतिशीलता पूरी तरह से बदल गई है। फरवरी 2020 तक रिलायंस जियो ने 32.99% की वायरलेस बाजार हिस्सेदारी हासिल की, इसके बाद एयरटेल 28.35% और वोडाफोन आइडिया के 28.05% पर पहुंच गया। बीएसएनएल की हिस्सेदारी बढ़कर 10.32% हो गई।
  • फरवरी 2020 में, रिलायंस जियो ने अपने बेस को 38.282 करोड़ तक बढ़ाने के लिए 62.5 लाख वायरलेस सब्सक्राइबर जोड़े, जबकि एयरटेल ने 922,946 यूजर्स को जोड़ कर अपने ओवरऑल बेस को 32.907 करोड़ तक पहुंचाया। वोडाफोन आइडिया ने 34.6 लाख ग्राहक खो दिए और फरवरी में इसका बेस 32.552 करोड़ था।
  • फरवरी के अंत में बीएसएनएल ने भी 4,39,318 ग्राहकों को जोड़कर अपने बेस को बढ़ाकर 11.968 करोड़ कर दिया।

ब्रॉडबैंड यूजर्स को भी जोड़ने में पिछड़ रहा वोडा-आइडिया

  • वोडाफोन आइडिया वायरलेस ब्रॉडबैंड यूजर्स को भी जोड़ने में पिछड़ रहा है। कंपनी के 11.823 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर्स हैं, जो उद्योग में सबसे कम है। इसके विपरीत, जियो के 38.283 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर्स हैं क्योंकि कंपनी पूरी तरह से 4G ऑपरेटर है जबकि एयरटेल के पास फरवरी 2020 तक 14.365 करोड़ वायरलेस ब्रॉडबैंड यूजर्स हैं।


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वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर का 31 अगस्त, 2018 को विलय हो गया था और विलय के बाद इनका संयुक्त यूजर बेस 44.165 करोड़ हो गया था


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कोरोना महामारी के कारणलोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने कई जरूरी काम करने की आखिरी तारीख को आगे बढ़ाया है। इसमें आधार-पैन लिंक, आईटीआर और फार्म-16 भरने सहित अन्य जरूरी काम शामिल हैं। अगर आपने ये आप अब तक नहीं निपटाए हैं तो आप को इसके लिए एक और मौका मिला है।


पैन को आधार से लिंक करना
सरकार ने पैन को आधार से जोड़ने की आखिरी तारीख 31 मार्च रखी थी लेकिन लॉकडाउन को देखते हुए इसे 30 जून 2020 तक बढ़ा दिया था। इसे एक बार फिर बढ़ाकर 31 मार्च 2021 बढ़ाया गया है।


2018-19 का आईटीआर
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न 30 नवंबर तक फाइल कर सकते हैं। साथ ही रिवाइज्ड आईटीआर भी 31 जुलाई तक दाखिल किया जा सकता है। इन्हें फाइल करने की अंतिम तिथि 30 जून थी।


टैक्स छूट के लिए निवेश
टैक्स बचाने को आयकर की धारा 80सी, 80डी, 80ई में निवेश करने की समय सीमा को 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है। ऐसे में अगर आप टैक्स छूट पाने के लिए निवेश करना चाहते हैं तो 30 जुलाई तक निवेश कर सकते हैं।


फॉर्म-16 भरना
कर्मचारियों को उनकी कंपनी से फॉर्म 16 आमतौर पर मई के महीने में मिल जाता था, लेकिन इस बार कोरोना के कारण सरकार ने फॉर्म 16 को जारी करने की तारीख 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। फॉर्म 16 एक तरह का टीडीएस सर्टिफिकेट है, जिसकी आईटीआर दाखिल करते वक्त जरूरत पड़ती है।



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अब रिवाइज्ड आईटीआर भी 31 जुलाई तक दाखिल किया जा सकता है


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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीते साल 19 दिसंबर को राजधानी लखनऊ में हुए उपद्रव के मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री आवास के निकट गोल्फ लिंक अपार्टमेंट से की है। शाहनवाज की गिरफ्तारी की सूचना पाकर प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और विधायक आराधना मिश्रा मोना समेत दर्जनों कार्यकर्ता हजरतगंज कोतवाली पहुंच गए। कोतवाली में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा है।


पुलिस बोली-प्रयाप्त साक्ष्य हैं तब की गिरफ्तारी

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शाहनवाज को कोतवाली ले गई। इस बात की खबर होने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार सिंह लल्लू, विधायक अराधना मिश्रा समेत कई नेता कोतवाली पहुंच गए। सभी ने गिरफ्तारी का विरोध किया।डीसीपी सेंट्रल दिनेश सिंह ने बताया कि, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीते वर्ष 19 दिसंबर को लखनऊ को हिंसा की आग में झोंकने वाले उपद्रवी तत्वों पर प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। शाहनवाज के खिलाफ भी पर्याप्त सबूत हैं। इसलिए उनकी गिरफ्तारी हुई है।

कोतवाली में बैठे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व अन्य।

झूठे मुकदमे में फंसा रही पुलिस
कांग्रेस प्रदेशअध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि,पुलिस कांग्रेस के वर्कर और नेताओं को झूठे मुकदमों में फंसा रही हैं। आज पुलिस ने जो किया वह भी वहीहै। जिसदिन प्रदर्शन हुआ था, उस दिन शहनवाज आलम मेरे साथ ही प्रदर्शन में शामिल थे। पुलिस ने हमारे साथ ही शाहनवाज आलम को भी हिरासत में लिया गया। तब कैसे उपद्रव में शामिल हो गए?कांग्रेस के वर्कर योगी पुलिस के खिलाफ प्रदेश भर में आंदोलन करेंगे।



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उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम।


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उत्तर प्रदेश के कानपुर में मंगलवार को कांग्रेस विधायक सुहैल अंसारी और उनके आधा दर्जन से अधिक समर्थकों पर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दरअसल सोमवार को विधायक सुहैल अंसारी अपने समर्थकों के साथ कोतवाली चौराहे पेट्रोल और डीजल के दामों की गई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ता पेट्रोलियम मंत्री के पोस्टर जलाने जा रहे थे , वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने पोस्टर जलाने से रोका तो विधायक और समर्थकों की बीच बहस शुरू हो गई। इससे नाराज विधायक पुलिस पर भड़क गए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

कैंट विधायक सुहैल अंसारी , नगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता कोतवाली चौराहे पर पेट्रोलियम पर्दार्थो में की गई मूल्य वृद्धि का विरोध करने के लिए पहुंचे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पोस्टर जलाने रोकने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का पाठ पढ़ाने लगी। इसी बीच विधायक और पुलिस ने बहस शुरू हो होने लगी।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी और विधायक के बीच हुई थी झड़प

विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विधायक के बीच हुई बहस में विधायक सुहैल अंसारी एक पुलिसकर्मी पर भड़क गए और कहने लगे कि तुम्हारा ज्यादा दिमाग खराब है। पुलिसकर्मी को ठीक करने की धमकी देने लगे। सिपाही पर तमतमाए विधायक कहने लगे कि ‘इसको हटाओ पहले यहां से यह कहते हुए वो चिल्लाने लगे। बंद करोगे मुझे चलो बंद करो। इतना कुछ होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सभी को धक्का देते हुए वहां से दूर ले गए।

कोतवाली में तैनात एसआई शिवराज सिंह विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ तहरीर दी है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने पेट्रोलिय मंत्री के पोस्टर को आग के हवाले कर दिया था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने कोरोना संकटकाल में सरकार द्वारा बनाई गई गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया। कोतवाली पुलिस ने विधायक समेत उनके समर्थकों पर आईपीसी की धारा 186, 188, 269, 271 में एफआईदर्ज की गई है।



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कानपुर में सोमवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी और कांग्रेसी विधायक के बीच झड़प हुई थी।


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