आर.जे अनमोल और अभिनेत्री अमृता राव के घर जल्द ही किलकारियां गूंजने वाली हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान, अनमोल ने अमृता राव की प्रेगनेंसी से जुड़ी एक बहुत ही दिलचस्प बात बताई। उन्होंने बताया की कैसे एक नार्मल मेडिकल चेक अप के दौरान उन्हें ये 'गुड न्यूज़' मिली। रिपोर्ट आते ही हमें 'गुड न्यूज' मिल गई:
अनमोल बताते हैं, "मुझे अब तक मेरे ब्लड ग्रुप को लेकर काफी कन्फ्यूजन हुआ करती थी और इसी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए मैंने अपना ब्लड चेक करवाने का फैसला लिया। मुझे आज भी याद है वो दिन जब मैंने अपना ब्लड ग्रुप चेक करवाने के लिए अपने घर ही पर डॉक्टर को बुलवाया था । इसी दौरान मैंने अमृता का भी साथ ही साथ ब्लड चेक अप करवा दिया जोकि बहुत नार्मल रूटीन था। बस फिर क्या, रिपोर्ट आते ही हमें 'गुड न्यूज' मिल गई (हंसते हुए)। ये गुड न्यूज मिलने के हफ्ते बाद ही हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लॉकडाउन का एलान कर दिया। लॉकडाउन के बहाने ही सही, हम दोनों को इस वक्त एक दूसरे के साथ वक्त बिताने का भी मौका मिल गया।" मुझे और अमृता दोनों को बच्चे बहुत पसंद हैं:
वे आगे बताते हैं, "मुझे और अमृता दोनों को बच्चे बहुत पसंद हैं। सच कहूं तो मुझे लगता है कि मैं खुद ही बच्चा हूं जिसे अमृता और मेरे घर वाले संभाल रहे हैं (हंसते हुए)। हम सभी घर में नए मेहमान के स्वागत करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चाहे लड़का हो या लड़की, हम बस दिल से यही चाहते हैं कि जो हो वो स्वस्थ और तंदरुस्त हो।" जैमिंग 3 को होस्ट कर रहे हैं अनमोल:
बता दें, इन दिनों आर. जे अनमोल रियलिटी शो 'जैमिंग' के सीजन 3 को होस्ट कर रहे हैं। इस बारे में अनमोल बताते हैं, "ये दूसरे रियलिटी शो से बहुत अलग हैं। इस शो में आप अपने दोस्तों के साथ बैठते हो, खूब बातें करते हो और साथ ही संगीत से भरी इस महफिल को एन्जॉय करते हैं। इस महफिल में बॉलीवुड के कई दिग्गज आ चुके हैं फिर बप्पी लाहिड़ी हो या उदित नारायण। मेरे लिए सबसे बड़ी अचीवमेंट तब थी जब आशा भोसले ने मेरे इस शो की तारीफ की। मेरी ख्वाहिश है उन्हें अपने शो में लाने की।"
हेमा मालिनी 72 साल की हो गई हैं। वे 16 अक्टूबर 1948 अम्मंकुदी तमिलनाडु में पैदा हुई थीं। हेमा ने धर्मेंद्र से दूसरी शादी की थी, लेकिन शादी के बाद हेमा कभी धर्मेंद्र के घर नहीं गईं। उनकी ओर से धर्मेंद्र के घर जाने वाली इकलौती मेंबर उनकी बेटी ईशा हैं, जो अपने जन्म के 34 साल बाद वहां जा पाई थीं। इस बात का जिक्र राम कमल मुखर्जी की बुक 'हेमा मालिनी : बेयॉन्ड द ड्रीम गर्ल' में किया गया है।
बीमार चाचा को देखने धर्मेंद्र के घर गई थीं ईशा
बात तब की है, जब धर्मेंद्र के भाई और अभय देओल के पिता अजीत सिंह देओल बहुत ज्यादा बीमार थे। वो बिस्तर पर थे और ईशा अपने चाचा को देखना चाहती थीं। बुक में ईशा के हवाले से लिखा है- मैं चाचा से मिलना चाहती थी और अपनी तरफ से सम्मान देना चाहती थी। वो मुझे और अहाना को बहुत चाहते थे और हम भी अभय के बेहद क्लोज थे।"
अजीत सिंह देओल और धर्मेंद्र। 23 अक्टूबर 2015 को अजीत सिंह देओल का निधन हो गया। वे गाल ब्लेडर कॉम्पलिकेशन का ट्रीटमेंट ले रहे थे।
ईशा ने आगे कहा, "हमारे पास उनके घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। वो अस्पताल में भी नहीं थे कि हम उनसे वहां मिलकर आ जाते। इसलिए मैंने सनी (देओल) भैया को फोन किया और उन्होंने उनसे मिलने की पूरी व्यवस्था करा दी थी।"
हेमा का बंगला धर्मेंद्र के घर से 5 मिनट की दूरी पर
बुक में यह भी लिखा है कि हेमा का बंगला आदित्य धर्मेंद्र के 11th रोड हाउस से 5 मिनट की दूरी पर है। लेकिन उनकी बेटी ईशा को वहां तक पहुंचने में करीब 34 साल लग गए। ईशा का जन्म 1981 में हुआ था और वो अपने पापा के घर 2015 में गई थीं।
हेमा क्यों कभी धर्मेंद्र के पुश्तैनी घर नहीं गईं
राम कमल मुखर्जी की बुक के मुताबिक, शादी से पहले हेमा, धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर से कई बार समारोहों में मिली थीं। लेकिन शादी के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए। बकौल हेमा- मैं किसी को डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी। धरम जी ने मेरे और मेरी बेटियों के लिए लिए जो किया, मैं उसमें खुश हूं। उन्होंने एक पिता की भूमिका बखूबी निभाई।
आज मैं काम करती हूं और अपनी डिग्निटी को मेंटेन करने में सक्षम हूं। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी को आर्ट और कल्चर से जोड़ लिया है। मुझे लगता है कि अगर सिचुएशन इससे थोड़ी भी अलग होती तो मैं आज वहां न होती, जहां हूं।
हेमा ने कहा था- मैं प्रकाश का बहुत सम्मान करती हूं
हेमा ने एक इंटरव्यू में कहा था- भले ही मैं कभी प्रकाश के बारे में बात नहीं करती, लेकिन मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। मेरी बेटियां भी धरम जी की फैमिली का पूरा सम्मान करती हैं। दुनिया मेरी लाइफ के बारे में विस्तार से जानना चाहती है। लेकिन यह दूसरों को बताने के लिए नहीं है। इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए।
धर्मेंद्र और उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर।
हेमा के भाई के घर से हुई थी उनकी और धर्मेंद्र की शादी
हेमा की शादी उनके भाई के घर से हुई थी। यह तमिल वेडिंग थी। कहा जाता है कि धर्मेंद्र और हेमा दोनों ही इसी तरह से शादी करना चाहते थे। 'हेमा मालिनी: बेयॉन्ड द ड्रीम गर्ल' के मुताबिक, धर्मेंद्र के पिता केवल कृष्ण सिंह देओल, हेमा और उनकी फैमिली को बहुत पसंद करते थे।
हेमा ने बुक में बताया है- केवल कृष्ण सिंह देओल अक्सर चाय पर पिता और भाई से मिला करते थे। इस दौरान वे पंजे भी लड़ाया करते थे और उन्हें (हेमा के पिता और भाई को) हराने के बाद मजाक करते हुए कहते थे, तुम लोग घी मक्खन लस्सी खाओ। इडली और सांभर से ताकत नहीं आती। इसके बाद वे खूब हंसते थे।
धर्मेंद्र की मां ने दिया था खुश रहने का आशीर्वाद
हेमा की बुक में धर्मेंद्र की मां सतवंत कौर के साथ उनके रिश्ते का जिक्र भी किया गया है। हेमा के मुताबिक- धरम जी की मां सतवंत कौर बहुत ही अच्छी महिला थीं। मुझे याद है कि एक बार वे मुझसे मिलने जुहू के एक डबिंग स्टूडियो में आई थीं। उस वक्त मैंने ईशा को कंसीव किया था। उन्होंने घर में किसी को नहीं बताया था। मैंने उनके पैर छुए और उन्होंने कहा- बेटा खुश रहो हमेशा। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई थी।
अक्षय कुमार और सोनू सूद ने 'पृथ्वीराज' की शूटिंग फिर से शुरू कर दी है। सेट से अक्षय कुमार की एक्सक्लूसिव फोटो दैनिक भास्कर के हाथ लगी है। फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि यह शेड्यूल 30 नवंबर तक चलेगा। इन दिनों शूटिंग यशराज स्टूडियो में हो रही, लेकिन बहुत जल्द इसे मुंबई के मड आईलैंड में पूरा किया जाएगा।
कोरोना के कारण शेड्यूल लंबा है
फिल्म का लंबा शेड्यूल इसलिए है, ताकि सबका नियमित रूप से कोरोना टेस्ट भी होता रहे। क्रू मेंबर्स की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें स्टूडियो में एंट्री दी जा रही है। उन्हें एक साथ पास के ही एक होटल में रखा गया है। वहीं से बायो बबल की तर्ज पर सबकी आवाजाही सुनिश्चित की जा रही है।
दिवाली बाद शूट करेंगे संजय दत्त
फिल्म में संजय दत्त भी हैं। वे मोहम्मद गौरी के रोल में हैं। चूंकि इन दिनों वे इम्युनोथैरेपी करवा रहे हैं। इसलिए उनका शेड्यूल दिवाली बाद रखा गया है। फिलहाल अक्षय कुमार, सोनू सूद और मानव विज आदि के सीक्वेंस पूरे किए जा रहे हैं। 13 तारीख से मानुषी छिल्लर भी शूटिंग का हिस्सा बनेंगी।
लॉकडाउन से पहले शूट हो चुका था बड़ा हिस्सा
सेट पर मौजूद सूत्रों में से एक ने बताया, "मार्च में लॉकडाउन लगने से पहले फिल्म का बड़ा हिस्सा शूट हो चुका था। जयपुर में राजा-महाराजाओं के महलों के एक्सटीरियर का स्टॉक फुटेज काफी है। बाकी हिस्से की शूटिंग को पूरा करने के लिए वाईआरएफ स्टूडियो के भीतर बड़ा सेट तैयार किया गया है। यहां का इंटीरियर जयपुर के एक्सटीरियर शॉट के साथ मर्ज किया जाएगा।"
डायरेक्टर ने भी की शूटिंग की पुष्टि
हमने इस बारे में जानने के लिए फिल्म के डायरेक्टर, चंद्रप्रकाश द्विवेदी से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा, "जी हां, हमने वाईआरएफ स्टूडियो में 'पृथ्वीराज' की शूटिंग फिर से शुरू कर दी है और इस शेड्यूल को लेकर पूरी टीम काफी एक्साइटेड है।"
अमिताभ बच्चन 78 साल के हो गए हैं। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में जन्मे अमिताभ 51 साल से बॉलीवुड में एक्टिव हैं। हालांकि, इस अवधि में तीन साल के लिए वे राजनीति में भी चले गए थे। 1984 में वे राजनेता बने और 1987 में पॉलिटिकल करियर छोड़ दिया। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि राजीव गांधी की हत्या के बाद उनसे दोबारा राजनीति में एंट्री को लेकर सवाल किया गया था। हालांकि, उन्होंने बड़ी ही सावधानी से टालमटोल वाला जवाब दिया था।
पूछा गया था कि क्या सोनिया को सहारा देने के लिए राजनीति में आएंगे?
जाने-माने ऑथर और कॉलमिस्ट राशिद किदवई ने अपनी बुक 'नेता-अभिनेता : बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स' में लिखा है- राजीव गांधी की हत्या के एक साल बाद 1992 में अमिताभ बच्चन से पूछा गया कि क्या वे विधवा सोनिया (गांधी) को असिस्ट करने के लिए फिर से पॉलिटिक्स ज्वॉइन करेंगे?
जब सोनिया गांधी भारत आईं तो उन्हें रिसीव करने अमिताभ बच्चन भी पहुंचे थे। पालम एयरपोर्ट पर 13 जनवरी, 1968 के दिन राजीव ने सोनिया को अपने जिगरी दोस्त अमिताभ से मिलवाया था। इसके बाद शादी से पहले 43 दिन तक सोनिया अमिताभ के पैरेंट्स तेजी बच्चन और हरिवंशराय बच्चन के साथ रही थीं।
जवाब में उन्होंने कहा- आदत के अनुसार मैं अपने काम में पूरी तरह इन्वॉल्व हूं। मैंने काम लिया है और उसे हर कीमत पर पूरा किया है। अब मैंने अपनी फिल्मों में कटौती करने का फैसला लिया है तो लोगों को लगता है कि मैंने यह पॉलिटिक्स में आने के इरादे से किया है।
जी हां, राजीव गांधी मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे और यह भी सच है कि मैं सोनियाजी का सच्चा शुभचिंतक हूं और उनके परिवार का करीबी हूं। लेकिन मेरे पॉलिटिक्स में आने से उनकी चिंताएं और प्लान कैसे आसान हो जाएंगे? और उन्हें मेरी मदद की जरूरत क्यों है? वे बहुत स्ट्रॉन्ग, सेंसीबल और कम्पलीट इंसान हैं। अपने फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। वे जानती हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं? बुक में यह किस्सा सुमंत मिश्रा की बुक 'मैं अमिताभ बोल रहा हूं' के हवाले से लिखा गया है।
किस्सा नं. 2 : जब अमिताभ को राजनीति में न लाने की चेतावनी दी गई
गांधी और नेहरु के पारिवारिक संबंध उस समय से हैं, जब इंदिरा गांधी की शादी भी नहीं हुई थी। इलाहाबाद में नेहरु परिवार के पुश्तैनी घर आनंद भवन में सरोजनी नायडू ने हरिवंश राय बच्चन-तेजी बच्चन से इंदिरा की मुलाकात कराई थी। यहीं से इंदिरा और तेजी की दोस्ती हुई। लेकिन 80 के दशक में इस दोस्ती में तब दरार आ गई, जब इंदिरा गांधी ने तेजी बच्चन की जगह नरगिस दत्त को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया।
रिपोर्ट्स की मानें तो राजीव गांधी जब 2 साल और अमिताभ बच्चन 4 साल के थे, तब दोनों की दोस्ती हुई थी
मेनका गांधी द्वारा निकाली गई मैगजीन सूर्या के एक कॉलम में इस बात का जिक्र का था कि इंदिरा गांधी के फैसले से तेजी काफी नाराज हो गई थीं। दोनों के बीच का रिश्ता काफी लंबे समय तक तनाव भरा रहा। राशिद किदवई की बुक के मुताबिक, गांधी परिवार के करीबी रहे सीनियर कांग्रेस नेता एमएल फोतेदार ने 2015 में अपने संस्मरण में लिखा था कि इंदिरा गांधी ने अपने बेटे राजीव को चेतावनी दी थी कि वे अमिताभ को राजनीति में न लाएं।
उस वक्त राजीव गांधी कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव थे। फोतेदार के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने उन्हें और अरुण नेहरु को राजीव गांधी के साथ मीटिंग में बुलाया था। उन्होंने राजीव गांधी को दो काम न करने की सलाह दी थी। पहला कि वे कभी तेजी बच्चन के बेटे (अमिताभ) को राजनीति में न लाएं और दूसरा ग्वालियर के महाराज माधव राव सिंधिया को हमेशा अपने साथ रखें।
किस्सा नं. 3: राजीव राजनीति में भी लाए, फिर इस्तीफा भी मांग लिया
राजीव गांधी ने अपनी मां की चेतावनी को नजरअंदाज किया और 1984 में अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से टिकट दिया। फोतेदार के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी मिल रही थी कि अमिताभ मंत्राालय में ऑफिसर्स के ट्रांसफर और नियुक्तियों में दखलंदाजी कर रहे थे। कई नेताओं ने भी इस बात की शिकायत की थी। अपने निर्वाचन क्षेत्र का चार्ज बिग बी ने एक ऐसे इंसान को दे दिया था, जिसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे थे।
फोतेदार उस वक्त राजीव गांधी के राजनीतिक सचिव थे। हालांकि, उनकी मानें तो उन्होंने कभी इस बारे में राजीव गांधी को नहीं बताया। लेकिन अमिताभ न सिर्फ उत्तर प्रदेश में, बल्कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार में भी दखल देने लगे थे।
करीब 4 साल पहले जर्नलिस्ट शेखर गुप्ता और बरखा दत्त के प्रोग्राम 'ऑफ द कफ' में अमिताभ ने कहा था- इस बात का अफसोस भी है कि मैं इलाहाबाद की जनता से किए वादे पूरे नहीं कर पाया। जितनी मेरी क्षमता थी, मैंने वादों को पूरा करने की कोशिश की। लेकिन मैं जानता हूं कि इलाहाबाद के लोग मुझे कभी माफ नहीं करेंगे।
अमिताभ के इस्तीफे वाले दिन को याद करते हुए फोतेदार ने बताया, "अमिताभ उस रोज प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) से मिलने आए थे। उस वक्त दोपहर करीब 2:45 का समय था और मैं लंच पर जाने वाला था। प्रधानमंत्री ने मुझे बुलाया। फिर हम सेवन रेस कोर्स के अंदर गए। पीएम ने एक चेयर ली और अमिताभ के दाईं ओर बैठ गए। मुझे बाईं ओर बैठने को कहा गया।
इसके बाद बाद पीएम ने अमिताभ से कहा, "फोतेदार जी आपका इस्तीफा चाहते हैं।" मैं हैरान था और जाहिर तौर पर अमिताभ भी हुए होंगे। फिर अमिताभ ने कहा, "अगर फोतेदार जी मेरा इस्तीफा चाहते हैं तो मैं तैयार हूं। पेपर दीजिए और बताइए क्या लिखना है?" इसके बाद अमिताभ ने अपना इस्तीफा लिखा, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया।
हाल ही में रिलीज हुई स्पाई थ्रिलर वेब सीरीज 'क्रैकडाउन' में साकिब सलीम रॉ एजेंट की भूमिका निभाते हुए दिख रहे हैं। जिसे लेकर उन्हें खूब तारीफें मिल रही हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान उन्होंने कोरोनाकाल में शूटिंग करने से लेकर, एक्शन से जुड़े रोचक किस्से साझा किए।
वेब सीरीज में अपने निभाए किरदार बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 'ये एक स्पाई थ्रिलर वेब सीरीज है और इसमें हम सभी दुनिया भर में कोवर्ट ऑपरेशन करते हुए नजर आ रहे हैं। मैं एक सीक्रेट एजेंट की भूमिका निभा रहा हूं। अपने इस रोल के लिए मुझे बहुत सारे कॉम्प्लीमेंट मिल रहे हैं। मेरी बहन हुमा भी मेरे इस रोल को लेकर बहुत एक्साइटेड है। हालांकि क्योंकि वो बेल बॉटम की शूटिंग कर रही थी इसीलिए अबतक वो इस सीरीज को नहीं देख पाई है।'
Q- आप काफी सारे एक्शन सीक्वेंसेस में नजर आ रहे हैं? अपने रोल के लिए आपने कैसे तैयारी की थी?
'इस रोल के लिए मुझे अपनी बॉडी पर काफी काम करना पड़ा क्योंकि मैं एक सीक्रेट एजेंट, एक रॉ एजेंट की भूमिका निभा रहा हूं। जिसे फील्ड पर रहना है, दौड़ना भी है, कूदना भी है और लड़ना भी है। बहुत सारे एक्शन सीक्वेंस थे तो मैंने करीब 5 महीने अपनी बॉडी पर काम किया।'
'वैसे तो मैं हमेशा से ही फिट रहा हूं लेकिन इस किरदार में मुझे अपनी बॉडी से बड़ा भी दिखना था। जब इस तरीके की बॉडी मैंने बना ली तब मुझे यह फील हुआ कि मेरी बॉडी बहुत स्टिफ है और एक्शन सीक्वेंस करने के लिए मुझे थोड़ा लचीला होना चाहिए जिसके लिए मैने किक बॉक्सिंग का सहारा लिया। इसके अलावा मैंने 1 महीने तक इस रोल को लेकर वर्कशॉप भी की।'
Q-आपकी सिस्टर हुमा कुरैशी हाल ही में बेल बॉटम की शूटिंग करने के लिए विदेश गई थीं। उनकी सेफ्टी को लेकर आपके पैरेंट्स कितने कंसर्न थे और क्या कुछ बातचीत होती थी?
'दरअसल मैंने और हुमा, हम दोनों ने ही इस कोरोना काल में शूटिंग की है। हम दोनों ने साथ में डिसीजन लिया था कि हम अपनी-अपनी शूटिंग करेंगे लेकिन पूरी सतर्कता के साथ और पूरी एहतियात बरतते हुए। हां शुरुआत में मुझे थोड़ी नर्वसनेस थी यह सोचकर कि क्या होगा, कैसे होगा लेकिन यह हिचकिचाहट भी एक-दो दिन में ही चली गई क्योंकि हम दोनों की फिल्मों के प्रोड्यूसर ने सारे सेफ्टी मेजर अपनाए थे।'
Q- पिछले 2 सालों में थ्रिलर पर आधारित कई वेब सीरीज रिलीज हुई हैं जैसे फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स। क्या कभी लगा कि इन शोज से आपकी वेब सीरीज को कंपेयर किया जा सकता है?
'देखें इन सभी वेब सीरीज की कहानी अलग है। इनको दर्शाया अलग तरीके से गया है। मेरे दिमाग में कभी नहीं आया कि मेरी वेब सीरीज को इस जॉनर की बाकी प्रसिद्ध वेब सीरीज से कंपेयर किया जाएगा। मेरा सिर्फ यह मानना है की ऐसी वेब सीरीज हमें और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है। हेल्थी कॉन्पिटिशन हमेशा होना चाहिए।'
Q- शूटिंग के दौरान आपने क्या चैलेंजेस फेस किए?
'मुझे याद है कि हम इस वेब सीरीज का क्लाइमैक्स शूट कर रहे थे नांदेड़ में एक एयरपोर्ट पर। उस समय वहां बहुत ठंड थी और मेरा सीन शर्टलेस था। उस समय ठंड के मारे मेरी हालत खराब हो गई थी और मैं कंपकंपा रहा था लेकिन अगर आप सीरीज में देखेंगे तो आपको ये पता भी नहीं चलेगा।'
Q- अपने आने वाले प्रोजेक्ट के लिए आपने भूतपूर्व कप्तान मोहिंदर अमरनाथ से ट्रेनिंग ली है क्या कुछ सीखा उनसे?
'मैंने उनसे गाने, खेलने की टेक्निक तो सीखी है लेकिन साथ ही सबसे बड़ी बात सीखी कि लाइफ में हमेशा पॉजिटिव कैसे रहना है। कैसे हर मुश्किल घड़ी में भी खुद को शांत और संयमित बनाकर रखना है। उनके साथ समय बिताकर मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं सिर्फ उनको ऑब्जर्व करता था कि वो कैसे हैं और मैं कैसे उनकी तरह एक्ट कर पाऊंगा।'
Q- आपको कॉमेडी करना ज्यादा मुश्किल लगता है या एक्शन? किसके लिए ज्यादा प्रिपरेशन चाहिए?
'दोनों जॉनर में अपने-अपने चैलेंज होते हैं। जहां कॉमेडी के लिए टाइमिंग महत्वपूर्ण है वहीं एक्शन के लिए सही बॉडी चाहिए। मुझे एक्शन इसीलिए ज्यादा मुश्किल लगता है क्योंकि बॉलीवुड में ऋतिक रोशन , टाइगर श्रॉफ, विद्युत जामवाल जैसे एक्टर्स ने एक्शन की फील्ड में बहुत हाई बेंचमार्क सेट कर दिया है। जिसकी वजह से हम सभी को काफी मेहनत लगती है उनके जैसा एक्शन करने में।'
कुछ राज्यों को छोड़कर 15 अक्टूबर से बाकी जगहों पर थिएटर्स खुलने जा रहे हैं। ऐसे में सिनेमाघर संचालकों की नजर नए कंटेंट के लिए 'सूर्यवंशी' के अलावा '83' पर भी टिकी हुई हैं। ऐसे में अभिनेता ताहिर राज भसीन को पूरी उम्मीद है कि जब सिनेमाघर खुलेंगे तो '83' थिएटरों को क्रिकेट स्टेडियम में तब्दील कर देगी और हाउसफुल का माहौल रहेगा। भारतीय क्रिकेट टीम के पहली बार वर्ल्ड कप जीतने पर बनी इस फिल्म में ताहिर क्रिकेटर सुनील गावस्कर का किरदार प्ले करते नजर आएंगे।
ताहिर ने कहा, 'बड़ी राहत की बात यह है कि मल्टीप्लेक्सों और उससे जुड़े अन्य कारोबारों के हजारों कर्मचारियों को आखिरकार कुछ चैन मिलेगा, जो थिएटरों के खुले रहने पर निर्भर रहते हैं। यह एक ऐसा सेक्टर है, जिस पर बहुत लंबे लॉकडाउन की गहरी मार पड़ी है। सिनेमाघरों को लेकर नए डेवलपमेंट से मैं बहुत खुश हूं। मैं थिएटरों में ‘83’ की रिलीज की प्रतीक्षा कर रहा हूं। यह एक ऐसी फिल्म है, जो थिएटरों को क्रिकेट स्टेडियम में तब्दील कर देगी।'
सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखना होगा
ताहिर को इस बात का पूरा भरोसा है कि थिएटर हर वो जरूरी कदम उठाएंगे, जो फिल्म देखने को एक सुरक्षित अनुभव बनाएगा। इस वायरस से मुकाबला करने के लिए वो लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने का अनुरोध भी करते हैं।
ताहिर कहते हैं, 'थिएटरों में फिल्मों का आनंद उठाने की बजाए उन सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देना चाहिए, जिनका सिनेमा हॉल और लोगों द्वारा एक संयुक्त प्रयास के तौर पर पालन किया जाना अति आवश्यक है। यानी मास्क पहनना, एक-दूसरे से दूरी बनाए रखना और कोविड-19 के लक्षण दिखने पर बाहर निकलने से बचना।'
'ये सुरक्षा के ऐसे सेल्फ-चेक हैं, जिन पर हमें टिके रहना होगा। देश में मनोरंजन के पसंदीदा स्वरूप की वापसी का जश्न मनाने के साथ-साथ हमें न्यू-नॉर्मल की हदों के इर्द-गिर्द बड़ी सावधानी और जागरूकतापूर्ण ढंग से गुजारा करना होगा।'
हाल ही में सोशल मीडिया में संजय दत्त की एक फोटो वायरल हुई थी, जिसमें वे काफी कमजोर नजर आ रहे थे। इसे लेकर कहा जा रहा था कि कीमोथेरेपी की वजह से उनका वजन गिर गया है। हालांकि सच्चाई कुछ और है। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक ना तो उनका वजन 20 किलो कम हुआ है और ना ही उनकी कीमोथेरेपी हो रही है।
दैनिक भास्कर को जानकारी देते हुए संजू बाबा के करीबियों ने बताया कि उनके वजन में मात्र पांच किलो की गिरावट हुई है और वो कीमो की बजाय इम्युनोथेरेपी करवा रहे हैं। करीबियों की मानें तो अभिनेता की बीमारी उतनी गंभीर नहीं है, जितनी कि मीडिया में प्रोजेक्ट की जा रही है।
संजय रोजाना दो से तीन घंटे जिम में बिता रहे
अभिनेता के करीबियों ने महज तस्वीरों के आधार पर उनके वजन में 20 किलो तक की गिरावट के दावे पर भी एतराज जताया। उनके परिवार के एक सदस्य ने कहा, 'तस्वीरों से वजन में इतनी गिरावट का अंदाजा कैसे लगा लिया गया। ये संजय जैसे फाइटर का अपमान है। असलियत यह है कि वे रोजाना दो से तीन घंटे जिम में बिता रहे हैं। अपकमिंग फिल्मों के लिए उन्हें स्लिम लुक में दिखना है।
बढ़ी दाढ़ी की वजह से चेहरा भरा हुआ लगता था
गिरी हुई सेहत दिखने की वजह बताते हुए उनके करीबी ने कहा कि संजय ने पिछले काफी लंबे समय से शेव नहीं की थी। ऐसे में बढ़ी दाढ़ी की वजह से उनके चेहरे व गले की सिलवटें नहीं दिखती थीं और चेहरा भरा हुआ नजर आता था।
दुबई जाने से पहले साफ करवाई थी दाढ़ी
हाल ही में दुबई जाने से पहले उन्होंने क्लीन शेव की और जब वो वहां से वापस आए तो पतले चेहरे के चलते उन्हें बीमारू बता दिया गया, जबकि असल में वे फिट एंड फाइन हैं और हर रोज नए राइटरों और डायरेक्टरों से मिल रहे हैं। पिछले दो दिनों में उन्होंने दो-तीन डायरेक्टरों से नई कहानियों के नरेशन लिए हैं।
रवि चड्ढा के साथ बना रहे 'डम डम डिगा डिगा'
संजय दत्त के करीबियों की बातों की पुष्टि फिल्म मेकर रवि चड्ढा के करीबियों ने भी की है। रवि चड्ढा उनके साथ 'डम डम डिगा डिगा' फिल्म बना रहे हैं। इसमें जैकी श्रॉफ और सुनील शेट्टी भी हैं। इसे यासवी फिल्म्स प्रोड्यूस कर रहे हैं। जिन्होंने हाल ही में श्रेयस तलपड़े और पवन मल्होत्रा आदि के साथ ‘सेटर्स’ बनाई थी।
जल्द ही बचा हुआ काम पूरा करेंगे संजू
मेकर्स ने संजय दत्त की सुविधा का ख्याल रखते हुए महबूब स्टूडियो में शूटिंग का शेड्युल रखा है। उनके मुताबिक ये 'धमाल' वाले जोनर की तरह फील गुड वाली फिल्म होगी। इस प्रोजेक्ट के अलावा संजू बहुत जल्द 'शमशेरा' की डबिंग और भुज: प्राइड ऑफ इंडिया’ का बचा हुआ काम भी पूरा करेंगे।
कीमो की बजाय इम्युनोथेरेपी ले रहे
संजय दत्त के करीबियों ने उनकी हेल्थ को लेकर भी नई डेवलपमेंट बताई है। उनके मुताबिक संजय कीमो की बजाय इम्युनोथेरेपी ले रहे हैं। यह एक नई तकनीक है। जिसमें शरीर की प्रतिरक्षक कोशिकाएं, कैंसर की मेलिनेंट कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती हैं।
इस थेरेपी में स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं होता
इम्युनोथेरेपी लेने से बीमारी से लड़ने की ताकत इतनी मजबूत हो जाती है कि कैंसर तक का मुकाबला किया जा सकता है। रिपोर्ट में बहुत से लोगों को इम्युनो ओंकोलॉजी से फायदा हुआ है। इस तकनीक में हर इंसान की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इम्युन बूस्टर थेरेपी दी जाती है। लिहाजा इम्युन सेल्स खासतौर पर कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती हैं और शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
कीमोथेरेपी में हेल्दी सेल्स भी बुरी तरह प्रभावित होती हैं
कीमोथेरेपी के मुकाबले यही यहां फर्क है। कीमो के दौरान हेल्दी सेल्स भी अफेक्ट हो जाती हैं। नतीजतन कैंसर रोग के दोबारा होने के आसार रहते हैं। संजय दत्त इम्युनोथेरेपी ले रहे हैं। इससे इलाज के साइड इफेक्ट से वो बचे रह सकते हैं।
कोरोनाकाल के बीच काम शुरू करने वाले सितारों की लिस्ट में आलिया भट्ट का नाम भी जुड़ गया है। जिन्होंने हाल ही में डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' की शूटिंग शुरू कर दी है। फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस फिल्म की शूटिंग जनवरी तक पूरा करने का टारगेट है।
फिल्म की शूटिंग फिलहाल मुंबई की फिल्मसिटी में चल रही है। सूत्रों के मुताबिक शूटिंग के दौरान कलाकारों और क्रू मेंबर्स का ज्यादा से ज्यादा वक्त बचाने के लिए सेट पर खास तरीका अपनाया जा रहा है और ज्यादा से ज्यादा सीन्स की शूटिंग रात में की जा रही है।
रात को शुरू होती है फिल्म की शूटिंग
सूत्रों ने बताया, 'कलाकार और क्रू मेंबर्स देर शाम को सेट पर आते हैं। पूरी रात शूट करते हैं और सुबह घर वापसी करते हैं। पूरे दिन आराम करने के बाद एकबार फिर शाम को सेट पर लौट आते हैं। इस तरह सब मुंबई के ट्रैफिक में फंसने से बच जाते हैं। साथ ही सेट पर रात के साए में कमाठीपुरा की दुनिया को कैमरे में कैद करते हैं।'
आलिया भी नाइट ड्यूटी करने के लिए राजी
सोर्सेस का कहना है कि फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली अगले साल जनवरी तक यही शेड्यूल रखना चाहते हैं। आलिया भी तब तक 'नाइट ड्यूटी' करने को राजी हैं। फिल्म में आलिया को उम्रदराज भी दिखाया जाएगा। हालांकि उसके लिए भंसाली ने उनसे वजन बढ़ाने को नहीं कहा है।
सेट पर कुछ लोग कोरोना संक्रमित भी हुए
सेट के लोगों ने यह भी बताया कि बीच में सेट पर कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव निकल आए थे। जिसके बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। हालांकि इसके बाद भी अन्य लोग और कलाकार घबराए नहीं और बेखौफ शूट करते रहे।
फिल्म में अजय देवगन का होगा कैमियो
फिल्म में अजय देवगन का कैमियो भी देखने को मिलेगा। हालांकि उनके हिस्से की शूटिंग नहीं हुई है। राइटिंग टीम से जुड़े लोगों ने बताया कि भंसाली ने फिलहाल आलिया के अपोजिट रणबीर कपूर को साइन नहीं किया है। अजय देवगन भी आलिया के अपोजिट नहीं हैं। वे उनके मेंटोर या प्रोटेजी के रोल में हैं। अजय देवगन दो हफ्ते बाद फिल्म को ज्वॉइन करेंगे।
फिल्म में होंगे दो अलग-अलग टाइम जोन
फिल्म दो अलग-अलग टाइमजोन में सेट है। एक हिस्सा विभाजन से पहले का है, वहीं दूसरा पोर्शन आठवें दशक में सेट है। 1946 के कमाठीपुरा को दिखाने के लिए भंसाली वहां 10 से ज्यादा बार आ चुके हैं और सेट को रियल लुक देने के लिए कई पुराने वास्तुकारों से भी मिल चुके हैं। हालांकि फिल्म में चौथे दशक का छोटा सा हिस्सा देखने को मिलेगा। बाकी 80 प्रतिशत फिल्म सातवें दशक में सेट है।
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कम नहीं किया गया फिल्म का बजट
कोरोना इफेक्ट के बाद भी मेकर्स ने फिल्म के बजट में कटौती नहीं की है। फिल्मसिटी में कमाठीपुरा रीक्रिएट किया गया है और उस पर तकरीबन छह करोड़ खर्च हुए हैं। सेट पहले का ही बना हुआ है। आर्ट डिपार्टमेंट के लोगों ने बताया कि सेट कभी डिमॉलिश नहीं हुआ था। मीडिया में ना जाने कहां से ऐसी खबरें आ गई थीं।
सिंक साउंड में हो रही है फिल्म की शूटिंग
शूटिंग पूरी होने के बाद डबिंग से बचने के लिए भंसाली शूट के दौरान एक खास काम भी कर रहे हैं। इसके लिए वे सेट पर सिंक साउंड में शूट करवा रहे हैं। ताकि शूटिंग पूरी होने पर बाद डबिंग करने के लिए रिकॉर्डिंग स्टूडियो जाने की जरूरत कम से कम पड़े।
कोरोना काल में भी अक्षय कुमार काफी एक्टिव हैं और काफी तेजी से फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं। हाल ही में फिल्म 'बेलबॉटम' पूरी करने के बाद अब वे जल्द ही यशराज प्रोडक्शन की फिल्म 'पृथ्वीराज चौहान' की शूटिंग शुरू करने वाले हैं। उनके करीबियों का कहना है कि वे आठ अक्टूबर से इस फिल्म के शूट में जुट जाएंगे।
फिल्म की शूटिंग की तैयारी के सिलसिले में मंगलवार से क्रू मेंबर्स का कोरोना टेस्ट शुरू हो चुका है और नेगेटिव रिजल्ट वालों को ही स्टूडियों में एंट्री दी जाएगी। इस दौरान प्रोडक्शन से जुड़े लोगों को स्टूडियो के करीब होटल में रुकवाया गया है। पूरा क्रू शूटिंग से पहले और बाद में एक साथ होटल से स्टूडियों तक आना जाना करेगा। तकनीकी तौर पर इसे 'बायो बबल' कहा जाता है।
फिल्म की 30 प्रतिशत शूटिंग होना बाकी
इससे पहले 'पृथ्वीराज चौहान' की टीम ने साढ़े छह महीने पहले जयपुर में आउटडोर में एक्शन सीक्वेंस शूट किया था। सूत्रों ने बताया, 'आठ अक्टूबर से अब क्लाइमैक्स शूट होना है। जिसमें मोहम्मद गौरी, पृथ्वीराज चौहान को अंधा करवा देता है। वही सीक्वेंस फिल्माया जाएगा, साथ ही इस दौरान उनकी सेनाओं की लड़ाई भी दिखाई जाएगी। जयपुर तक फिल्म का 70 प्रतिशत हिस्सा शूट किया जा चुका था। आगे नवंबर तक इसका बाकी बचा 30 प्रतिशत हिस्सा भी शूट किया जाएगा।'
50 लोगों के साथ शूट होंगे वॉर सीक्वेंस
मौजूदा हालातों के चलते वॉर सीक्वेंस भी स्टूडियो में ही फिल्माए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि कोरोना की परिस्थितियों के चलते 50 से ज्यादा लोगों को शूटिंग पर नहीं रखा जा सकता। लिहाजा इतनी ही तादाद में वॉर सीक्वेंस फिल्माए जाएंगे। आम दिनों में ऐसे सीक्वेंस 400 से 500 लोगों के साथ शूट होते थे। अभी कम क्रू मेंबर्स के साथ इसे अंजाम दिया जाएगा। आगे पोस्ट प्रोडक्शन में वीएफएक्स की मदद से इसे 1000 की सेना में बदल दिया जाएगा।
बेलबॉटम में जेम्सबॉन्ड की तरह दिखेंगे अक्षय
उधर, 'बेलबॉटम' में अक्षय कुमार अस्सी के दशक के जेम्सबॉन्ड स्टाइल का एक्शन करते नजर आएंगे। सेट पर मौजूद लोगों ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा, 'हमारी फिल्म सातवें और आठवें दशक में सेट है। साथ ही यूरोप, चाइना, रशिया, अमेरिका के जासूसों से डील करती है। ऐसे में फिल्म के हीरो को इंडियन जेम्सबॉन्ड सा दिखाया गया है, जो दिमागी एक्शन करने में भी माहिर है। हां, मगर आधुनिक तकनीकों से लैस गैजेट्स जैसे गाडि़यां, घडि़यां आदि जो रियल जेम्सबॉन्ड के पास होती हैं वो सब नहीं है।'
फिजिकल एक्शन कम रखा गया
फिल्म की एक्शन टीम ने फिल्म में ब्लास्ट वाले सीन को कम किया है। वो इसलिए क्योंकि बहुत कम समय में फिल्म को शूट करना था। विलेन के साथ हाथापाई भी कम रखी गई है। यहां अक्षय कुमार दिमागी करतबों से दुश्मनों से लोहा लेते नजर आएंगे।
हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'परिवार' में अभिनेता गजराज राव एक बार फिर अपनी एक्टिंग का जलवा दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि इस वेब सीरीज को उन्होंने सिर्फ इस मकसद से साइन किया क्योंकि उन्हें फिल्म 'भेजा फ्राई' के डायरेक्टर के साथ काम करना था। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने इसकी शूटिंग और अपने जीवन से जुड़े किस्से साझा किए।
Q- इस कोरोनाकाल ने हम सभी को बहुत कुछ सिखाया है आपने इस मुश्किल समय से क्या सीख ली है?
गजराज- 'हम सभी ने कोरोना काल में यह सीखा है कि कैसे खुद को बचा कर के काम करना है, सुरक्षित रहना है। मुझे नहीं लगता कि यह मास्क हमारी जिंदगी से अगले 1 या 2 सालों में कहीं जाने वाला है लेकिन आज भी जब लोग मास्क को नाक के नीचे पहनते हैं तो गुस्सा आता है। कुछ दिन पहले ही मैं बैंक गया था जहां लोग मास्क को नाक के नीचे पहने दिखे। मेरा मन किया कि मैं जाकर कुछ बोलूं लेकिन आजकल लोग बहुत जल्दी भड़क जाते हैं। हम सभी को यह समझना होगा कि मास्क हम अपनी सुरक्षा के लिए पहन रहे हैं, मात्र एक ड्यूटी के लिए नहीं।'
Q- इस वेब सीरीज में आपका लुक बहुत इंटरेस्टिंग है, पहली बार आपको बड़े बालों में देखा जा रहा है?
गजराज- ''परिवार' में मेरा लुक डायरेक्टर सागर बल्लारी ने डिसाइड किया है। मैं उनकी फिल्म 'भेजा फ्राई' का बहुत बड़ा फैन हूं और उसे करीब 25 से 50 बार देख चुका हूं। तो मैं बहुत खुश था कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला और चीजें अपने आप आसान होती गईं। इस लुक को भी उन्होंने ही डिसाइड किया था और सबको ये बहुत पसंद आ रहा है।'
Q- रणवीर शौरी, विजय राज और अभिषेक बनर्जी सभी अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते हैं, क्या सेट पर भी हल्का-फुल्का मजाक हुआ करता था?
गजराज- 'ये सभी एक्टर्स इंडस्ट्री के धुरंधर हैं और मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इन सबके साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि हमारा जो शेड्यूल था वो बहुत हेक्टिक था और हमने भरी गर्मी में लखनऊ में आउटडोर लोकेशन पर शूट किया है। जिसकी वजह से सभी की हालत बहुत खराब थी। हम लोग अक्सर हंसी ठिठोली किया करते थे पर हेक्टिक शेड्यूल की वजह से सभी का फोकस काम पर ज्यादा रहता था।'
Q- 'बधाई हो' की सक्सेस के बाद से आपके पास फिल्मों के बहुत ऑफर आ रहे हैं लेकिन किसी भी प्रोजेक्ट को चुनने के पीछे आप का क्या उद्देश्य होता है?
गजराज- 'मुझे ऐसा लगता है कि रोल मुझे खुद चुन लेते हैं, स्क्रिप्ट्स मुझे चुनती हैं। इस सीरीज को करने के पीछे उद्देश्य सिर्फ यही था कि मुझे 'भेजा फ्राई' के डायरेक्टर के साथ काम करना था और प्रोड्यूसर के पिछले कुछ शोज मैंने देखे थे जो मुझे काफी पसंद आए थे तो मैं इस सीरीज का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक था। हर प्रोजेक्ट को चुनने के पीछे अलग-अलग कारण होते हैं और सबसे महत्वपूर्ण कारण होता है स्क्रिप्ट।'
Q- 'इंडिया वाली मां' सीरियल का प्रोमो आपने हाल ही में डायरेक्ट किया वो भी अपने घर पर बैठे-बैठे कैसे संभव हुआ?
गजराज- 'मैं दरअसल एक प्रोडक्शन कंपनी में 15 से 17 सालों से प्रोमो डायरेक्ट कर रहा हूं। यह एक नया अनुभव इसलिए था क्योंकि मैं घर पर था और मेरी पूरी टीम स्टूडियो में थी। इस प्रोमो को मैंने रिमोट की मदद से शूट किया और सभी को बहुत पसंद आ रहा है।'
फिल्म 'बधाई हो' के सेट पर नीना गुप्ता और सुरेखा सीकरी के साथ गजराज राव।
Q- आपकी फिल्म 'बधाई हो' की को-स्टार सुरेखा जी की तबीयत नासाज है क्या हाल ही में कभी उनसे आपकी बात हुई है?
गजराज- 'मैं सुरेखा जी से नियमित टच में हूं। उनसे बात करता रहता हूं उनकी, उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेता रहता हूं। कुछ दिन पहले उनसे मेरी बात हुई थी और वो बात कर पा रही थीं। जहां तक आर्थिक मदद का सवाल है तो सुरेखा जी खुद ही इतनी सक्षम हैं कि उन्हें किसी की भी मदद की जरूरत नहीं है। वे एक बहुत ही जिजीविषा वाली महिला है और मुझे पूरा विश्वास है कि 2 महीने में वे अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगी और फिर से काम करने लगेंगी, क्योंकि एक्टिंग उनका पैशन है और उनमें जीवन जीने की ललक बहुत है। मुझे वे बहुत प्रिय है और हम सभी को बहुत इंस्पायर करती हैं।'
केंद्र सरकार ने ‘अनलॉक 5.0’ की घोषणा करते हुए 15 अक्टूबर से सिनेमाघरों को खोलने की इजाजत भी दे दी है। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक देशभर के सिनेमाघर पहले रोहित शेट्टी, राजकुमार हिरानी, अमिताभ बच्चन और क्रिस्टोफर नोलन की फिल्में रिलीज करेंगे। नए कंटेंट के तौर पर दीपावली के आसपास से सूर्यवंशी, लक्ष्मी बम, कुली नंबर 1 जैसी फिल्मों को पहले रिलीज किया जाएगा।
ट्रेड एनालिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल ने कहा, 'सिनेमाघर संचालकों को 15 दिन का समय मिल गया है। लिहाजा इस पीरियड में वो अपनी प्रॉपर्टी की साफ सफाई, सैनिटाइज आदि कर लेंगे। 50 प्रतिशत सीटों की ही अनुमति है तो उनमें कैसे सीटिंग होनी है, वे सब तैयारियां हो जाएंगी।'
पुरानी फिल्मों से होगी शुुरुआत
आगे उन्होंने कहा, 'थिएटर खुलने के बाद शुरूआत छोटे बजट वाली पुरानी फिल्मों से होंगी। खासकर जो छोटे सेंटर्स हैं, वहां ‘धूम’, ‘गोलमाल’, ‘मुन्नाभाई’ टाइप की जो पिक्चरें हैं, वे रिलीजें होंगी। ‘हेराफेरी’ जैसी फिल्में भी सिनेमाघर वाले डिस्ट्रीब्यूटरों से राइट्स लेकर रिलीज करेंगे।'
'हाल के महीनों में ओटीटी पर आई फिल्में जैसे ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ से लेकर ‘गुलाबो सिताबो’, ‘इंग्लिश मीडियम’ भी यहां रिलीज हो सकती हैं। मगर ये सब एकाध शो में रिलीज से शुरू करेंगे। थाह लेने की कोशिश करेंगे कि लोग इन फिल्मों को बड़े पर्दे पर देखना चाहेंगे क्या।'
सिनेमाघरों को मिलेगी पूरी मदद
जानकारों का कहना है कि सिनेमाघर वालों की चौतरफा मदद होगी। ना सिर्फ डिस्ट्रीब्यूटर, बल्कि प्रोजेक्टर में सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली यूएफओ जैसी कंपनियां भी सहायता को राजी हैं। वो प्रोड्यूसरों से वसूली जाने वाले वचुर्अल प्रिंट फीस में कटौती करेंगे। उसके चलते प्रोड्यूसर सिनेमाघर संचालकों से कम रकम वसूलेंगे।
रिलिज्ड, डब्ड और रीजनल लैंग्वेज वाली फिल्मों से सिनेमाज ओपन होंगेः कोमल नाहटा
ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के शब्दों में 'शुरू में तो रिलिज्ड, डब्ड और रीजनल लैंग्वेज वाली फिल्मों से सिनेमाज ओपन होंगे। छोटी फिल्मों को भी रिलीज किया जाएगा। जाहिर तौर पर ‘सूर्यवंशी’ दिवाली से पहले तो आएगी नहीं। ‘83’ क्रिसमस से पहले नहीं आएगी। साथ में दीपावली से एक महीने पहले तक ये अंदाजा भी हो जाएगा कि ऑडियंस किस तादाद में सिनेमाघरों में आ रही है।'
फिलहाल सबका मकसद सिर्फ एक है
आगे उन्होंने कहा, 'ऐसे में 15 अक्टूबर से दीपावली तक के वक्त में ‘बागी 3’ और ‘इंग्लिश मीडियम’ के अलावा हॉलीवुड से 'टेंनेंट', 'मुलान' आदि की रिलीज मुमकिन है। यह भी संभव है कि 'टेनेंट' का हिंदी वर्जन ही सिर्फ रिलीज हो। सबका मकसद एक है, किसी तरह काम फिर से शुरू हो। कमाई का कोई नहीं सोच रहा है। लोगों को वापस सिनेमाघर आने की आदत डलवाने पर जोर होगा।'
यशराज की भी कुछ फिल्में तैयार हैं
'रिवाइज्ड टर्म्स पर फिल्में रिलीज होंगी। यशराज की भी कुछ फिल्में रेडी हैं तो उन्हें भी लिया जा सकता है। सलमान वगैरह भी दीपावली तक के पीरियड पर नजर रखेंगे। चूंकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु में 30 अक्टूबर तक बंद है। हिंदी फिल्मों के लिहाज से महाराष्ट्र बड़ी टेरेटरी है, तो यह पहलू भी देखना दिलचस्प होगा।'
डिस्ट्रीब्यूटर्स सिनेमाघरों से कुछ एडवांस नहीं मांग रहेः कुमार आदर्श
सिंगल स्क्रीन बिरादरी से इंडियन स्टैंडअलोन सिने थिएटर गिल्ड फाउंडर के जनरल सेक्रेटरी कुमार आदर्श ने कहा, 'हम लोग ‘गुलाबो सिताबो’, ‘इंग्लिश मीडियम’ जैसी पिछली पहले से ही रिलीज हो चुकी फिल्मों से शुरू करेंगे। सिंगल स्क्रीन वालों को प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से सहायता के पूरे आश्वासन मिले हैं। वे सिनेमाघर वालों से कोई एडवांस पैसा डिमांड नहीं कर रहे हैं। नए कंटेंट के तौर पर पूरा भरोसा है कि ‘खाली-पीली’, ‘लक्ष्मी बम’, ‘कुली नंबर 1’ भी सिनेमाघरों में रिलीज रहने की पूरी संभावना रहेगी।'
सुशांत सिंह राजपूत के करियर की सबसे हिट फिल्मों में से एक 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' को रिलीज हुए बुधवार को 4 साल पूरे हो गए। ये फिल्म 30 सितंबर 2016 को रिलीज हुई थी। इस खास मौके पर दैनिक भास्कर ने फिल्म में सुशांत के साथ काम कर चुके कुछ कलाकारों से बात की और सुशांत से जुड़े उनके अनुभव को जाना।
राजेश शर्माः ‘उधार की सिगरेट’ ने सुशांत संग बनाया था जादुई कनेक्शन
फिल्म में धोनी के स्कूल कोच के रूप में नजर आए राजेश शर्मा ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहा, 'धोनी के कोच भी सेट पर थे। नीरज पांडे जी ने उनसे मिलवाया था। कोच बिल्कुल मुझ से विपरीत पर्सनालिटी के लग रहे थे। कद काठी, रंग, सूरत किसी भी तरह से कोई मेल नहीं था। फिर भी डायरेक्टर ने मुझ पर भरोसा किया था तो मुझ में ताकत आई। मैंने फिर बिना किसी झिझक के धोनी के कोच का रोल प्ले किया।'
आगे उन्होंने कहा, 'दूसरी चीज यह रही कि इस फिल्म में सुशांत के साथ केमिस्ट्री पहले से ही बनी हुई थी। उसकी वजह पुरानी थी। इससे पहले हम दोनों फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ में भी साथ काम कर चुके थे। वहां शूट के दौरान सुशांत ने बहुत हिचकिचाते हुए सिगरेट मांगी थी। उसके बाद हमारी मुलाकात धोनी के सेट पर हुई।'
'मैं सेट पर जल्दी पहुंच गया था। सुशांत बाद में अपनी गाड़ी से उतरे। उनके हाथों में सिगरेट थी। वे स्पॉट पर सिगरेट नचाते हुए मेरे पास आए और बोले सर आप की एक सिगरेट उधार है। उसके बाद हम कभी उनकी तो कभी वह हमारी सिगरेट पिया करते थे।'
'फिर रांची में एक बड़ा उम्दा होटल था। वहां कबाब बड़ा अच्छा मिलता था। वहां सुशांत कबाब खिलाने ले गए थे। अनुपम खेर जी भी उस स्पॉट पर हमें ले जाते थे। फिर नाश्ते वगैरह पर हमारी मुलाकातें हुआ करती थीं। कुल मिलाकर सुशांत खाने खिलाने के बड़े शौकीन थे।'
राजेश शर्मा।
आगे राजेश ने कहा, 'सुशांत सिंगल टेक में सीन ओके नहीं करते थे। कई बार डायरेक्टर के साथ ओके होने के बावजूद वो कहते रहते कि एक बार और करते हैं। शूट के ब्रेक में फिल्मों से ज्यादा म्यूजिक पर ज्यादा बातचीत होती थी। संगीत का उन्हें बड़ा शौक था। उन्हें मेरी ‘नो वन किल्ड जेसिका’ और ‘लव शव ते चिकन खुराना’ पसंद आई थी।'
'सेट पर हम लोग सिगरेट के कश लगाते थे, मगर हां बाकी कभी लगा नहीं कि वो एब्नॉर्मल थे या डिप्रेशन में थे या उन्हें बाकी नशे की आदत थी। बिल्कुल नहीं। मेरा इससे भी बड़ा ऐतराज है कि लोग किसी की व्यक्तिगत आदतों को उसके प्रोफेशन से क्यों जोड़ते हैं।'
'बहरहाल, इस फिल्म पर सबने मेहनत की थी। सुशांत का समर्पण भी मिसाल के लायक था। धोनी की वॉक, उनकी आदतों को जिस खूबी से उन्होंने आत्मसात किया था, वो अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने कई हजार बार धोनी के वीडियोज देखें, सैकड़ों मुलाकातें कीं, तब उनकी तरह फिल्म में प्रेजेंट हो सके। समझा जा सकता है कि वो कैरेक्टर को लेकर कितने डेडिकेटेड थे।'
क्रांति प्रकाश झाः धोनी फिल्म से सुशांत और मैं एक दूसरे को भइबा से संबोधित करने लगे थे
फिल्म में सुशांत के दोस्त के रूप में नजर आए क्रांति ने बताया, 'फिल्म और सुशांत को लेकर ढेर सारे किस्से हैं। फिल्म में एक सीन है जब धोनी के अवतार में हम लोग सुशांत को कोलकाता एयरपोर्ट छोड़ने जाते हैं। रांची के आगे एक लोकेशन थी, जहां दिल के शेप वाले स्पॉट पर हम सब रूके। गाड़ी से उतरे और काफी बातें कीं। संघर्षों से लेकर अध्यात्म आदि को लेकर बातें होती थीं।'
'मुंबई में हम एक और सीक्वेंस शूट कर रहे थे। वहां सुशांत ने अपने सपनों के बारे में सबको बताया था। उस वक्त वो ‘चंदामामा’ करने वाले थे। इन दो वाकयों से समझा जा सकता है कि वो किस तरह के इंसान थे। हम दोनों एक-दूसरे को भइबा से संबोधित करते थे।
फिल्म के लिए हेलीकॉप्टर शॉट पर तो भइबा काफी दिनों से प्रैक्टिस कर रहे थे। सच कहूं तो उन्होंने मुझे भी उस शॉट की बारीकियां बताईं। वो सीक्वेंस फिल्माने के बाद सेट पर बड़ा बेहतरीन माहौल रहा। उनके घर भी आना जाना होता था। रिलीज के बाद मैं बिहार अपने घर आया था। वहां से मुंबई लौटा तो ठेकुआ, सिंघाड़ा लेकर आया था। हमने तीन चार घंटे साथ बिताए थे। पटना की ढेर सारी बातें याद कीं। फिर साल 2016 के बाद उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। मैसेज पर बातें हो पाती थीं।
क्रांति प्रकाश झा और सुशांत।
शूट के दौरान तो वो कभी डिप्रेशन में नहीं लगे। बहुत सारे अंदाजे लगाए जा रहे हैं, मैं भी लगाऊं तो वह सही नहीं होगा। सेट पर बड़े जॉली रहते थे। मेरी वेब सीरिज आई थी 'रक्तांचल'। उस वक्त उनको मैसेज किया था, मगर उनका नंबर बदलता रहा होगा, तो शायद उन तक पहुंच नहीं पाया। लिहाजा उनकी तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया।'
एनसीबी ने क्षितिज रवि प्रसाद के वकील सतीश मानशिंदे द्वारा लगाए गए आरोपों पर दी सफाई है। एनसीबी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की है। जिसमें कहा गया है कि ये दुर्भावनापूर्ण तरीके से बेहद गलत बात की गई है।
नारकोटिक्स की मुम्बई यूनिट ने क्षितिज रवि प्रसाद के घर से बरामद ड्रग की मात्रा के बाद ही उन्हें कानूनी तरीके से अरेस्ट किया है। इसके साथ ही उनके वकील और परिवार (उनकी माँ) को भी कानूनी तौर से बताया गया था। एनसीबी ने साफ किया कि हमने उनकी पत्नी और ससुर को भी मिलने की इजाजत दी थी।
नारकोटिक्स ने अपनी सफाई में ये भी बताया है कि क्षितिज जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, जिसकी जानकारी संबंधित कोर्ट के संज्ञान में भी लाई गई थी। इसी आधार पर हमने मेडिकल चेकअप के बाद उनकी पुलिस रिमांड ली थी।
सतीश ने एनसीबी पर लगाए थे ये आरोप
बॉलीवुड ड्रग केस में गिरफ्तार किए गए क्षितिज के वकील ने एनसीबी पर गंभीर आरोप लगाए थे। जिसमें सतीश ने कहा था कि नारकोटिक्स के अधिकारियों ने क्षितिज को झूठा बयान देने के लिए दबाव बनाया था, ताकि वह बयान में करण जौहर, सोमेन मिश्रा, राखी, अपूर्वा, नीरज, राहिल, जैसी सेलेब्रिटीज का नाम शामिल कर लें।
जब क्षितिज ने इन सबसे इनकार कर दिया तब समीर वानखेड़े ने कहा कि वो उसको सबक सिखाएंगे और उसको अपनी कुर्सी के बगल फर्श पर बैठ दिया और उसके चेहरे पर अपना जूता रख दिया। सतीश ने ये भी आरोप लगाए थे कि क्षितिज के घर से कुछ भी बरामद नही हुआ था लेकिन पुलिस ने सिगरेट की बट का पंचनामा गांजे के जॉइंट के रूप में दिखाया है। जिसकी चर्चा तमाम मीडिया हाउस से लेकर सोशल मीडिया तक छाई रही।
कोर्ट में क्षितिज ने नहीं किया था टाॅर्चर का जिक्र
पुलिस हिरासत के बाद जब उन्हें दोबारा कोर्ट के सामने हाजिर किया गया था तो कोर्ट ने भी इस तरह के किसी भी बुरे बर्ताव को नोटिस में नहीं लिया था। जिससे साफ होता है कि एनसीबी की हिरासत में क्षितिज को किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना नहीं दी गई थी।
इतना ही नही, क्षितिज ने खुद भी इस तरह के किसी दुर्व्यवहार का जिक्र नहीं किया था। एनसीबी ने मीडिया की खबरों को पूरी तरह तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया है। नारकोटिक्स विभाग ने कहा कि ये सच से परे है।
एनसीबी ने अपनी सफाई तो दे दी है लेकिन बॉलीवुड के इस हाई प्रोफाइल केस में आगे भी इस तरह के आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चलता रहेगा। ऐसे में नारकोटिक्स विभाग को भी उन गलतियों से बचना होगा जो मुम्बई पुलिस ने की थी।
कोरोना महामारी के कारण टेलीविजन शोज की शूटिंग के तरीके में भी काफी बदलाव आ गया है। कोविड से पहले जो एक्टर्स शूटिंग से ब्रेक के दौरान एक साथ बैठकर खाना खाते थे, वे अब कोरोना वायरस को ध्यान में रखकर सेट पर सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन कर रहे हैं। हालांकि सीरियल 'अनुपमा' के एक्टर्स ने इसका तोड़ निकाल लिया है।
दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान शो में वनराज शाह का मुख्य किरदार निभा रहे अभिनेता सुधांशु पांडे ने बताया कि COVID 19 ने कैसे उन्हें अपनी टीम के काफी करीब ला दिया।
मैं उन अभिनेताओं में से एक हूं जिसे अपनी प्राइवेसी पसंद हैं: सुधांशु पांडे
वे बताते हैं, 'मैं उन अभिनेताओं में से एक हूं जिसे अपनी प्राइवेसी पसंद हैं। सेट पर भी मैं उन लोगों में से एक रहा हूं, जो आवश्यकता नहीं होने पर अपनी वैनिटी वैन से बाहर नहीं निकलते। मैंने हमेशा अपना खाना अकेले खाया है और हमेशा से ऐसा ही रहा है। लेकिन COVID और साढ़े 3 महीनों तक घर में बंद रहने से चीजें बदल गईं हैं।'
आगे उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा रूपाली और सभी को एक साथ बैठकर खाना खाते देखा। इसीलिए मैं भी एक-दो बार उनके साथ बैठा और मुझे काफी अच्छा लगा। बाकी कलाकारों के साथ चैट करने और साथ में हंसने और इनपुट शेयर करने से एक अद्भुत बदलाव महसूस हुआ। यह एक शानदार अनुभव है। यह एक ऐसी आदत बन गई है कि मैं अब अकेले बैठकर खाना नहीं खा सकता।'
सुधांशु आगे बताते हैं, 'सोशल डिस्टेंसिंग ने हमारे लिए बहुत कुछ बदल दिया है। हम पहले की तरह शूटिंग नहीं कर रहे हैं। हम अपने शरीर, अपने कपड़ों की सफाई कर रहे हैं। लेकिन ना हम हाथ मिलाते हैं और ना किसी के गले लगते हैं। तकनीशियन पूरे दिन मास्क पहने हुए रहते हैं और अभिनेता केवल तभी इसे उतारते हैं जब वे शॉट दे रहे होते हैं। यह अब सामान्य हो गया है और ऐसा नहीं है कि इससे मेरे जीवन पर फर्क पड़ रहा है।'
सीरियल 'अनुपमा' के एक्टर्स।
हम अपनी बॉन्डिंग पर समझौता नहीं करते हैं: आशीष मल्होत्रा
अभिनेता आशीष मेहरोत्रा ने बताया, 'मुझे याद है कि लॉकडाउन से पहले हम सभी एक साथ बैठकर खाना खाते थे। अब हम यह भी मानते हैं कि जब हम एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, तो हम अपने विचारों को बेहतर ढंग से शेयर कर सकते हैं। चूंकि यह एक पारिवारिक शो है, यह वास्तव में सभी की मदद करता है।'
'लॉकडाउन के बाद हमने सावधानी बरती है। हम वो खाना खाते हैं जो हमें अपने घरों से मिलता है। हम अपने हाथों को सैनिटाइज करते हैं। खाने से पहले हम अपना खाना शेयर करते हैं। जो कोई भी खाना चाहता है, हम उसे इस तरह से शेयर करते हैं कि वे इसे ले सकें।'
'एक बार जब हम खाना शुरू करते हैं, तो हम शेयर नहीं करते। हम अपनी बॉन्डिंग पर समझौता नहीं करते हैं। हम सभी के बीच काफी दूरी भी है। यह सबसे अच्छा समय है क्योंकि ये 40 मिनट, हम बात करते हैं, हम शांत होते हैं और बहुत सारे विचार एक-दूसरे से शेयर करते हैं।'
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के 92वें जन्मदिन पर फेमस सिंगर हरिहरन ने उन्हें बधाई देते हुए उनके साथ काम करने का अपना अनुभव दैनिक भास्कर के साथ शेयर किया। उन्होंने बताया कि जब मैं पहली बार उनके साथ स्टेज शो में गा रहा था तो उन्होंने मुझे एक खास सीख दी थी।
हरिहरन ने कहा, 'दीदी को जन्मदिन बहुत-बहुत मुबारक हो। यही प्रार्थना करता हूं कि वे स्वस्थ और खुश रहें। फिल्मों में गाने से पहले उनके साथ बंगाल, लंदन आदि जगहों पर बहुत बड़े-बड़े शोज किए हैं। उसके बाद उनके साथ लम्हे, सत्य आदि फिल्मों में गाने गाए। अपने पिताजी के नाम पर साल में एक बार प्रोग्राम करती थीं। उसमें मैंने तीन-चार साल परफॉर्म किया। उनके पिताजी के नाम पर जो अवॉर्ड है उसे भी दिया। मेरे लिए ये सौभाग्य की बात है कि सबसे पहले उन्होंने एक लाइव म्यूजिशियन को यह अवॉर्ड दिया।
दीदी ने ऑडियंस को देखने से मना किया था
'ईस्ट बंगाल में उनके साथ पहली बार शोज में गा रहा था। गाना था 'ये रात भीगी भीगी...' स्टेज पर जाने से पहले उन्होंने कहा कि हरि पहली बार गा रहे हो तो ज्यादा ऊपर और ऑडियंस की तरफ मत देखना। अब कोई कहता है कि ऊपर मत देखना तो उसी बात के लिए उत्साहित रहते हैं।'
'मना करने के बाद भी मैंने बात नहीं मानी'
'पहला मुखड़ा गाया तो उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने इशारों से भी कहा कि बहुत अच्छा लगा। लेकिन जैसे म्यूजिक बजने लगा मैंने चुपके से नजर उठाकर ऑडियंस की तरफ देख लिया। वहां पर लाख लोगों से ज्यादा ऑडियंस बैठी थी। पहली बार इतने लोगों को एक साथ देखकर चंद लम्हे के लिए मेरा ध्यान हट गया। फिर तो अंतरा शुरू होते ही गलती कर बैठा।'
'मेरी गलती पर वो हंस रही थीं'
'खैर गलती ऑडियंस को नहीं सिर्फ हमें ही मालूम पड़ी। लेकिन जब 2 मिनट बाद दीदी की तरफ देखा तो वे हंस रही थीं कि तुमने क्यों ऑडियंस की तरफ देखा। उनको ऑब्जर्व करने से ही हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।'
'गाना याद नहीं होने तक वे माइक पर नहीं आतीं'
'दीदी को जब तक गाना याद नहीं हो जाता, तब तक वे माइक के सामने नहीं आती। ऐसा कभी नहीं हुआ कि बिना याद किए माइक के सामने आ जाएं। रिहर्सल दो-तीन बार करने के बाद हर बार उसी तरह का गाना गाती थीं। दो-तीन रिहर्सल के बाद ऐसा लगता था कि गाने में क्या रोशनी आ गई।'
'दीदी कैरम बहुत अच्छा खेलती हैं'
दीदी कैरम बोर्ड बहुत अच्छा खेलती हैं। वेरी गुड कैरम बोर्ड प्लेयर। मैंने उनके साथ उनके घर पर एक-दो बार कैरम खेला है। उनका कैरम बोर्ड खेलने का अंदाज ही अलग होता है। एकदम शार्प। उसे खेलने में भी एक अलग तरह की नजाकत होती थी, वे बिल्कुल अलग तरह से सोचती हैं।
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में पंडित दीनानाथ मंगेशकर के घर पर हुआ था। वे पांच भाई-बहनों के बीच सबसे बड़ी हैं। इस खास मौके पर बॉलीवुड सिंगर उदित नारायण ने लता दीदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके साथ काम करने का अपना अनुभव दैनिक भास्कर के साथ साझा किया है। उन्होंने बताया कि लता दीदी के साथ गाना गाना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा अवॉर्ड है।
'भारत रत्न' लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीत गाए हैं। बकौल लता जी, 'पिताजी जिंदा होते तो मैं शायद सिंगर नहीं होती'...ये मानने वाली महान गायिका लता मंगेशकर लंबे समय तक पिता के सामने गाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थीं। फिर परिवार को संभालने के लिए उन्होंने इतना गाया कि सर्वाधिक गाने रिकॉर्ड करने का कीर्तिमान 'गिनीज बक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में 1974 से 1991 तक हर साल अपने नाम दर्ज कराती रहीं। 91वें जन्मदिन पर लताजी से जुड़े कुछ खास किस्से।
लता जब गातीं तो मां डांटकर भगा देती थीं
लता मानती हैं कि पिता की वजह से ही वे आज सिंगर हैं, क्योंकि संगीत उन्होंने ही सिखाया। जानकर आश्चर्य हो सकता है कि लता के पिता दीनानाथ मंगेशकर को लंबे समय तक मालूम ही नहीं था कि बेटी गा भी सकती है। लता को उनके सामने गाने में डर लगता था। वो रसोई में मां के काम में हाथ बंटाने आई महिलाओं को कुछ गाकर सुनाया करती थीं। मां डांटकर भगा दिया करती थीं कि लता के कारण उन महिलाओं का वक्त जाया होता था, ध्यान बंटता था।
पिता के शिष्य को सिखाया था सही सुर
एक बार लता के पिता के शिष्य चंद्रकांत गोखले रियाज कर रहे थे। दीनानाथ किसी काम से बाहर निकल गए। पांच साल की लता वहीं खेल रही थीं। पिता के जाते ही लता अंदर गई और गोखले से कहने लगीं कि वो गलत गा रहे हैं। इसके बाद लता ने गोखले को सही तरीके से गाकर सुनाया। पिता जब लौटे तो उन्होंने लता से फिर गाने को कहा। लता ने गाया और वहां से भाग गईं। लता मानती हैं 'पिता का गायन सुन-सुनकर ही मैंने सीखा था, लेकिन मुझ में कभी इतनी हिम्मत नहीं थी कि उनके साथ गा सकूं।'
सच हो गई पिता की भविष्यवाणी
इसके बाद लता और उनकी बहन मीना ने अपने पिता से संगीत सीखना शुरू किया। छोटे भाई हृदयनाथ केवल चार साल के थे जब पिता की मौत हो गई। उनके पिता ने बेटी को भले ही गायिका बनते नहीं देखा हो, लेकिन लता की सफलता का उन्हें अंदाजा था, अच्छे ज्योतिष जो थे।
लता के मुताबिक उनके पिता ने कह दिया था कि वो इतनी सफल होंगी कि कोई उनकी ऊंचाइयों को छू भी नहीं पाएगा। साथ ही लता यह भी मानती हैं कि पिता जिंदा होते तो वे गायिका कभी नहीं बनती, क्योंकि इसकी उन्हें इजाजत नहीं मिलती।
13 की उम्र से संभाला परिवार
पिता की मौत के बाद लता ने ही परिवार की जिम्मेदारी संभाली और अपनी बहन मीना के साथ मुंबई आकर मास्टर विनायक के लिए काम करने लगीं। 13 साल की उम्र में उन्होंने 1942 में 'पहिली मंगलागौर' फिल्म में एक्टिंग की। कुछ फिल्मों में उन्होंने हीरो-हीरोइन की बहन के रोल किए हैं, लेकिन एक्टिंग में उन्हें कभी मजा नहीं आया। पहली बार रिकॉर्डिंग की 'लव इज ब्लाइंड' के लिए, लेकिन यह फिल्म अटक गई।
ऐसे मिला पहला बड़ा ब्रेक
संगीतकार गुलाम हैदर ने 18 साल की लता को सुना तो उस जमाने के सफल फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी से मिलवाया। शशधर ने साफ कह दिया ये आवाज बहुत पतली है, नहीं चलेगी'। फिर मास्टर गुलाम हैदर ने ही लता को फिल्म 'मजबूर' के गीत 'अंग्रेजी छोरा चला गया' में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था, इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में शशधर ने अपनी गलती मानी और 'अनारकली', 'जिद्दी' जैसी फिल्मों में लता से कई गाने गवाए।
कभी अचार-मिर्च से नहीं किया परहेज
करियर के सुनहरे दिनों में वो गाना रिकॉर्ड करने से पहले आइसक्रीम खा लिया करती थीं और अचार, मिर्च जैसी चीजों से भी उन्होंने कभी परहेज नहीं किया। उनकी आवाज हमेशा अप्रभावित रही। 1974 में लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में परफॉर्म करने वाली वे पहली भारतीय हैं।
अपने सफर को जब लता याद करती हैं तो उन्हें अपने शुरुआती दिनों की रिकॉर्डिंग वाली रातें भुलाए नहीं भूलतीं। तब दिन में शूटिंग होती थी और रात की उमस में स्टूडियो फ्लोर पर ही गाने रिकॉर्ड होते थे। सुबह तक रिकॉर्डिंग जारी रहती थी और एसी की जगह आवाज करने वाले पंखे होते थे।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज 91 साल की हो गईं। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में पंडित दीनानाथ मंगेशकर के घर पर हुआ था। वे पांच भाई-बहनों के बीच सबसे बड़ी हैं। इस खास मौके पर बॉलीवुड सिंगर उदित नारायण ने लता दीदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके साथ काम करने का अपना अनुभव दैनिक भास्कर के साथ साझा किया है। उन्होंने बताया कि लता दीदी के साथ गाना गाना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा अवॉर्ड है।
उदित नारायण ने कहा, 'सबसे पहले तो साक्षात सरस्वती, भारत रत्न, कोकिला कंठ को जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां देना चाहता हूं। पांच-छह साल की उम्र में सरपंच, मुखिया के यहां ट्रांजिस्टर पर दूर खड़ा होकर गाने सुना करता था तो सोचता था कि इसके अंदर बैठकर ये लोग इतना सुंदर कैसे गाते हैं। खैर, काफी संघर्ष करने के बाद मुंबई आया।'
लता दीदी के साथ काम करना भारत रत्न मिलने जैसा
'अपनी जनरेशन में मैंने लता मंगेशकर के साथ सबसे ज्यादा तकरीबन दो-ढाई सौ फिल्मों में गाने गाए हैं। यह मेरे लिए बहुत बड़ा अचीवमेंट है। मुझे भारत सरकार ने 2009 में 'पद्मश्री' और 2016 में 'पद्म भूषण' दिया, लेकिन लता जी के साथ मुझे जो इतना काम करने का मौका मिला वही मेरा सबसे बड़ा अवॉर्ड है। मैं तो समझता हूं कि मुझे भारत रत्न मिल गया। लता जी के साथ कई बार स्टेज शेयर करने का मौका मिला।'
लता दीदी ने स्टेज शो करने के लिए बुलाया तो रात भर सो नहीं पाया
'यह बात 1 दिसंबर, 1992 की है। लता जी ने लोगों से कहा कि इस शो में मुझे उदित नारायण चाहिए। मुझे जब खबर मिली कि लता दीदी ने इस तरह की बातें की हैं, तब खुशी के मारे रात भर सो नहीं पाया। सौभाग्य से 1 दिसंबर को मेरा जन्मदिन भी रहता है। जब गाने के लिए गया तो उन्होंने अनाउंसर हरीश भिमाणी जी से कहा कि स्टेज पर मुबारकबाद देने के बाद मेरी तरफ से उन्हें 'प्रिंस आफ प्लेबैक सिंगिंग' का टाइटल दे देना। इतना ही नहीं उन्होंने मुझे गोल्ड की एक चैन भी स्टेज पर भेंट की थी।'
DDLJ की रिकॉर्डिंग के समय लता दीदी को देख नर्वस हो रहा था
'फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का गाना- मेहंदी लगा के रखना... गा रहा था तब तक स्टूडियो में मेरे सामने आकर लता दीदी बैठ गईं। उन्हें सामने देखकर मैं नर्वस हो रहा था। मैंने कहा- दीदी आप सामने बैठी रहेंगी तो मैं कैसे गा पाऊंगा। उन्होंने कहा- मैं तुम्हें ही सुनने के लिए यहां आई हूं। लेकिन उनके सामने गाना गा पाना मेरे लिए संभव नहीं था। फिर उन्होंने कहा आप कुछ भी कर लो, लेकिन आज मैं यहां बैठकर आपका गाना सुनूंगी।'
'खैर जब लगा कि मैं नर्वस हो जाऊंगा, तब वे मुझे जोक वगैरह सुनाने लगीं। बाद में यश चोपड़ा जी आए। उन्होंने खाना वगैरह मंगाया। हम सबने साथ में खाना खाया बाद में वे रिकॉर्डिंग रूम के पास चली गईं और कहा कि मैं यहां बैठकर आपका गाना सुनूंगी। फिर मैंने मेहंदी लगा के रखना... गाना गाया था।'
भोली सी सूरत... गाने में लता जी का सिर्फ आलाप है
'उस जमाने में लता जी कई बार फिल्ममेकर से अपने साथ गाने के लिए मेरा नाम लेती थीं। भोली सी सूरत आंखों में मस्ती दूर खड़ी शर्माए... गाना माधुरी दीक्षित और शाहरुख खान पर फिल्माया गया है। यह मेरा सोलो गाना था, लेकिन इसमें लता जी सिर्फ आलाप दे रही हैं। दरअसल सिचुएशन ही ऐसी थी कि फिल्म में शाहरुख खान गाना गाते हैं और माधुरी दीक्षित बीच-बीच में आलाप करती हुई दिखाई देती है।'
घर पर आईं तो कहने लगीं एक चाय और हो जाए
'वीर-जारा' के गाने जानम देख लो मिट गई दूरियां... में स्वर्गीय मदन मोहन जी का म्यूजिक था, जिसे मैंने गाया था। जब लता जी ने यह गाना सुना तो मुझे फोन करके कहने लगीं, आपको बहुत-बहुत बधाई हो। आपने मदन भैया का गाना बहुत अच्छा गाया है। उनसे तारीफ सुनकर मैं सोच में पड़ गया। फिर उन्होंने बताया मैं स्टूडियो में रिकॉर्डिंग करने आई हूं।
मैंने उनसे गुजारिश की कि आप मेरे घर के पास में ही हैं। घर पर आकर आपका आशीर्वाद मिल जाए तो खुद को सौभाग्यशाली समझूंगा। खैर पहले तो मना करने लगी, लेकिन 2 घंटे बाद देखा तो उनकी गाड़ी मेरे घर के सामने आकर खड़ी हो गई।
दीदी घर पर आईं तो हम सबने मिलकर साथ में चाय पी और पोहे खाए। उस समय मेरे माताजी-पिताजी घर पर आए हुए थे, तब दीदी ने उनसे लगभग 4 घंटे तक बातें की। जाने का वक्त हुआ, तब कहने लगे कि दार्जिलिंग की एक चाय और हो जाए। खैर, उनका आशीर्वाद पाकर अभिभूत रहा। जाते वक्त उनके चरणों में अपना माथा रखकर आशीर्वाद लिया।
मुझे 'दिल तो पागल है', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'वीर-जारा', 'सातवां आसमान', 'दुश्मन' समेत कई अन्य फिल्मों में उनके साथ गाने का सौभाग्य मिला।'
(जैसा उदित नारायण ने उमेश कुमार उपाध्याय को बताया)
करन जौहर की हाउस पार्टी, करन जौहर का वीडियो, करन जौहर की फिल्में, करन जौहर का बढ़ाया हुआ नेपोटिज्म और अब करन जौहर की ड्रग पार्टीज... खबरों के अनुसार करन जौहर का नाम रकुल प्रीत सिंह ने पूछताछ के दौरान भी लिया। अब एक और एक्ट्रेस सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने यह खुलासा किया है कि बॉलीवुड में वापसी के लिए उनसे करन जौहर की ड्रग्स पार्टीज में जाने के लिए कहा गया था। बकौल सुचित्रा ऐसा करने के लिए उन्हें क्वॉन टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी ने ही कहा था।
एजेंट ने बताया था वापसी का गलत रास्ता
सुचित्रा से एक बार क्वॉन के एक रिप्रेजेंटेटिव ने पूछा था कि वे एक्टिंग में वापसी क्यों नहीं करतीं। तब सुचित्रा ने कहा था कि उनके बच्चे बहुत छोटे हैं। उस बुकिंग एजेंट ने सुचित्रा से कहा था कि फिल्मों में वापसी करना आसान नहीं है। उस एजेंट का कहना था कि सुचित्रा को वापसी करने के लिए करन जौहर की पार्टीज में जाना होगा।
एजेंडा से चलती है लोगों की अंतरआत्मा
एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में सुचित्रा ने यह बताया कि बॉलीवुड ड्रग नेक्सस के एक्सपोज होने पर चुप है। बॉलीवुड में कई बड़े मुद्दों पर चुप्पी साध ली जाती है क्योंकि जो माहौल है वह ऐसा कि तुम मेरी पीठ खरोंचो तो मैं तुम्हारी पीठ खरोंचता हूं। इतना ही नहीं इनकी सामाजिक अंतरआत्मा भी एजेंडा से चलती है।
शाहरुख के साथ दी थी बड़ी हिट
सुचित्रा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। अक्सर वे ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार रखने के कारण चर्चा में रहती हैं। सुचित्रा की शादी शेखर कपूर से हुई थी, लेकिन उनका तलाक हो चुका है। सुचित्रा ने शाहरुख के साथ कभी हां कभी ना जैसी हिट फिल्म दी थी। सुचित्रा की लेटेस्ट फिल्म जॉन अब्राहम के साथ रोमियो अकबर वॉल्टर थी।
जाने-माने प्लेबैक सिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम का 74 साल की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। वे पिछले करीब डेढ़ महीने से चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका कोरोना का इलाज चल रहा था। 50 साल के सिंगिंग करियर में बाला ने बॉलीवुड के कई म्यूजिक डायरेक्टर्स और सिंगर्स के साथ काम किया। जिनमें से कुछ ने दैनिक भास्कर के साथ उनसे जुड़े कुछ किस्से साझा किए।
ललित पंडित : किशोर कुमार को टक्कर देने वाले एक ही इंसान थे एसपी बालू जी
संगीतकार ललित पंडित ने बालू से जुड़ी यादें शेयर करते हुए बताया, 'एसपी जी बहुत मंजे हुए सिंगर थे। उनका रिकॉर्ड तो अविश्वसनीय है। बड़े ही गुणी इंसान थे। ‘सागर’ में किशोर कुमार के साथ कोई उनकी मस्ती के साथ मैच कर सकता था तो वो एकमात्र बालू सुब्रमण्यम ही थे। ‘यूं ही गाते रहो’ गाने में ऋषि कपूर और कमल हासन थे। उसमें किशोर कुमार को बालू जी ने जोरदार टक्कर दी थी। बालू की याददाश्त और ग्रास्पिंग पावर अपने समकालीनों से मीलों आगे थी। कोई भी गाना वो दो बार सुनकर ही याद कर लेते थे और पूरा गा देते थे।'
ललित के मुताबिक, 'वो एक्सप्रेशन में गाने लिखा भी करते थे। हमारे यानी जतिन-ललित के करियर में बालू जी के सिवाय किसी और गायक के साथ एक चीज नहीं हुई। वो है एक ही दिन में किसी फिल्म के पूरे गाने रिकॉर्ड होना। फिल्म थी ‘वादे-इरादे’। उसमें पांच गाने थे और उन्होंने रिक्वेस्ट की थी कि वो मद्रास से सुबह की फ्लाइट से आकर रात वाली से वापसी कर लेंगे। हमें हैरानी हुई कि एक दिन में पांच गाने कैसे रिकॉर्ड होंगे। तो उस पर उन्होंने कहा कि अगर काम संतोषप्रद नहीं हुआ तो वे वापसी की फ्लाइट कैंसिल कर लेंगे।'
संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित के ललित पंडित।
आगे उन्होंने बताया, 'यकीन मानिए, उन्होंने उस पूरे दिन बिना कुछ खाए पूरा गाना रिकॉर्ड किया और फिर गए। जैसे लता दीदी सुर की पक्की हैं, ठीक वही हाल बालू जी का था। हम खुद अमूमन सिंगर्स से काफी रियाज के बाद गवाते हैं। तभी हमारे साथ काम कर चुके नौ गायकों को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके हैं। मगर बालू जी के साथ ऐसा नहीं करना पड़ा। वो इतने माहिर जो थे। एयरपोर्ट से स्टूडियो सेंटर आने जाने में ढाई घंटे लगते थे। वो वक्त जोड़ने के बाद भी बालू जी ने एक दिन में पूरी फिल्म के गाने रिकॉर्ड कर दिए थे।'
'उनके सुर कभी ऊपर नीचे नहीं लगते थे। सुर पक्के थे तभी वो गायकी के दौरान एक्सप्रेशन ले आया करते थे कि इस अंतरे या मुखड़े पर जरा रोमांस ले आइये। वो बाकयदा पेपर पर लिखे हुए गानों पर मार्क कर देते थे। फिर गाते थे। जरूरत पड़े तो कॉमेडी कर लें। लता जी की तरह उनकी इंटोनेशन बिल्कुल परफेक्ट थी। लता जी जिस तरह परफेक्ट नोट लगाती हैं, जो कि बिल्कुल निखर कर आता है, ठीक वही हालत एसपी बालू जी की थी।'
'यह जरूर था कि उनके उच्चारण को संभालना पड़ता था, क्योंकि साउथ इंडियन एक्सेंट आता ही था। हजारों में उन्होंने साउथ में गाने गाए हैं तो वह लहजा निश्चित तौर पर रह ही जाता है। असर आना लाजिमी था।'
राम-लक्ष्मण: 'मैंने प्यार किया' के वक्त पूरी टीम नई थी, इसलिए सलमान पर एसपी बालू जी की आवाज ट्राई की
संगीतकार राम-लक्ष्मण ने बालू को याद करते हुए कहा, ‘मैंने प्यार किया’ के दौरान सलमान, भाग्यश्री, सूरज बड़जात्या जी और मैं खुद सब नए थे। नई टीम थी। लिहाजा गीत-संगीत में भी हम नयापन चाह रहे थे। गायकी में जरूर लता जी की अनुभवी आवाज थी।'
'उस वक्त तक रफी साहब का देहांत हो चुका था, किशोर दा भी नहीं थे और मुझे बालू जी के सिवाय तत्कालीन सिंगर्स में से कोई पसंद नहीं थे। वो इसलिए क्योंकि उसके थोड़े दिन पहले ही ‘एक दूजे के लिए’ में बालू जी की आवाज पसंद आई थी। वो भी रोमांटिक फिल्म थी। बालू जी से जो गाने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी ने गवाए थे, वे हिट थे। तभी अपने कंपोजिशन के लिए बालू जी को बुलाया। हम ऐसी आवाज चाहते थे, जो दीदी के सामने टिक सके।'
'लता जी को कोई आपत्ति नहीं थी। वो इसलिए क्योंकि बालू जी साउथ में पॉपुलर तो थे ही हिंदी में भी वो कमल हासन आदि की आवाज थे ही। बालू जी की हिंदी में साउथ इंडिया का लहजा आता तो था। पर रिकॉर्डिंग के दौरान रियाज कर वो दूर हो जाया करता था। हमने जब-जब उनके और सलमान के साथ मिलकर गाना किया, हमारे हीरो तो बालू जी ही हुआ करते थे।'
संगीतकार जोड़ी राम-लक्ष्मण के लक्ष्मण यानी विजय पाटिल।
'पांच-छह महीने पहले बात हुई थी उनसे। उन्होंने मेरी सेहत का हाल पूछा था। मेरे गानों का हीरो मैंने खो दिया। हमने 25 फिल्में साथ में कीं। मेरी फिल्मों के गानों में सलमान के लिए सदा उनकी ही आवाज रही। ‘हम साथ-साथ हैं’ से जरूर हमारा साथ छूटा। वो इसलिए क्योंकि वो सोलो हीरो फिल्म नहीं थी। तीन हीरो थे। फिल्म का जॉनर अलग था। वहां फिर हमने हरिहरन आदि को अपनाया। उसके बाद ‘हंड्रेड डेज’ में जैकी श्रॉफ पर भी उनकी आवाज फिट बैठती थी। तो सलमान के साथ कोई ऐसी मनमुटाव वाली बात नहीं थी।'
‘बॉम्बे फिल्म लेबोरेट्री’ में वो जब भी मद्रास से आते थे तो उनकी आवाज से ही पूरे माहौल में ताजगी घुल जाती थी। ‘एक दूजे के लिए’ के टाइम पर भी एसपी बालू जी पॉपुलर हुए थे, मगर एक बार फिर ‘मैंने प्यार किया’ से वो छा गए।
बप्पी लहरी: बालासुब्रमण्यम को एक बार गाना बता दो तो सीख लेते थे
बप्पी लहरी ने शेयर करते हुए बताया, 'एसपी बालासुब्रमण्यम के साथ मैंने हिंदी, तमिल और तेलुगू में बहुत काम किया। एक पिक्चर थी- 'इंसाफ की आवाज' इसमें गाना था- इरादा करो तो पूरा करो...। इसे उन्होंने लता मंगेशकर के साथ गाया था। इसके बाद फिल्म- 'फर्स्ट लव लेटर' में उन्होंने लता मंगेशकर के साथ दीवानी-दीवानी... दीवाना तेरा हो गया... गाया। इस तरह हमने साथ में बहुत काम किया। वे दुनिया के लीजेंड में से एक थे। एक बार गाना बता दो तो सीख जाते थे, उन्हें दोबारा बताना नहीं पड़ता था। ऐसे गुणी सिंगर कम ही होते हैं। हम लोगों के लिए बहुत बड़ा लॉस हो गया। बालासुब्रमण्यम साहब हंसमुख स्वभाव और बहुत अच्छे नेचर के थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।'
बप्पी लहरी
राजेश्वरी लक्ष्मीकांत: डैडी उन्हें गाने के लिए बुलाते रहते थे
'बालू अंकल के साथ मैंने ये राजू ये डैडी... (फिल्म- एक ही भूल) में गाया। उन्होंने बहुत सपोर्ट किया। मेरे डैडी लक्ष्मीकांत ने बालू अंकल से कहा कि कुछ अपने मन से गाइए और राजेश्वरी को भी वैसे ही गवाइए। उन्होंने मुझे इतने सरल तरीके से समझाया कि मैं सहज ही समझ गई। उन्होंने इतनी सरलता से पूरा गाना गाया कि ऑन द स्पॉट उन्हें फॉलो कर सकी। खैर, जब वे चेन्नई से मुंबई रिकॉर्डिंग के लिए आते थे, तब डैडी घर पर उन्हें डिनर के लिए जरूर बुलाते थे।'
'जब कभी डैडी भी चेन्नई जाते थे तो उनके घर जाते थे। डैडी कहते थे कि मैं रिकॉर्डिंग स्टूडियो में उन्हें सिर्फ 15 मिनट पहले बुलाता हूं। इससे पहले उन्हें आने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वे 15 मिनट में ही गाना पिक कर लेते थे। इतनी जल्दी गाने को पकड़ लेते थे कि तारीफ में कहते थे कि आप अपने घर का पता दो, इस पर वह मुस्कुरा देते थे। मुझे ही नहीं, मेरी मम्मी का भी फेवरेट जो गाना है, वो है- 'हम-तुम दोनों जब मिल जायेंगे एक नया इतिहास बनाएंगे...'
'मुझे लगता है कि 'एक दूजे के लिए' का यह गाना उनका पहला हिंदी गाना था। उसके बाद एक ही भूल, रास्ते प्यार के, जरा सी जिंदगी, अग्निपथ आदि फिल्मों में गाने के लिए बुलाते रहते थे। उनका जब से एसोसिएशन हुआ तब से उनसे गाने लेते ही रहते थे। पता नहीं पिताजी को क्या सूझा कि एक ही भूल फिल्म में पहली बार गाने वाली थी, तब डैडी ने बालू अंकल को ही बुलाया। और किसी से भी गवा सकते थे। खैर, बालू अंकल जाना इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वेरी सैड न्यूज। उन्हें मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि।'