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टिकेन्द्र और संदीप नोएडा स्थित टेक कंपनी सैमसंग में काम करते थे। वहीं, प्रतीक एक्सिकॉम में काम करते थे। प्रतीक और टिकेन्द्र रूममेट थे। एक दिन तीनों दिल्ली से बाहर घूमने निकले थे, तभी बीच रास्ते में फ्यूल खत्म हो गया। टिकेन्द्र बताते हैं कि हमें रास्ते में करीब 10 किमी तक के आसपास एक भी फ्यूल स्टेशन नहीं मिला। उस वक्त हमें यह अहसास हुआ कि काश! ऐसा मोबाइल ऐप होता, जहां हम एक ऑर्डर पर कभी भी, कहीं भी फ्यूल मंगवा सकते।

इसके बाद टिकेन्द्र ने अपने कलीग संदीप और रूममेट प्रतीक से इस आइडिया पर बातचीत की। वे तुरंत इस मिशन से जुड़ गए। यहीं से शुरू हुआ स्टार्टअप कंपनी पेपफ्यूल डॉट काॅम का सफर। इन दिनों होम डिलीवरी का कारोबार तेजी से अपने रफ्तार पकड़ रहा है। यही वजह है कि इस साल फाइनेंशियल ईयर (वित्त वर्ष 2020-21) में इनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ के आसपास पहुंच गया।

दिल्ली-एनसीआर के लोगों से लिया फीडबैक

टिकेन्द्र बताते हैं कि हमने इस पर रिसर्च की। दिल्ली-एनसीआर के करीब 100 से ज्यादा लोगों के घर जाकर और ऑनलाइन फीडबैक लिया। तब हमने पाया कि ज्यादातर लोगों को इस तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ा है। हर दूसरे आदमी ने यही कहा कि पेट्रोल-डीजल के लिए ऑनलाइन ऐप होना चाहिए। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की ऑनलाइन डिलीवरी का कारोबार शुरू करना काफी रिस्की है। टिकेन्द्र बताते हैं कि 2016 तक देश में पेट्रोल डिलीवरी की परमिशन नहीं थी। हाल ही में सरकार ने इसकी इजाजत दी है। उस वक्त हमारे सामने सिर्फ डीजल डिलीवरी ही एकमात्र विकल्प था। हमने डीजल की डिलीवरी पर ही काम शुरू कर दिया।

तीन दोस्तों ने स्टार्टअप कंपनी पेपफ्यूल डॉट काॅम नाम से शुरू किया है। ऐप के माध्यम से बुकिंग के बाद ग्राहकों के घर डीजल की डिलिवरी करते हैं।

PMO से मिला था आइडिया पर अप्रूवल

संदीप बताते हैं, 'लोगों से फीडबैक लेने के बाद हमने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि. (BPCL), पेट्रोलियम प्रोसेस इंजीनियरिंग सर्विस को. (PESCO) जैसी तेल कंपनियों को अपना-अपना सुझाव भेजा। साथ ही हमने अपने-अपने स्टार्टअप का आइडिया PMO को भी भेजा था। कुछ दिनों बाद ही हमें PMO से जवाब आ गया था। दूसरी, तरफ फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल की तरफ से भी हमें हमारे कारोबार का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR सौंपने को कहा गया।'

उन्होंने कहा कि हमने अपने प्रोजेक्ट की DPR इंडियन ऑयल को भेजी। अप्रूवल मिलने के बाद हमने अपना कारोबार शुरू कर दिया। संदीप, टिकेन्द्र और प्रतीक बताते हैं कि स्टार्टअप को शुरू करने में हमने करीबन 12 लाख रुपए खर्च किया। इनमें ऐप डेवेलप, ब्राउजर डेवेलप, डिस्पेंसिंग मशीन, जेरी कैन समेत अन्य कार्यों पर किया गया खर्च शामिल है।

पेपफ्यूल्स सरकार से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप

संदीप बताते हैं कि पेपफ्यूल्स सरकार से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप है, जिसे ऑयल मार्केटिंग कंपनी या PESO का अप्रूवल मिला है। पेपफ्यूल्स का इंडियन ऑयल के साथ थर्ड पार्टी एग्रीमेंट है। यह डोर-टू-डोर डिलीवरी के लिए है। इस ऐप पर ग्राहक ऑनलाइन या मैसेज के जरिए ऑर्डर कर सकते हैं।

साथ ही, ऑनलाइन ट्रैकिंग, बिलिंग या डैशबोर्ड के अन्य फीचर्स का लाभ ले सकते हैं। पेपफ्यूल्स एक आईओटी-आरएफआईडी डिवाइस से फ्यूल डिलीवरी का काम करता है, जिससे फ्यूल की चोरी नहीं होती है। यह पेपफ्यूल्स का एक पेटेंट डिवाइस है, जो कंपनी ने खुद बनाया है।

टिकेन्द्र नोएडा स्थित टेक कंपनी सैमसंग में काम करते थे।

जानिए यह ऐप कैसे काम करता है ?

संदीप और प्रतीक बताते हैं कि हम अपने ऐप पर ग्राहकों के ऑर्डर रियल टाइम में लेते हैं और ये डिलीवरी के लिए सीधे संबंधित MDU को भेज दिए जाते हैं। हम 2-3 घंटों में यह काम कर देते हैं। ग्राहक डिलीवरी के दौरान रियल टाइम नजर रख सकते हैं और डिलीवरी के बाद कन्फर्मेशन दे सकते हैं। एमडीयू आईओटी आधारित आरएफआईडी तकनीक पर काम करते हैं। यह पेपफ्यूल्स की पेटेंट तकनीक है। इसमें चोरी की बिल्कुल गुंजाइश नहीं है और इसने ग्राहकों को विश्वास और सुरक्षा प्रदान की है। इतना ही नहीं, हम ग्राहकों को जागरूक करने के लिए वॉल्यूम और क्वालिटी की वन-साइट जांच की सुविधा भी देते हैं।

डीजल ऑर्डर करने का क्या तरीका है ‌?

संदीप के मुताबिक, ग्राहक को पहले ऐप पर एक रिक्वेस्ट देनी होगी। इसके बाद पेपफ्यूल्स के एग्जीक्यूटिव ग्राहक की साइट पर जाएंगे या ग्राहक के एरिया में डिलीवरी है या नहीं, यह देखेंगे। तब ग्राहक से एग्रीमेंट करेंगे। इसके बाद ग्राहक को एक आईडी या पासवर्ड दिया जाता है, जिससे वो अपनी अप्रूव्ड लोकेशन पर फ्यूल ऑर्डर कर सकते हैं। ग्राहक पेपफ्यूल्स के रजिस्टर्ड नंबर पर मैसेज कर के ऑर्डर कर सकते हैं। ये फीचर सिर्फ पेपफ्यूल्स के ऐप पर उपलब्ध है। ग्राहक को उनके ऑर्डर की कन्फर्मेशन, ट्रैकिंग और बिलिंग की ऑनलाइन सुविधा मिल जाती है। वे अपने ऑर्डर की हिस्ट्री देख सकते हैं।

50 से ज्यादा शहरों में शुरू होगी यह सेवा

कंपनी के तीनों संस्थापक टिकेन्द्र, संदीप और प्रतीक बताते हैं कि अब तक पेफ्यूल्स ने 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है, जो पूरे एनसीआर में काम करते हैं। पेपफ्यूल्स के ऐप से पूरे भारत में कहीं से भी ऑर्डर कर सकेंगे।

वे कहते हैं, 'अभी हमारी ऐप दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, हरियाणा, मुरादाबाद में एक्टिव है। साथ ही उड़ीसा और हैदराबाद में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है अगले 15 दिनों में वहां भी ऐप काम करना शुरू कर देगा। इसके अलावा हम 50 से ज्यादा शहरों में यह सेवा शुरू करने वाले हैं।'



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Diesel delivery work started with friends leaving private job, annual turnover Rs 100 crore


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सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उस पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट का सही तरह से पालन नहीं करने के कारण लगाया गया है। PNB के शेयर BSE पर 1.37 फीसदी मजबूत होकर 29.50 रुपए पर बंद हुए।

PNB ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा कि RBI ने देखा कि बैंक अप्रैल 2010 से ड्रक PNB बैंक लिमिटेड, भूटान (बैंक की अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनी) के साथ बाइलेटरल ATM शेयरिंग अरेंजमेंट को ऑपरेट कर रहा था। इसके लिए उसने RBI से पूर्व मंजूरी नहीं ली थी। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 (PSS एक्ट) के सेक्शन 26 (6) में उल्लिखित नेचर का सही तरह से पालन नहीं किए जाने के कारण RBI ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया।

जिन PSO के सर्टिफिकेट कैंसल हुए वे PPI को ऑपरेट करते थे

इस बीच एक बयान में RBI ने कहा कि उसने 5 पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स (PSOs) के सर्टिफिकेट ऑफ अथॉरिटाइजेशन (CoA) को कैंसल कर दिया है। ये ऑपरेटर्स प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) को जारी करने और उसे ऑपरेट करने का काम करते थे।

अलग-अलग कारणों से सर्टिफिकेट कैंसल हुए

कार्ड प्रो सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और इनकैशमी मोबाइल वॉलेट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के सर्टिफिकेट्स रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स का पालन नहीं किए जाने के कारण कैंसल किए गए। देलही इंटीग्रेटेड मल्टी-मोडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड और पायरो नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने खुद ही अपने सर्टिफिकेट्स सरेंडर कर दिए। एयरसेल स्मार्ट मनी लिमिटेड के CoA इसलिए कैंसल किए गए, क्योंकि उनका रिन्यूअल नहीं कराया गया।

कस्टमर और मर्चेंट 3 साल तक कर सकते हैं क्लेम

RBI ने कहा कि इन पाचों PSO पर जिस भी कस्टमर या मर्चेंट का वैलिड क्लेम है, वे कैंसिलेशन की तिथि से लेकर 3 साल तक सेटलमेंट के लिए इन PSO से संपर्क कर सकते हैं। RBI ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए सर्टिफिकेट्स कैंसल किए हैं।



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PNB अप्रैल 2010 से ड्रक PNB बैंक लिमिटेड, भूटान के साथ बाइलेटरल ATM शेयरिंग अरेंजमेंट को ऑपरेट कर रहा था, इसके लिए उसने RBI से पूर्व मंजूरी नहीं ली थी


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दिल्ली की रहने वाली दीप्ति अवस्थी शर्मा आउटडोर एडवर्टाइजिंग स्टार्टअप गोहोर्डिंग्स डॉट काॅम (Gohoardings.com) की फाउंडर हैं। साथ में एक सफल हाउस वाइफ और एक मां हैं। नोएडा स्थित यह स्टार्टअप देशभर में कहीं भी कभी भी ऑनलाइन होर्डिंग्स के लिए बुकिंग करने में मदद करता है। कंपनी ने हाल ही में आस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया है। इस समय कंपनी का रेवेन्यू 20 करोड़ से ज्यादा है। कंपनी में पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा के इन्वेस्टमेंट की भी बात चल रही है।

24 साल की उम्र में शुरू किया इवेंट का कारोबार

दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद दीप्ति ने सीए की तैयारी शुरू की लेकिन पढ़ाई और जाॅब में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं होने के कारण सीए फाइनल ईयर ड्रॉप कर दिया और इवेंट का कारोबार शुरू किया। तब दीप्ति सिर्फ 24 साल की थीं। वो बताती हैं कि उन्होंने इवेंट का कारोबार पार्टनरशिप में शुरू किया था। कुछ स्पॉन्सरशिप भी मिली थी। वह कहती हैं, 2014 की 31 दिसंबर की रात दिल्ली में सबसे बड़े इवेंट का जिम्मा उनकी कंपनी को मिला था।

2016 में दीप्ति ने 50 हजार से डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार शुरू किया। अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने महज दो साल में ही 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर कर लिया।

उसमें कई सेलिब्रिटीज शिरकत करने वाले थे, लेकिन इवेंट से ठीक कुछ समय पहले स्पांसर्स ने हाथ खड़े कर दिए। स्पांसर्स के हटते ही इवेंट पार्टनर भी साथ छोड़कर चला गया। हालात यह हो गई कि उस इवेंट के टिकट ज्यादा नहीं बिके और मुझे करीब 40 लाख रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। वह कहती हैं, उस समय मेरे पास करो या मरो जैसे हालात हो गए थे। हालांकि, मैंने भागने की बजाय खुद का पैसा लगाकर कार्यक्रम का आयोजन किसी तरह संपन्न किया।

नुकसान की भरपाई घर बेच कर की

30 साल की दीप्ति बताती हैं, इवेंट के कारोबार में नुकसान की भरपाई के लिए हमें अपना घर बेचना पड़ा। हम कई सालों तक किराए के घर में रहे। पड़ोसी और संबंधियों ने ताने मारने शुरू कर दिए थे। लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि बेटी को सिर पर चढ़ाने का यह नतीजा है और बनाओ आत्मनिर्भर।

कारोबार में नुकसान, घर बेचने का दर्द और सगे संबंधियों के तानों ने मुझे इतना परेशान कर दिया कि मैं डिप्रेशन में चली गई थी। मैंने कई दिनों तक खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। हालांकि, मेरी मां और पिता ने कभी साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने पूरा सपोर्ट किया।

आज दीप्ति की कंपनी का टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस समय उनकी कंपनी में करीब 30-40 लोगों की एक टीम काम कर रही है।

दीप्ति कहती हैं, इस हादसे के करीब तीन माह बाद ही मैंने घर वालों के कहने पर शादी कर ली। एक तरह से अपने करियर और सपनों से समझौता कर लिया। हालांकि, इसे मेरी किस्मत कह सकते हैं कि मुझे सपोर्टिव पति के रूप में विकास शर्मा मिले। जब विकास को मेरे सपनों के बारे में पता चला, तब उन्होंने मुझे दोबारा बिजनेस के लिए प्रोत्साहित किया और फिर वहीं से जिंदगी में एक यूटर्न आया और शुरू हुआ डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार।

50 हजार लगाकर शुरू किया कारोबार

दीप्ति बताती हैं, मैंने 2016 में बहुत ही छोटी रकम 50 हजार से डिजिटल होर्डिंग्स का कारोबार शुरू किया। इसमें विकास का आइडिएशन से लेकर फाइनेंशियल तक काफी सपोर्ट मिला। डिजिटल होर्डिंग्स कारोबार को शुरू करने के पीछे वजह बताते हुए दीप्ति कहती हैं, हमने जब इस पर रिसर्च किया तो पाया कि यह फील्ड काफी अनऑर्गनाइज्ड तरीके से काम कर रहा है।

जहां कुछ भी क्लियर नहीं है। एक होर्डिंग लगवाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। तभी सोचा कि क्यों न खुद की कंपनी स्थापित की जाए जहां सिर्फ एक क्लिक में होर्डिंग्स लगवाने का काम हो जाए। दीप्ति कहती हैं, विकास दिल्ली के ही एक टेक कंपनी में काम करते हैं। कारोबार को शुरू करने में उनसे मुझे तकनीकी तौर पर काफी हेल्प मिली।

वहीं, मार्केटिंग और अकाउंट में मेरी नॉलेज अच्छी है। इसका मुझे यहां फायदा मिला। इस तरह हमने अपने दम पर कारोबार शुरू कर दिया। दीप्ति का यह आइडिया इतना सही था कि अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने महज दो साल में ही 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर कर लिया और यह साल दर साल बढ़ता ही चला गया।

दीप्ति की कंपनी ने हाल ही में आस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया है, उन्हें कई अवार्ड्स भी मिल चुके हैं।

आज दीप्ति की कंपनी का टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस समय उनकी कंपनी में करीब 30-40 लोगों की एक टीम काम कर रही है। वह खुद भी सुबह 9 से रात के 11 बजे तक लगातार काम करती हैं। इसमें उसके पति भी पूरा सहयोग देते हैं।

जानिए, यह स्टार्टअप कैसे काम करता है ?

दीप्ति के मुताबिक, सबसे पहले हमारे वेबसाइट पर कस्टमर को लॉगइन करना होता है। इसके बाद वेबसाइट पर जाकर अपने लोकेशन (जहां उसे होर्डिंग लगवानी है) सर्च करके सिलेक्ट करना होता है। लोकेशन सिलेक्ट होने के बाद हमारे पास एक मेल आता है। उसके बाद कंपनी की तरफ से साइट और लोकेशन की उपलब्धता की कन्फर्मेशन भेजी जाती है। फिर कस्टमर की तरफ से आर्टवर्क और ऑर्डर आते हैं।

इसके बाद हम उन्हें लोकेशन साइट पर लाइव होने के लिए एक आईडी एंड पासवर्ड उपलब्ध कराते हैं, ताकि कस्टमर अपने काम का करंट स्टेटस लाइव ट्रैक कर सके। बता दें कि यह कंपनी एक होर्डिंग को एक माह की अवधि तक लगवाने के लिए लगभग 1 लाख रुपए लेती है। हालांकि, दीप्ति कहती हैं कि होर्डिंग की कीमत विभिन्न राज्यों और लोकेशन वाइज निर्भर करता है।

...और अंत में दीप्ति कहती हैं, किसी भी काम को शुरू करने के लिए उसका बैकग्राउंड जानना बहुत जरूरी है। उस पर बहुत ज्यादा रिसर्च करना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।



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How a CA dropout and a software engineer created an online portal for OOH advertising


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पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा भी इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गई है। हालात यह है कि जिन पंडालों पर करोड़ों रुपए खर्च होते थे वह इस साल कम होकर 8 से 10 लाख रुपए पर आ गए है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बिजनेस घरानों से मिलने वाले चंदे में भारी कमी आई है। इससे पंडालों ने सीमित खर्च किया है। बंगाल के दुर्गा पूजा के इतिहास में यह पहली बार यह नजारा देखने को मिला जब पूजा पंडाल में किसी प्रकार का कोई खास तामझाम नहीं किया गया है और ना श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हैं। दुर्गा पूजा पर कोरोना महामारी का साफ असर दिख रहा है।

फोरम फॉर दुर्गोत्सव के मुताबिक, पांच दिनों तक चलने वाली कोलकाता की 100 बड़ी पूजा फेस्टिवल में करीब 4500 करोड़ रुपए का लेनदेन होता है। जबकि पूरे पं. बंगाल में करीबन 15,000 करोड़ रुपए का लेनदेन होता है। वहीं, लाखों की संख्या में रोजगार देने वाली इस पूजा ने इस साल कई लोगों को बेरोजगार कर दिया है। टूर एंड ट्रैवल, फूड और गारमेंट्स इंडस्ट्री ठप होने के चलते इस साल केवल 30-40% को ही काम मिल पाया है।

कोलकाता में हर साल कुल 4500 कम्युनिटी पूजा का आयोजन होता है। इनमें 200 पूजा ऐसी हैं जिसमें हर पूजा में 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। 4300 ऐसे पूजा पंडाल हैं, जिसमें 20 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। कुल मिलाकर एक लाख के करीब रोजगार पैदा होते हैं और 10 हजार अस्थाई रोजगार पैदा होते हैं जिसमें टैक्सी ड्राइवर, टूर गाइड्स आदि होते हैं।

कॉरपोरेट जगत से नहीं मिला अधिक सहयोग

बंगाल का दुर्गापूजा करीब 80% स्पॉन्सरशिप पर निर्भर रहता है। बाकी रकम इलाके से चंदा इक्कठा करके और प्राइज मनी से जुटाई जाती है। इस साल कॉरपोरेट जगत से कुछ खास मदद नहीं मिल पाई है। कोरोना और लॉकडाउन के चलते लगभग सभी सेक्टर्स प्रभावित होने के कारण कॉरपोरेट जगत से केवल 25% ही फंड मिले हैं। कंपनियों का मानना है कि कोरोना के चलते पहले ही वे नुकसान में हैं, ऊपर से महामारी में ज्यादातर लोग घूमने फिरने से बच रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को ब्रांडिंग से कुछ खास फायदा नजर नहीं आ रहा है।
ब्रांड के जानकारों के मुताबिक, कोलकाता पूजा के दौरान कॉर्पोरेट 800 से लेकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा तक खर्च करते हैं। इसमें से बैनर्स के एडवरटाईज और गेट पर 1500-200 करोड़ रुपए का खर्च होता है।

एमडीअली पार्क पूजा पंडाल में मां दुर्गा कोरोनावायरस महामारी रूपी राक्षस का संहार करती नजर आईं हैं। वहीं इस संकट में डॉक्टर, पुलिस और सफाई कर्मियों के योगदान को सराहा गया है। यहां पुलिस लोगों को मास्क पहनने को लेकर सचेत कर रहे हैं।

इस साल आयोजकों के सामने पूजा का खर्च निकालना काफी चुनौतीपूर्ण है। ऊपर से कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश कि पंडाल में सीमित विजिटर्स की ही एंट्री होगी। इस फैसले ने आयोजकों के सामने और मुसीबत खड़ी कर दी है। आदेश के बाद कई स्पॉन्सर्स पूजा पंडाल को स्पॉन्सर करने से मना कर दिया।

नार्थ कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क, साउथ कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली और चेतला अग्रणी जैसे बड़े पूजा पंडाल के आयोजकों का कहना है कि तृतीया के दिन जब सब कुछ तैयार हो गया तब कलकत्ता हाईकोर्ट ने पंडाल वाले एरिया को कंटेनमेंट जोन में डाल दिया। पंडाल में विजिटर्स की संख्या को सीमित कर दिया। अगर यही फैसला पहले आ गया होता तो हम अपने बजट को और कम कर देते।

उनका मानना है कि कोर्ट फैसले के बाद कई ब्रान्ड कंपनियों ने पंडाल में पैसे लगाने से मना कर दिया। 75 पल्ली पूजा पंडाल के आयोजक व सचिव सबीर दास बताते हैं कि कोर्ट के फैसले के बाद करीब चार ऐसी ब्रान्ड कंपनियां हैं, जिन्होंने पंडाल को स्पॉन्सर करने से मना कर दिया। इन कंपनियों का मानना है जब विजिटर्स आएंगे ही नहीं तो प्रमोशन किसके लिए करें। सबीर दास कहते हैं, पूजा पंडाल में 22 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक के लिए स्पॉन्सर्स के साथ हुई डील हाथ से निकल गई। इस डील से करीब 5 लाख रुपए आने वाले थे।

ऐसी कहानी केवल सबीर दास के साथ नहीं है। हर आयोजकों की कहानी इसी तरह की है। 40-50 लाख में होने वाली पूजा का बजट 8 से 10 लाख पर आ गया। नार्थ कोलकाता में सबसे मशहूर पूजा पंडाल मोहम्मद अली पार्क (एमडी अली पार्क) में होता है। यहां सबसे बड़ा मेला लगता है। हर साल इस पंडाल का बजट 40 से 60 लाख तक हुआ करता था। लेकिन इस साल इसका बजट केवल 12 लाख रह गया है।

चेतला अग्रणी पूजा पंडाल को इस साल बेहद सिंपल तरीके से तैयार किया गया है। इसे बांस की लकड़ी से तैयार किया गया है।

28 साल की परंपरा को बरकरार रखना मजबूरी

साउथ कोलकाता का चेतला अग्रणी नाम से मशहूर पूजा पंडाल इस साल बेहद सिंपल थीम पर तैयार की गई है। हर साल यहां पूजा पंडाल में एंट्री के लिए करीब 20 गेट बनाए जाते थे और उन सभी गेट्स पर ब्रान्ड कंपनियों का भारी तामझाम रहता था लेकिन अबकी बार केवल 7 गेट ही बने हैं। ब्रांड कंपनियों से करीब 20 से 25 फीसदी ही फंडिंग हुई है। ऐसे में जहां हर साल 30 से 40 लाख तक के बजट में पंडाल तैयार किया जाता था वो इस साल मात्र 8 लाख के आसपास में सिमट कर रह गई है।

यहां पिछले 28 साल से यहां पूजा का आयोजन किया जा रहा है। यही वजह है कि इस साल पूजा का आयोजन किया गया है। ताकि यह परंपरा किसी तरह बची रहें। चेतला अग्रणी पूजा पंडाल को इस साल केवल 15-20 स्पाॅन्सर्स ही मिलें हैं। आयोजकों को अपने जेब से पैसे लगाने पड़े हैं। ऊपर से मास्क, ग्लव्स और पीपीटी किट के चलते खर्च अतिरिक्त बढ गया है। हालांकि, इस साल ममता बनर्जी की सरकार ने सभी रजिस्टर्ड पूजा पंडाल को सफाई और हाइजीन को ध्यान रखने के लिए अतिरिक्त खर्च को देखते हुए 50-50 हजार रुपए दिए हैं।

25 किलो सोने से तैयार हुई श्रीभूमी की मां दुर्गा

इस साल कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब ने केदारनाथ की थीम पर तैयार पंडाल में मां दुर्गा की मूर्ति को 25 किलो सोने के गहनों से सजाया है। इस पूजा के मुख्य सदस्य राज्य के मंत्री सुजीत बोस हैं। वे कहते हैं कि इस साल पूजा की रौनक फीकी जरूर है, मगर हमने मूर्ति के आकार और उसकी भव्यता से कोई समझौता नहीं किया गया है। हर साल की तरह इस साल भी हमने मां दुर्गा को सोने के गहनों से सजाया है। श्रीभूमी स्पोर्टिंग क्लब हमेशा से भव्यता के लिए मशहूर रही है। हालांकि, बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर सुजीत बोस ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने यह माना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल पूजा पंडाल के बजट में 20 फीसदी तक की कटौती हुई है।

यह श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब का दुर्गा पूजा है। यह पंडाल केदारनाथ थीम पर तैयार किया गया है।

बता दें कि यह वही पूजा पंडाल है जिसे 2018 में दुनिया का सबसे महंगा पंडाल होने का सर्टिफिकेट दिया गया था। बाहुबली की थीम पर तैयार पूजा पंडाल का बजट करीब 10 करोड़ रुपए था। पंडाल की ऊंचाई 110 फीट रखी गई थी। इतना ही नहीं पिछले साल 2019 में नार्थ कोलकाता के संतोष मित्रा स्क्वेयर में मां दुर्गा को 50 किलो सोने से तैयार किया गया था। बजट 20-25 करोड़ रुपए बताई गई थी। साउथ कोलकाता का मशहूर पूजा पंडाल भवानीपुर 75 पल्ली में इस साल कपडे, धागे और मछली पकड़ने वाली जाल से पंडाल को तैयार किया गया है। इस साल इस पूजा का बजट 10 लाख रुपए के आसपास है। वहीं, पिछले साल करीबन 50 लाख के आसपास के बजट में पूजा का आयोजन किया गया था। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स पहले ही अनुमान जता चुका है कि 2030 तक दुर्गा पूजा का टर्नओवर मेगा कुंभ मेला के बराबर हो जाएगा जो कि करीबन 1 लाख करोड़ रुपए है।

केदारनाथ थीम पर तैयार श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को 25 किलो सोने के गहनों से सजाया गया है।

दुर्गापूजा से हो जाती थी सालभर की कमाई

हजारों की संख्या में ऐसे लेबर से लेकर मूर्तिकार और पूजा के दौरान छोटे छोटे फूड का स्टाॅल लगाने वालों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है। इनकी कमाई का जरिया ही दुर्गा पूजा है। इस समय इनकी कमाई इतनी हो जाती है कि ये सालभर छोटे मोटे अन्य काम करके भी घर-परिवार मैनेज कर लेते थे। पिछले दस सालों से पंडाल के पास फूड ट्रक का कारोबार कर रहें आमिर अली इस साल दिन तीनों में महज 15-20 हजार रुपए की कमाई कर पाए हैं। हर साल पूजा में वे इस पांच से छह दिनों में दो लाख से ज्यादा कमा लेते थे।

पहली बार सिंदूर खेला रस्म के बगैर ही होगी मां की विदाई

बंगाल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जहां दुर्गापूजा की परम्परा को ही बदलना पड़ा। दुर्गापूजा की शुरुआत मां की प्रतिमा में चक्षु दान के साथ किया जाता है और पूजा सम्पन्न होती है सिंदूर खेला के साथ। ऐसी मान्यता है कि 9 दिन मायके में रहने के बाद मां अपनी ससुराल जाती हैं, इसके पूर्व महिलाएं पान के पत्ते में सिंदूर डालकर मां की मांग भरती है। उसके बाद वही सिंदूर वे एक-दूसरे को लगाती है। बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण कोर्ट ने सिंदूर खेला पर रोक लगा दी है।

यह कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली का दुर्गोत्सव है। यहां पंडाल को कपडे, धागे और मछली पकड़ने वाली जाल से तैयार किया गया है।


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Durga Puja 2020; Pooja organizers reduced budget four times this year: puja organizer


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पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा भी इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गई है। हालात यह है कि जिन पंडालों पर करोड़ों रुपए खर्च होते थे वह इस साल कम होकर 8 से 10 लाख रुपए पर आ गए है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बिजनेस घरानों से मिलनेवाले चंदों में भारी कमी आई है। इससे पंडालों ने सीमित खर्च किया है।

महाषष्ठी के साथ पांच दिनों का यह दुर्गा पूजा उत्सव बंगाल की संस्कृति में शामिल है। देश-दुनिया से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस साल का नजारा बिल्कुल अलग है। बंगाल के दुर्गा पूजा के इतिहास में यह पहली बार होगा जब पूजा पंडाल में किसी प्रकार की कोई खास तामझाम नहीं किया गया है और ना श्रद्धालु की लंबी कतारें हैं। दुर्गा पूजा पर कोरोना महामारी का साफ असर दिख रहा है।

कोलकाता में बड़े पूजा आयोजकों को कोरोना संकट के चलते ना सर्फ पूजा पंडाल का कद छोटा करना पड़ा बल्कि बजट में भारी कटौती करनी पड़ी। अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह आदेश दे दिया है कि पंडाल में सीमित विजिटर्स की ही एंट्री होगी। इस फैसले ने आयोजकों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। अब कई स्पॉन्सर्स पूजा पंडाल को स्पॉन्सर करने से कतरा रहे हैं।

नार्थ कोलकाता का मोहम्मद अली पार्क पूजा पंडाल। इस पूजा पंडाल की थीम सचेतना है। यह कोरोना से सचेत रहने के लिए अन्य सेफ्टी के साथ मास्क पहनने पर जोर दिया गया है।

नार्थ कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क, साउथ कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली और चेतला अग्रणी जैसे बड़े पूजा पंडाल के आयोजकों का कहना है कि तृतीया के दिन जब सब कुछ तैयार हो गया तब कलकत्ता हाई कोर्ट ने पंडाल वाले एरिया को कंटेंटमेंट जोन में डाल दिया। पंडाल में विजिटर्स की संख्या को सीमित कर दिया। अगर यही फैसला पहले आ गया होता तो हम अपने बजट को और कम कर देते।

उनका मानना है कि कोर्ट फैसले के बाद कई ब्रान्ड कंपनियों ने पंडाल में पैसे लगाने से मना कर दिया। 75 पल्ली पूजा पंडाल के आयोजक व सचिव सबीर दास बताते हैं कि कोर्ट के फैसले के बाद करीब चार ऐसी ब्रान्ड कंपनियां हैं, जिन्होंने पंडाल को स्पॉन्सर करने से मना कर दिया। इन कंपनियों का मानना है जब विजिटर्स आएंगे ही नहीं तो प्रमोशन किसके लिए करें। सबीर दास कहते हैं, पूजा पंडाल में 22 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक के लिए स्पॉन्सर्स के साथ हुई डील हाथ से निकल गई। इस डील से करीब 5 लाख रुपए आने वाले थे।

ऐसी कहानी केवल सबीर दास के साथ नहीं है। हर आयोजकों की कहानी इसी तरह की है। 40-50 लाख में होने वाली पूजा का बजट 8 से 10 लाख पर आ गया। नार्थ कोलकाता में सबसे मशहूर पूजा पंडाल मोहम्मद अली पार्क (एमडी अली पार्क) में होता है। यहां सबसे बड़ा मेला लगता है। हर साल इस पंडाल का बजट 40 से 60 लाख तक हुआ करता था। लेकिन इस साल इसका बजट केवल 12 लाख रह गया है।

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एमडीअली पार्क पूजा पंडाल में मां दुर्गा कोरोनावायरस महामारी रूपी राक्षस का संहार करती नजर आईं हैं। वहीं इस संकट में डॉक्टर, पुलिस और सफाई कर्मियों के योगदान को सराहा गया है। यहां पुलिस लोगों को मास्क पहनने को लेकर सचेत कर रहे हैं।

1969 से लगातार आयोजन कर रही एमडीअली पार्क पूजा समिति के सचिव अशोक ओझा कहते हैं, पहली बार ऐसा हुआ है जब हम फंड की कमी के चलते बजट में कटौती कर दिए हैं। ऊपर से मास्क, ग्लव्स और पीपीटी किट के चलते खर्च अतिरिक्त बढ गया है। हालांकि, इस साल ममता बनर्जी की सरकार ने सभी रजिस्टर्ड पूजा पंडाल को सफाई और हाइजीन को ध्यान रखने के लिए अतिरिक्त खर्च को देखते हुए 50-50 हजार रुपए दिए हैं।

बता दें कि बंगाल सरकार के पास रजिस्टर्ड पूजा पंडालों की संख्या करीब 37,000 है। अशोक बताते हैं कि एक पूजा पंडाल जब लगातार 10 सालों तक पूजा का आयोजन करता है तब उसे सरकार के खाते में वह रजिस्टर्ड किया जाता है। एमडीअली पार्क में इस साल दुर्गा मां की प्रतिमा को बेहद सिंपल रखा गया है, हालांकि थीम काफी दमदार है। यहां मां दुर्गा के रूप में कोरोना वाॅरियर्स को दिखाया है जो कि महामारी रूपी राक्षस का संहार करती हैं।

कॉरपोरेट जगत से नहीं मिला अधिक सहयोग

अशोक बताते हैं कि बंगाल का दुर्गा पूजा करीब 80 फीसदी स्पॉन्सरशिप पर निर्भर रहता है। बाकी रकम इलाके से चंदा इक्कठा करके और प्राइज मनी से जुटाई जाती है। इस साल कॉरपोरेट जगत से कुछ खास मदद नहीं मिल पाई है। पिछले सात माह से कारोबार पूरी तरह ठप होने के चलते स्पॉन्सर्स पैसे लगाने से हिचक रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के चलते पहले ही वे नुकसान में हैं, ऊपर से महामारी में ज्यादातर लोग घूमने फिरने से बच रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को ब्रांडिंग से कुछ खास फायदा नजर नहीं आ रहा है।

साउथ कोलकाता का चेतला अग्रणी नाम से मशहूर पूजा पंडाल में मां दुर्गा की अद्भूत प्रतिमा

28 साल की परंपरा को बरकरार रखना मजबूरी

साउथ कोलकाता का चेतला अग्रणी नाम से मशहूर पूजा पंडाल इस साल बेहद सिंपल थीम पर तैयार की गई है। हर साल यहां पूजा पंडाल में एंट्री के लिए करीब 20 गेट बनाए जाते थे और उन सभी गेटों पर ब्रान्ड कंपनियों का भारी तामझाम रहता था लेकिन अबकी बार केवल 7 गेट ही बने हैं। ब्रांड कंपनियों से करीब 20 से 25 फीसदी ही फंडिंग हुई है। ऐसे में जहां हर साल 30 से 40 लाख तक के बजट में पंडाल तैयार किया जाता था वो इस साल मात्र 8 लाख के आसपास में सिमट कर रह गई है।

चेतला अग्रणी पूजा के अध्यक्ष यासिर खान बताते हैं कि हम पिछले 28 साल से यहां पूजा करते आए हैं। इस साल उस जगह को सूना नहीं रख सकते थे, इसलिए हमने कम बजट के चलते साधारण पूजा का आयोजन किया है। यासिर कहते हैं इस साल हमें मात्र 15-20 स्पाॅन्सर्स ही मिलें हैं। इस वजह से हम अपने जेब से पैसे लगाकर और आस पास से चंदा लेकर पूजा कर रहे हैं। हालांकि, यह एरिया कोलकाता नगर निगम के मेयर और मंत्री फिरहाद हकीम के अंदर आती है, इसलिए उनकी तरफ से मदद मिल गई है। इस कारण भी पूजा करना संभव हो पाया है।

चेतला अग्रणी पूजा पंडाल को इस साल बेहद सिंपल तरीके से तैयार किया गया है। इसे बांस की लकड़ी से तैयार किया गया है।

25 किलो सोने से तैयार हुई श्रीभूमी की मां दुर्गा

इस साल कोलकाता के श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब ने केदारनाथ की थीम पर तैयार पंडाल में मां दुर्गा की मूर्ति को 25 किलो सोने के गहनों से सजाया है। इस पूजा के मुख्य सदस्य राज्य के मंत्री सुजीत बोस हैं। वे कहते हैं कि इस साल पूजा की रौनक फीकी जरूर है, मगर हमने मूर्ति के आकार और उसकी भव्यता से कोई समझौता नहीं किया गया है। हर साल की तरह इस साल भी हमने मां दुर्गा को सोने के गहनों से सजाया है। श्रीभूमी स्पोर्टिंग क्लब हमेशा से भव्यता के लिए मशहूर रही है। हालांकि, बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर सुजीत बोस ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने यह माना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल पूजा पंडाल के बजट में 20 फीसदी तक की कटौती हुई है।

यह श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब का दुर्गा पूजा है। यह पंडाल केदारनाथ थीम पर तैयार किया गया है।

बता दें कि यह वही पूजा पंडाल है जिसे साल-2018 में दुनिया का सबसे महंगा पंडाल होने का सर्टिफिकेट दिया गया था। बाहुबली की थीम पर तैयार पूजा पंडाल का बजट करीब 10 करोड़ रुपए था। पंडाल की ऊंचाई 110 फीट रखी गई थी। इतना ही नहीं पिछले साल 2019 में नार्थ कोलकाता के संतोष मित्रा स्क्वेयर में मां दुर्गा को 50 किलो सोने से तैयार किया गया था। बजट 20-25 करोड़ रुपए बताई गई थी।

केदारनाथ थीम पर तैयार श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को 25 किलो सोने के गहनों से सजाया गया है।

बजट कम होने के चलते कपडे, धागे और फिश नेट का किया इस्तेमाल

साउथ कोलकाता का मशहूर पूजा पंडाल भवानीपुर 75 पल्ली में इस साल कपडे, धागे और मछली पकड़ने वाली जाल से पंडाल को तैयार किया गया है। सबीर दास बताते हैं कि इस साल का हमारा पूजा का कुल बजट 10 लाख के आसपास है। वहीं, पिछले साल करीबन 50 लाख के आसपास के बजट में पूजा का आयोजन किया गया था। वे बताते हैं कि इस साल ब्रान्ड कंपनियों की तरफ से खास रिस्पॉन्स नहीं मिला है। होर्डिग्स, बैनर्स पर ज्यादा खर्च नहीं किया गया है। कम बजट होने के कारण आयोजन पंडाल और मूर्ति को बेहद साधारण रख रहे हैं लेकिन थीम जरूर हर साल की तरह इस भी दमदार है।

छोटे कारीगरों की तो सालभर की कमाई होती है दुर्गा पूजा से

कॉन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशंस के अध्यक्ष सुशील पोद्दार बताते हैं कि हर साल बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान लगभग 3000 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। इनमें पूजा पंडाल की तैयारी, लेबर, मूर्तिकार, फास्ट फूड का स्टाॅल, कहार व ढाक से लेकर पूजा शॉपिंग शामिल हैं। लेकिन इस साल कोरोना व लॉकडाउन से पैदा आर्थिक संकट ने सबकुछ बर्बाद कर दिया है। इस साल दुर्गा पूजा का पूरा मार्केट करीब 30-35 फीसदी तक डाउन है।

यह कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली का दुर्गोत्सव है। यहां पंडाल को कपडे, धागे और मछली पकड़ने वाली जाल से तैयार किया गया है।

बता दें कि टूर एंड ट्रैवल, फूड और गारमेंट कारोबार के ठप रहने के चलते दुर्गा पूजा का बाजार काफी प्रभावित हुई है। सुशील के मुताबिक, इस साल करीब हजारों की संख्या में ऐसे लेबर से लेकर मूर्तिकार और पूजा के दौरान छोटे छोटे फूड का स्टाॅल लगाने वालों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है। वे बताते हैं कि इनकी कमाई का जरिया ही दुर्गा पूजा है। इस समय इनकी कमाई इतनी हो जाती है कि ये सालभर छोटे मोटे अन्य काम करके भी घर-परिवार मैनेज कर लेते थे।
साउथ कोलकाता के सुरुचि संघ पूजा पंडाल के पास पिछले दस सालों से फूड ट्रक का कारोबार करने वाले आमिर अली कहते हैं कि हर साल पूजा के समय फास्ट फूड की इतनी मांग होती थी कि हम उसे पूरी नहीं कर पाते थे। छह दिनों तक चलने वाली पूजा के दौरान दो लाख तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन इस साल पूजा शुरु हुए दो दिन हो गए। अभी तक 10 हजार से भी कम की कमाई हुई है।

पहली बार सिंदूर खेला रस्म के बगैर ही होगी मां की विदाई

बंगाल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जहां दुर्गापूजा की परम्परा को ही बदलना पड़ा। दुर्गापूजा की शुरुआत मां की प्रतिमा में चक्षु दान के साथ किया जाता है और पूजा सम्पन्न होती है सिंदूर खेला के साथ। ऐसी मान्यता है कि 9 दिन मायके में रहने के बाद मां अपनी ससुराल जाती हैं, इसके पूर्व महिलाएं पान के पत्ते में सिंदूर डालकर मां की मांग भरती है। उसके बाद वही सिंदूर वे एक-दूसरे को लगाती है। दुर्गापूजा के पूरे 9 दिन में यह रस्म सबसे खूबसूरत होती है जिसके साथ भावनात्मक रूप से सभी जुड़े होते हैं। बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण कोर्ट ने सिंदूर खेला पर रोक लगा दी है।

दुर्गापूजा की शुरुआत मां की प्रतिमा में चक्षु दान के साथ किया जाता है और पूजा सम्पन्न होती है सिंदूर खेला के साथ।


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अगर आप कहीं ऐसी जगह निवेश करने का सोच रहे हैं जहां निवेश करने पर आपको ज्यादा रिटर्न मिले, तो शेयर मार्केट में निवेश शुरू करना एक विकल्प हो सकता है। लेकिन शेयर मार्केट में पैसा लगाने के अपने फायदे और नुकसान हैं। इसमें निवेश करना ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे शेयर बाजार में पैसा डूबने या नुकसान होने पर भी आपकी वित्तीय स्थिति पर असर नहीं पड़ेगा।


केवल अपने अतिरिक्त पैसे का ही करें निवेश
नए निवेशकों को सबसे पहले ये समझना चाहिए कि शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा है। ऐसे में ये भी हो सकता है कि आप अपना सारा पैसा खो दें। इसीलिए शेयर में वही पैसा लगाना चाहिए जो आपके पास अतिरिक्त रूप से है। क्योंकि इनके खो जाने पर आपकी वित्तीय स्थिति पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। अपने काम के पैसों को शेयर्स में नहीं लगाना चाहिए।


कितना जोखिम ले सकते हैं ये तय करें
आपको अपनी उम्र, फाइनेंशियल कंडीशन और रिटायरमेंट लक्ष्य इत्यादि पर विचार करके अपनी वित्तीय क्षमता तय करनी चाहिए, और उसके अनुसार ही जोखिम लेना चाहिए। बिना सोचे समझे ज्यादा जोखिम लेना आपको मुसीबत में फंसा सकता है।


अलग-अलग जगह स्टॉक खरीदें
अपने सभी पैसे एक स्टॉक में ही कभी न लगाएं। अच्छे तरीके से स्टॉक का विविध पोर्टफोलियो बनाएं जो आपको जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है और कुछ स्टॉक अच्छी तरह से प्रदर्शन नहीं करते हैं तो आप पैसे खोने से बच सकते हैं। पैसा लगाने से पहले जिस शेयर में पैसा लगा रहे हैं उसके प्रदर्शन पर गौर करें।


सेफ इन्वेस्टमेंट भी जरूरी
शेयर मार्केट में पैसा निवेश करना जोखिम भरा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप इसमें निवेश करने के अलावा कहीं ऐसी जगह भी निवेश करते रहें जहां जोखिम न हो। इस तरह के निवेश के लिए आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रिकरिंग अकाउंट (RD) में पैसा लगा सकते हैं। इससे अगर आपको शेयर बाजार में नुकसान होता है तो इस योजनाओं से आपको रिटर्न मिलता रहेगा।


इंश्योरेंस है जरूरी
अगर आप शेयर मार्केट में निवेश करते हैं तो आपको एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस और पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लेना चाहिए। इससे अगर आपको शेयर मार्केट में बड़ा नुकसान होता है और आपकी वित्तीय स्थिति बिगड़ती है तब भी मेडिकल इमर्जेंसी या कोई दुर्घटना जैसी स्थिति में आपको सही उपचार मिल सकेगा। इसके अलाव टर्म लाइफ इंश्योरेंस आपके परिवार को आपके न होने पर भी वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा।



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बिना सोचे-समझे ज्यादा जोखिम लेना आपको मुसीबत में फंसा सकता है


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पिछले हफ्ते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का इंडेक्स गुरुवार को एक हजार से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि शुक्रवार को यह 200 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार के ऐसे भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद आप शेयरों में निवेश कर फायदा कमा सकते हैं। हालांकि आपको इसके लिए क्वालिटी वाले शेयरों को चुनना चाहिए।

डिवीज लैब को 3,640 के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह

आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेस ने निवेशकों को डिवीज लैब के शेयर को 3,640 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। कंपनी आगे बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बनाई है। यह चीन से कच्ची सामग्री की सप्लाई पर अपनी निर्भरता भी कम कर रही है। कुल 1,800 करोड़ रुपए का निवेश कंपनी करेगी। एपीआई इंडस्ट्री में यह कंपनी अच्छा काम कर रही है।

अल्ट्राटेक के शेयर को 5,210 के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह

इसी ब्रोकरेज हाउस ने अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर को 5,210 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। कंपनी ने 900 रुपए प्रति टन का टैक्स से पहले का लाभ दिखाया है। इसकी क्षमता का 70 पर्सेंट अभी उपयोग हो रहा है। कंपनी आगे 1,500 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रही है। इससे 1.2 मिलियन टन ब्राउनफिल्ड का विस्तार बिहार और पश्चिम बंगाल में किया जाएगा।

ग्रामीण भारत में अच्छी पहुंच है

अल्ट्राटेक सीमेंट का रिटेल वोल्यूम सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ा है। इसकी ग्रामीण भारत में अच्छी पहुंच है। वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में ग्रामीण भारत में इसकी बाजार हिस्सेदारी 13 पर्सेंट है। पिछले 9 महीनों में इसका फ्री कैश फ्लो 6 हजार करोड़ रुपए रहा है और इसने 2,200 करोड़ रुपए नेट डेट भी घटाया है। पिछले तीन सालों में इसने 3 कंपनियों को खरीदा है।

रेड्‌डीज के शेयर को 6,012 पर खरीदने की सलाह

डॉ. रेड्‌डी के शेयर को इस ब्रोकरेज हाउस ने 6,012 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। कंपनी की अमेरिकी बाजार में अच्छी प्रजेंस है। इसके साथ भारत, रूस, यूके और जर्मनी में भी यह अच्छा कारोबार करती है। वित्त वर्ष 2020 में इसका रेवेन्यू 37 पर्सेंट रहा है। उभरते हुए बाजारों में 19 पर्सेंट जबकि भारत और यूरोप में 17 और 7 पर्सेंट रेवेन्यू रहा है। कंपनी ने ब्रिस्टोल की सब्सिडियरी के साथ विवादों का सेटलमेंट भी कर लिया है। इसके साथ 25 उत्पादों को लांच करने की तैयारी कर रही है।

एसएमसी ग्लोबल ने दी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट को खरीदने की सलाह

एसएमसी ग्लोबल के सौरभ जैन ने टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट को 555 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। इसका अभी का भाव 478 रुपए है। इसमें 16 पर्सेंट का फायदा मिल सकता है। यह टाटा ग्रुप की सब्सिडियरी है। कंपनी के पोर्टफोलियो में चाय, कॉफी, पानी, नमक, दाल, मसाला और रेडी टू कुक आदि हैं। यह चाय की विश्व की दूसरी सबसे बड़ी वितरक और निर्माता है। वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में इसका बेवरेजेस से रेवेन्यू एक हजार करोड़ रुपए रहा है। फूड रेवेन्यू 589 करोड़ रुपए रहा है और इंटरनेशनल बेवरेजेस रेवेन्यू 867 करोड़ रुपए का रहा है। सभी सेगमेंट में बढ़त रही है।

कंपनी जरूरी खाद्य पदार्थ और बेवरेजेस आइटम का घरेलू और इंटरनेशनल बाजार में निर्माण और सप्लाई करती रहेगी।

रामको सीमेंट में मिलेगा 18 पर्सेंट का फायदा

रामको सीमेंट को इस ब्रोकरेज हाउस ने 919 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। यह शेयर अभी 778 रुपए पर कारोबार कर रहा है। इसमें 18 पर्सेंट का फायदा मिलने की उम्मीद है। रामको सीमेंट को पहले मद्रास सीमेंट के नाम से जाना जाता था। यह रेडीमिक्स कांक्रीट सीमेंट और ड्राई मोर्टार प्रोडक्ट बनाती है। इसकी क्षमता 18.79 मिलियन है। कंपनी 3500 करोड़ रुपए की लागत से क्षमता का विस्तार कर रही है।

हाल में इसने नई सीमेंट यूनिट का उड़ीसा में ऑपरेशन शुरू किया है। इस पर कंपनी ने 710 करोड़ रुपए खर्च किया है। वित्त वर्ष 2020 में इसका रेवेन्यू 5,285 करोड़ रुपए रहा है। अनुमान है कि 2022 तक यह 6 हजार 28 करोड़ रुपए हो जाएगा।

एचडीएफसी की सलाह

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने डी मार्ट की पैरेंट कंपनी अवेन्यू सुपर मार्ट के शेयर को रिड्यूस करने की सलाह दी है। इसका लक्ष्य 1,850 रुपए है। जबकि वर्तमान मूल्य 1,800 रुपए है। दरअसल जियो मार्ट के आने से डीमार्ट पर असर होने की आशंका है। ऐसा अनुमान है कि डी मार्ट दूसरी तिमाही में केवल दो स्टोर ही खोलेगी। इसके शुद्ध लाभ की रिकवरी में गिरावट आने की आशंका है।

टाइटन के शेयर को बेचने की सलाह

टाइटन के शेयर को इस ब्रोकरेज हाउस ने 1,050 रुपए के लक्ष्य पर बेचने की सलाह दी है। यह 950 रुपए पर कारोबार कर रहा है। टाइटन की रिकवरी उम्मीद से ज्यादा रहने की है। हालांकि इसका रेवेन्यू 2 पर्सेंट गिर सकता है। ज्वेलरी रेवेन्यू में 8.7 पर्सेंट की बढ़त की उम्मीद जताई गई है। वी मार्ट के शेयर को इस ब्रोकरेज हाउस ने 1,850 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। यह 1,800 रुपए पर कारोबार कर रहा है। वी मार्ट के बारे में एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा है कि इसके रेवेन्यू में रिकवरी होगी।

एचसीएल टेक के शेयर को 970 पर खरीदने की सलाह

एचसीएल टेक को एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने 970 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। यह शेयर अभी 827 रुपए पर कारोबार कर रहा है। इसका दूसरी तिमाही का रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रहा है। क्लाउड इंफ्रा बिजनेस में यह कंपनी अच्छा काम कर रही है। दूसरी तिमाही में इसका रेवेन्यू और लाभ दोनों एक साल पहले इसी तिमाही की तुलना में बढ़े हैं।

इसके अलावा एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने एशियन पेंट्स के शेयर को 1800 रुपए के लक्ष्य पर रिड्यूस करने, बर्जर पेंट्स के शेयर को 460 रुपए के लक्ष्य पर बेचने और कंसाई नेरोलैक के शेयर को 500 रुपए पर खरीदने की सिफारिश की है।



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पिछले हफ्ते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का इंडेक्स गुरुवार को एक हजार से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। शुक्रवार को यह 200 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुआ


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दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ आ रहा है। वह भी अमेरिका में नहीं बल्कि चीन में और कंपनी भी वहीं की है। जैक मा की कंपनी अलीबाबा का एफिलिएट है एंट ग्रुप और यही 35 अरब डॉलर यानी 2.56 लाख करोड़ रुपए का आईपीओ ला रहा है। यदि आपको लग रहा है कि इस तरह के आईपीओ तो आते रहते हैं तो जान लीजिए कि पिछले पांच साल में जितने आईपीओ भारत में आए हैं, उन सभी को मिला दें तो भी यह अकेला उन पर भारी पड़ने वाला है।

एंट ग्रुप का आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफर हॉन्गकॉन्ग और शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में आ रहा है और इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ कहा जा रहा है। बार्कलेज, आईसीबीसी इंटरनेशनल और बैंक ऑफ चाइना इंटरनेशनल इसके बुक-रनर्स हैं। हॉन्गकॉन्ग में सीआईसीसी, सिटी ग्रुप, जेपी मॉर्गन और मॉर्गन स्टेनली इसे स्पॉन्सर कर रहे हैं। इसी तरह, शंघाई में सीआईसीसी और चाइना सिक्योरिटीज इसे स्पॉन्सर कर रहे हैं।

क्या है यह आईपीओ और इसमें क्या खास है?

  • सबसे पहले तो समझ लीजिए कि आईपीओ क्या होता है? जब कोई कंपनी अपने स्टॉक या शेयर्स को जनता के लिए जारी करती है तो उसे आईपीओ, इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (सार्वजनिक प्रस्ताव) कहते हैं। इसके बाद लिमिटेड कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होती हैं।
  • चीनी अरबपति जैक मा की अलीबाबा की एफिलिएट एंट ग्रुप दुनिया की सबसे वैल्युएबल फिनटेक कंपनी है और यह अपनी वैल्युएशन 250 अरब डॉलर तक ले जाना चाहती है। यह बताना जरूरी है कि भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इसी साल जून में 150 अरब डॉलर के मार्केट कैपिटल तक पहुंची है और यह ऐसा करने वाली पहली और इकलौती भारतीय कंपनी है।
  • एंट ग्रुप को डुअल लिस्टिंग से 35 अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद है। यह लिस्टिंग हॉन्गकॉन्ग और शंघाई में आधी-आधी होगी। सऊदी अरामको ने 2019 में 29.4 अरब डॉलर जुटाए थे और अब तक उसका आईपीओ ही दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है। चीन और अमेरिका में बढ़ते तनाव को देखते हुए एंट ग्रुप का आईपीओ न्यूयॉर्क में लिस्ट नहीं होगा। अमेरिका तो एंट ग्रुप को ट्रेड ब्लैकलिस्ट में डालने की तैयारी कर रहा है। यह बात अलग है कि 2014 में अलीबाबा ग्रुप ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में स्टॉक बेचकर 25 अरब डॉलर जुटाए थे और वह उस समय रिकॉर्ड-ब्रेकिंग आईपीओ था।

एंट ग्रुप क्या है और इसका जैक मा से क्या लेना-देना है?

  • दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा को इंग्लिश टीचर जैक मा ने 1999 में शुरू किया था। कई नाकामियों के बाद जैक मा ने जब अलीबाबा शुरू की तो खुद की ही नहीं बल्कि देश के लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी। आज जैक मा दुनिया के सबसे रईस लोगों में शामिल हैं।
  • अलीबाबा का पेमेंट्स प्लेटफॉर्म ही था अलीपे, जो 2011 में शुरू हुआ। 2014 में एंट फाइनेंशियल बना। अलीबाबा की इसमें 50.5% हिस्सेदारी है और वह भी हैंगझाउ जुन्हान और हैंगझाउ जुनाओ के जरिए। अलीपे के 711 मिलियन यूजर मंथली एक्टिव हैं और 80 मिलियन बिजनेस हैं।
  • इसका मोबाइल वॉलेट अलीपे बहुत ही लोकप्रिय है और एक अरब से ज्यादा यूजर हैं और चीन के डिजिटल पेमेंट मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 55% है। यह एक सुपर ऐप है। यूटिलिटी बिल के भुगतान से टैक्सी बुक करने तक, मूवी टिकट खरीदने से, कर्जा लेने, बीमा खरीदने, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त, कॉफी का भुगतान, एक-दूसरे को पैसे भेजने तक हर काम में अलीपे इस्तेमाल होता है।
  • यह एक मल्टी-साइडेड मार्केट है। कंज्यूमर, बिजनेस और दो हजार पार्टनर फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं और मिलकर पावरफुल नेटवर्क का इफेक्ट देते हैं। अलीपे के 90 प्रतिशत से ज्यादा यूजर ऐप का इस्तेमाल पेमेंट्स के अलावा अन्य एक्टिविटी के लिए भी करते हैं। हमारे पेटीएम जैसा ही तो है, जो पेमेंट्स के साथ-साथ कई सर्विसेस दे रहा है।

एंट ग्रुप के नंबर क्या कहते हैं?

  • कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा रही थी तब 2020 की पहली छमाही में इसने 10.5 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया और 3.2 अरब डॉलर का मुनाफा भी। 2019 में अलीपे ने छोटे कारोबारियों और आम लोगों के अकाउंट्स में 290 अरब डॉलर क्रेडिट किए और कुल 16 लाख करोड़ डॉलर के लेन-देन किए। यह 2018 के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा है।
  • 2015 से कंपनी ने तीन इक्विटी फंडिंग राउंड्स में 20 अरब डॉलर जुटाए हैं। 2018 में 14 अरब डॉलर जुटाए, जब कंपनी का वैल्युएशन 150 अरब डॉलर किया गया था। इसके इन्वेस्टर्स में चाइना इन्वेस्टमेंट कॉर्प, टेमासेक होल्डिंग्स, सिल्वर लेक, ब्लैकरॉक, जनरल एटलांटिक और वारबर्ग पिनकस शामिल हैं।

इन्वेस्टर्स को आईपीओ में इंटरेस्ट क्यों है?

  • चीनी इन्वेस्टर आने वाले आईपीओ को टारगेट करने के लिए नए लॉन्च म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट कर रहे हैं। पांच फंड्स बने हैं जो दो हफ्ते के सबस्क्रिप्शन पीरियड में 8.8 अरब डॉलर के फंड को टारगेट कर रहे हैं। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन और चीन के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए अमेरिकी इन्वेस्टर्स को इस आईपीओ में पार्टिसिपेट करने से रोका गया है।
  • चीन एक अहम फॉरेन पॉलिसी प्लेटफॉर्म है और डोनाल्ड ट्रम्प आने वाले यूएस इलेक्शन में अपने डेमोक्रेटिक प्रतिस्पर्धी जो बाइडेन से काफी पिछड़ रहे हैं। हालांकि, चीन के सिक्योरिटी रेगुलेटर भी स्टॉक लिस्टिंग में कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की जांच कर रहे हैं, जिस वजह से आईपीओ में देर हो रही है।


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Jack Ma Alibaba Ant Group IPO vs Saudi Aramco | Everything That You Need To Know About Alibaba Ant Group Initial Public Offering


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आईआईएफएल वेल्थ और हुरुन इंडिया ने हाल ही में 40 और उससे कम उम्र वाले सेल्फ मेड अमीरों की लिस्ट को जारी की। इस लिस्ट में एकमात्र महिला हैं 39 साल की देविता सराफ। वह इस सूची में 16वें स्थान पर हैं। देविता वीयू ग्रुप की सीईओ और चेयरपर्सन हैं। उनका नाम फॉर्च्यून इंडिया (2019) की भारत की सबसे ताकतवर 50 महिलाओं में भी आ चुका है। इंडिया टुडे ने 2018 में बिजनेस वर्ल्ड में 8 सबसे ताकतवर महिलाओं में देविता सराफ को जगह दी थी। उनकी कुल दौलत करीब 1200 करोड़ रुपए है।

देविता सराफ ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वो जेनिथ कंप्यूटर्स के मालिक राजकुमार सराफ की बेटी हैं। हालांकि, वो हमेशा से कुछ अलग करना चाहती थीं। इसलिए फैमिली बिजनेस नहीं संभाला। 2006 में जब टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव हो रहा था और अमेरिका में गूगल और एपल जैसी कंपनियां मोबाइल और कम्प्यूटर के बीच के गैप को खत्म करने की जद्दोजहद में थीं, उस समय देविता ने कुछ नया करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने टीवी कारोबार को चुना। उन्होंने VU टीवी की शुरुआत की। जो टीवी और सीपीयू का मिलाजुला रूप था।

देविता सराफ ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वो जेनिथ कंप्यूटर्स के मालिक राजकुमार सराफ की बेटी हैं।

उनकी कंपनी लेटेस्ट तकनीक में अच्छा काम कर रही है। देविता की कंपनी एडवांस TV बनाती है। इस टीवी पर यू-ट्यूब और हॉट स्टार जैसे ऐप को भी आसानी से चलाया जा सकता है। मतलब ये टीवी कम कंप्यूटर होते हैं। इनके जरिए आप मल्टी टास्किंग कर सकते हैं। साथ ही कंपनी एंड्रॉयड पर चलने वाले हाई डेफिनेशन टीवी भी बनाती है। बड़ी स्क्रीन के साथ कंपनी के पास कॉरपोरेट यूज की भी टीवी है।

देविता ने जब कंपनी शुरू की थी तब उनकी उम्र महज 24 साल ही थी। शुरुआत में उन्हें दिक्कत आईं, लेकिन करीब 6 साल बाद 2012 में उनकी कंपनी प्रॉफिट में आ गई। 2017 में कंपनी का टर्नओवर करीब 540 करोड़ पहुंच गया था। उसके बाद से लगातार यह बढ़ता ही गया। आज देविता के पास पूरे भारत में करीब 10 लाख से ज्यादा कस्टमर्स हैं। कंपनी दुनिया के 60 देशों में अपनी टीवी बेचती है।

चार साल पहले वीयू टेलिविजंस की को-फाउंडर और सीईओ देविता सराफ को डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की इवांका कहा था।

लड़की समझ कर सीरियसली नहीं लेते थे लोग

देविता के लिए कंपनी को इस मुकाम तक पहुंचाना आसान नहीं था। एक इंटरव्यू में देविता ने कहा था कि जब वो बिजनेस के सिलसिले में किसी डीलर या मैन्युफैक्चरर से मिलती थीं, तो लोग उन्हें लड़की समझकर सीरियसली नहीं लेते थे। कुछ लोगों को लगता था कि ये लड़की है और इतना बड़ा बिजनेस संभाल कैसे सकती है। देविता के मुताबिक, जब आपको आगे बढ़ाना होता है तो ऐसी चीजों के बारे में ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि उनका मानना है कि अब लोगों की सोच बदल रही है। उन्हें देखकर बहुत से लोगों को लगता है कि उनकी बेटियां भी अपना बिजनेस खड़ा कर सकती हैं।

पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

साल 2017 में पीएम मोदी ने अपने भाषण में देविता के आइडिया का जिक्र भी किया था।

साल 2017 में देविता ने यंग सीईओ के साथ पीएम मोदी की हुई बैठक में हिस्सा लिया था। इसमें न्यू इंडिया के लिए इन सीईओज से अपने आइडिया देने को कहा गया था। देविता ने इस कार्यक्रम में मेक इन इंडिया पर अपने विचार रखे। बाद में पीएम मोदी ने अपने भाषण में उनके आइडिया का जिक्र भी किया।

हार्डवर्किंग ही सफलता का मूलमंत्र

एक इंटरव्यू में देविता सराफ ने कहा कि वह हार्डवर्किंग और युवा महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वह देश की तमाम युवा महिलाओं को प्रोत्साहित करने का काम कर रही हैं। वह कहती हैं कि उन्हें अब इस बात का भरोसा हो गया है कंपनियों के सीईओ भी किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं हैं। देविता कहती है कि महिलाओं को सिर्फ उनकी सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि उनके टैलेंट के लिए भी सराहा जाना चाहिए।

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देविता की कंपनी एडवांस TV बनाती है। इस टीवी पर यू-ट्यूब और हॉट स्टार जैसे ऐप को भी आसानी से चलाया जा सकता है।


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आपके पास एंड्रॉयड स्मार्टफोन है, तब गूगल प्ले स्टोर का काम तो पड़ता ही होगा। प्ले स्टोर से ही यूजर्स अपने पसंदीदा और काम से जुड़े ऐप्स इन्स्टॉल कर सकते हैं। ऐप स्टोर में कुछ ऐसी सेटिंग होती हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया तब फोन का डाटा और बैटरी भी तेजी से खत्म होते हैं। हालांकि, इन सेटिंग्स में चेंज करके डाटा और बैटरी की प्रॉब्लम खत्म कर सकते हैं।

सेटिंग नंबर-1
प्ले स्टोर से डाटा बचाने का तरीका

यदि आपके फोन का इंटरनेट डाटा तेजी से खत्म होता है और इस बारे में आपको पता नहीं है, तब इसके लिए आपको प्ले स्टोर की सेटिंग में कुछ चेंजेस करने होंगे। इसके लिए प्ले स्टोर की सेटिंग में जाकर 'ऑटो-अपडेट ऐप्स' पर जाएं। यहां पर 'डॉन्ट ऑटो-अपडेट ऐप्स' को सिलेक्ट कर लें। यदि आपने ओवर एनी नेटवर्क को सिलेक्ट कर रखा है तब जैसे ही ऐप का अपडेट आएगा, वो ऑटो अपडेट होने लगेगा। इससे डाटा और बैटरी खत्म होते हैं।

सेटिंग नंबर-2
फोन की बैटरी को सेव करने का तरीका

यदि आप प्ले स्टोर का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं और इससे फोन की बैटरी तेजी से खत्म होता है, तब आपको यहां पर भी एक सेटिंग में बदलाव करना होगा। इसके लिए सेटिंग में जाकर 'थीम' पर टैब करें, फिर 'सेट बाई बैटरी सेवर' को सिलेक्ट करें। इस सेटिंग से प्ले स्टोर के इस्तेमाल के दौरान बैटरी कम डिस्चार्ज होगी।

सेटिंग नंबर-3
प्ले स्टोर को प्रोटेक्ट करने का तरीका

यदि आपको इस बात का डर लगता है कि कोई आपके फोन का इस्तेमाल करते वक्त उसमें कोई ऐप चुपके से इन्स्टॉल कर सकता है। या फिर आपके बच्चे उसमें कोई ऐप इन्स्टॉल कर सकते हैं, तब प्ले स्टोर को लॉक किया जा सकता है। इसके लिए आपको सेटिंग में जाकर 'पैरेंटल कंट्रोल' में जाना होगा। यहां जैसे ही आप कंट्रोल को ऑन करेंगे आपको 4 डिजिट का पासवर्ड डालना होगा। जैसे ही पासवर्ड सेट हो जाएगा, तब प्ले स्टोर ओपन होने पर पासवर्ड के बारे में पूछेगा।



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Google Play Store Tricks and Tips for Saving Data, Battery and more


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कोरोना संकट के बीच इस साल कई कंपनियों की लिस्टिंग शेयर बाजार में हुई है। एसबीआई कार्ड्स, हैप्पिएस्ट माइंड्स सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों ने लिस्टिंग के दिन निवेशकों को शानदार मुनाफा दिया है। इसके अलावा शेयर बाजार में बढ़त को भी सहारा दिया है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बीते हफ्ते रिकॉर्ड हाई 161 लाख करोड़ रुपए स्तर को पार कर चुका है। इसमें नई लिस्टिंग वाली कंपनियों की हिस्सेदारी 1.28 लाख करोड़ रुपए की है।

निवेशकों को हुआ शानदार मुनाफा

आज सोमवार को बाजार में दो कंपनियां मझगांव डाक शिपबल्डर्स और यूटीआई एएमसी की लिस्टिंग हुई है। निवेशकों को सरकारी कंपनी मझगांव डाक शिपबिल्डर्स से 49% का मुनाफा हुआ है। जबकि यूटीआई एएमसी से निवेशकों को निराशा हाथ लगी। हालांकि, निवेशकों को इस साल लिस्ट होने वाली कंपनियों से अच्छा मुनाफा हुआ है। निवेशकों को मुनाफे के लिहाज से हैप्पिएस्ट माइंड्स से सबसे ज्यादा लाभ मिला है। कंपनी ने लिस्टिंग के दिन 111% का मुनाफा दिया था। इसके अलावा रूट मोबाइल और केमकॉन स्पेशियलिटी से भी निवेशकों को अच्छा मुनाफा हुआ।

इस साल लिस्ट हुए कंपनियों से मुनाफा

कंपनी बंद भाव लिस्टिंग डेट मार्केट कैप (हजार करोड़ रुपए) मुनाफा (%)
एसबीआई कार्ड्स 847.00 16 मार्च 79.59 -13
रोस्सारी बायोटेक 756.65 23 जुलाई 3.92 57.65
माइंड स्पेस बिजनेस पार्क 303.84 7 अगस्त 18 11
हैप्पिएस्ट माइंड्स टेक 344.40 17 सितंबर 5.05 111
रूट मोबाइल 764.35 21 सितंबर 4.34 105
केमकॉन स्पेशियल्टी 434.85 1 अक्टूबर 1.59 115
कैम्स 1309.40 5 अक्टूबर 6.38 23
यूटीआई एएमसी 476.60 12 अक्टूबर 6.04 -11
मझगांव डाक शिपबिल्डर्स 173.00 12 अक्टूबर 3.48 49

मार्केट कैप में हिस्सेदारी

सोमवार को बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 160.39 लाख करोड़ रुपए स्तर के पार रहा। इससे पहले 8 अक्टूबर को मार्केट कैप 161.12 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंचा था, जो इसका सर्वोच्च स्तर भी है। इससे पहले मार्केट कैप का यह स्तर जनवरी के दौरान 160 लाख करोड़ रुपए के स्तर को छुआ था। इस दौरान बाजार में निवेशकों ने अच्छी कमाई की। 2020 में मार्केट कैप के लिहाज से नई लिस्टिंग वाली कंपनियों की भी हिस्सेदारी 1.28 लाख करोड़ रुपए की रही। जबकि इसमें बड़ी हिस्सेदारी दिग्गज कंपनियों का रहा। इसमें आरआईएल, टीसीएस और इंफोसिस जैसे दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

बाजार के दिग्गज कंपनियों के मार्केट कैप में इजाफा

कंपनी 17 जनवरी को एमकैप 12 अक्टूबर को एमकैप बढ़त
आरआईएल 11 लाख करोड़ रुपए 15.12 लाख करोड़ रुपए 4.12 लाख करोड़ रुपए
टीसीएस 7.76 लाख करोड़ रुपए 10.66 लाख करोड़ रुपए 2.9 लाख करोड़ रुपए
एचडीएफसी बैंक 5.66 लाख करोड़ रुपए 6.66 लाख करोड़ रुपए 1 लाख करोड़ रुपए
एचयूएल 3.18 लाख करोड़ रुपए 5 लाख करोड़ रुपए 1.18 लाख करोड़ रुपए
इंफोसिस 3 लाख करोड़ रुपए 4.78 लाख करोड़ रुपए 1.78 लाख करोड़ रुपए

सोमवार को बाजार लगातार आठवें दिन बंद हुआ है। आज बीएसई सेंसेक्स 84.31 अंक ऊपर 40,593.80 पर और निफ्टी 16.75 अंक ऊपर 11,930.95 पर बंद हुआ। बाजार में मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयर गिरावट रही। जबकि निफ्टी आईटी इंडेक्स 364 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ बंद हुआ है। वहीं, दूसरी ओर बाजार में आज ज्यादातर न्यू लिस्टेड कंपनियां गिरावट के साथ बंद हुए हैं। जैसे मझगांव डाक शिपबल्डर्स का शेयर 20% नीचे बंद हुआ।



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Market Capitalization Of BSE-Listed Companies Data 2020: From SBI Cards TO Happiest Minds IPO


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पिछले हफ्ते शेयर बाजार ने अच्छी खासी बढ़त हासिल की। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स अब अपने हाई से कुछ प्रतिशत दूर है। इस दौरान पिछले हफ्ते बैंकिंग और आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। आप बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो आपके पास अभी भी अवसर है। आप अच्छे शेयरों में 10 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न पा सकते हैं।

हीरो मोटो कॉर्प को 3,653 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह

आनंद राठी ब्रोकरेज हाउस के मुताबिक निवेशक हीरो मोटो कॉर्प के शेयर को खरीद सकते हैं। इसका लक्ष्य 3,653 रुपए है। दोपहिया सेक्टर की इस कंपनी के प्रोडक्ट की इस समय अच्छी मांग है। क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की इस समय उपलब्धता कम है और लोग सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से अपनी गाड़ी से यात्रा करना पसंद कर रहे हैं। सितंबर में इस कंपनी ने 7.15 लाख गाड़ियों की बिक्री की है। यह 2020 में किसी एक महीने में सबसे ज्यादा बिक्री है। सितंबर 2019 की तुलना में सितंबर 2020 में 17 प्रतिशत ज्यादा बिक्री हुई है।

एचडीएफसी लिमिटेड के शेयर को 2,215 पर खरीदने की सलाह

इस ब्रोकरेज हाउस ने एचडीएफसी लिमिटेड के शेयर को 2,215 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। लॉकडाउन में कंपनी के रिटेल बिजनेस पर असर देखा गया। हालांकि मासिक आधार पर इंडिविजुअल लोन में सुधार दिखा है। जून तिमाही में इसका डिस्बर्समेंट 68 प्रतिशत रहा है। होम लोन की मांग अब बढ़ रही है और कंपनी एएए रेटिंग वाले कॉर्पोरेट को उधारी देने पर फोकस कर रही है। इसी तरह टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग के शेयर को 230 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी गई है।

टेक्नो का ऑर्डर बढ़ सकता है

टेक्नो के बारे में अनुमान है कि इसका ऑर्डर इंफ्लो 20 अरब रुपए तक जा सकता है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इसका ईपीसी का मार्जिन 15 प्रतिशत रह सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर स्मार्ट मीटर के कार्यक्रम से कंपनी को आने वाले समय में अच्छा लाभ हो सकता है। सरकार 2024 तक पुराने मीटर को बदलकर 20 करोड़ नए मीटर लगाने की योजना बना रही है।

कोरोमंडल को 858 के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह

एसएमसी ग्लोबल ने कोरोमंडल इंटरनेशनल के शेयर को खरीदने की सलाह दी है। कंपनी के रिसर्च एनालिस्ट सौरभ जैन के मुताबिक इसे 858 रुपए के लक्ष्य पर खरीदा जा सकता है। इसमें 19 प्रतिशत का रिटर्न यहां से मिल सकता है। कोरोमंडल मुरुगुप्पा ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी है। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी फास्फेटिक फर्टिलाइजर कंपनी है। कंपनी ने फर्टिलाइजर को ग्रोमर स्मार्ट नाम से रीलांच किया है।

डालमिया भारत का शेयर दे सकता है 13 प्रतिशत का रिटर्न

इसी तरह डालमिया भारत के शेयर को इस ब्रोकरेज हाउस ने 879 रुपए के लक्ष्य पर खरीदने की सलाह दी है। इसमें 13 प्रतिशत रिटर्न मिलने की उम्मीद है। इसका सात दशकों का ट्रैक रिकॉर्ड है। यह चौथी सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है। इसकी सालाना ऑपरेशनल क्षमता 26.5 मिलियन टन है। इसकी देश के सभी हिस्सों में डाइवर्सिफाई मौजूदगी है।

तमिलनाडु, आँध्र प्रदेश और कर्नाटक में इसकी क्षमता 46 प्रतिशत है जबकि उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 39 प्रतिशत क्षमता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि हाल में आए आईपीओ भी बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। खासकर वे शेयर जिनकी कंपनियों का अच्छा रिकॉर्ड है।



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पिछले हफ्ते बैंकिंग और आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। आप बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो आपके पास अभी भी अवसर है


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आईपीओ बाजार में कुछ उन कंपनियों का नंबर आ सकता है, जिनके बारे में आप बहुत ज्यादा जानते हैं। जिन कंपनियों की सेवाओं और प्रोडक्ट का आप ज्यादा उपयोग करते हैं। इनमें प्रमुख रूप से फ्लिपकार्ट, पेटीएम, जोमैटो, बिग बॉस्केट और अन्य कंपनियां हैं। यह कंपनियां वित्त वर्ष 2021 में या 2022 में आईपीओ ला सकती हैं।

काफी प्रसिद्ध हैं यह कंपनियां

एक ग्लोबल ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक यह सभी भारतीय यूनिकॉर्न प्रथम और दूसरे स्तर के शहरों में देश में काफी प्रसिद्ध हैं। इनके प्रोडक्ट काफी फेमस हैं। इनकी बाजार में अच्छी खासी हिस्सेदारी है। हाल में भारतीय शेयर बाजार में तेजी रही है और कई कंपनियों के आईपीओ काफी हिट रहे हैं। रिटेल निवेशकों ने इन आईपीओ में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। कई आईपीओ में तो इनका हिस्सा 35-40 गुना भरा है।

रिटेल की भागीदारी बढ़ी

विश्लेषकों के मुताबिक इन कंपनियों के आईपीओ के आने से रिटेल निवेशकों में और दिलचस्पी बढ़ेगी। इससे आईपीओ बाजार भी गुलजार होगा। यह कंपनियां उस सेक्टर की हैं जिसमें देश की युवा आबादी दिलचस्पी रखती है। ई-कॉमर्स, फिनटेक और फूड डिलिवरी वाली यह कंपनियां हैं। यह सभी कंपनियां इंटरनेट आधारित हैं और इस वजह से इनका अच्छा वैल्यूएशन हो सकता है।

फ्लिपकार्ट का आईपीओ 2021 में

फ्लिपकार्ट की बात करें तो यह देश में लीडिंग ई-कॉमर्स वेबसाइट है। इसका वैल्यूएशन 25 अरब डॉलर है। अमेरिका की रिटेल कंपनी वालमार्ट द्वारा समर्थित फ्लिपकार्ट का ई-कॉमर्स स्पेस में अमेजन और अब रिलायंस जियो मार्ट के साथ मुकाबला है। ई-कॉमर्स के बारे में अनुमान है कि यह 2025 तक 5 गुना से ज्यादा बढ़कर 133 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में ई-कॉमर्स की भारत में अवेयरनेस 5 प्रतिशत से भी कम है लेकिन यह 2025 तक 10 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगी।

फ्लिपकार्ट के पास 6.19 करोड़ एक्टिव ग्राहक

फ्लिपकार्ट के एक्टिव ग्राहकों की संख्या 2014 में 77 लाख थी जो 2019 में 6.19 करोड़ हो गई। फ्लिपकार्ट भारत में 2007 में शुरू हुई थी। यह पहली ई-कॉमर्स कंपनी थी। वालमार्ट ने 2018 में इसे 16 अरब डॉलर में खरीद लिया था। फ्लिपकार्ट के पास मिंत्रा और जबांग भी है। इसका आईपीओ 2021 में आ सकता है।

बायजू का आईपीओ 2022-23 में

बायजू भारत की सबसे बड़ी एजुटेक कंपनी है जिसके पास 7 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स हैं और 45 लाख सालाना पैसा देनेवाले लोग हैं। कंपनी ऐप आधारित लर्निंग कंटेंट वीडियो लेक्चर्स के जरिए स्कूल के छात्रों को देती है। साथ ही यह एंट्रेंस एक्जाम के लिए कोचिंग देती है। देश में करीबन 26 करोड़ छात्र हैं। यह अमेरिका की तुलना में 5 गुना ज्यादा है।

कोविड-19 के बाद अचानक बायजू के छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो गई। इसका वैल्यूएशन 10.8 अरब डॉलर है। हाल में मुकेश अंबानी ने भी इस सेक्टर में कदम रखा है और इससे आनेवाले दिनों में इसमें प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। इसका आईपीओ 2022-23 में आ सकता है।

पेटीएम का आईपीओ 2022 में

पेटीएम की बात करें तो यह 2010 में शुरू हुई थी। यह फिनटेक कंपनी है। भारत में डिजिटल पेमेंट में यह लीडिंग है। देश में डिजिटल पेमेंट के मामले में अभी 15 प्रतिशत ही अवेयरनेस है। यह अन्य बाजारों की तुलना में काफी कम है। पेटीएम के पास वर्तमान में 15 करोड़ के करीब एक्टिव यूजर्स हैं। 1.6 करोड़ मर्चेंट हैं। पेटीएम अब डिजिटल कंज्यूमर सेक्टर में उधारी देने की योजना पर फोकस कर रही है। इसके साथ ही यह बीमा, संपत्तियों के प्रबंधन, स्टॉक ब्रोकिंग और जनरल बैंकिंग भी शुरू कर दी है। बैंकिंग के लिए यह पेमेंट बैंक का इस्तेमाल कर रही है।

मजबूत मैनेजमेंट टीम के साथ पेटीएम के निवेशकों में सॉफ्टबैंक, एंट फाइनेंशियल, टी रोवे प्राइस, डिस्कवरी कैपिटल आदि हैं। इसका वैल्यूएशन 16 अरब डॉलर है। आईपीओ 2022 में आने की उम्मीद है।

ओला का आईपीओ 2021 में

ओला के बारे में बात करें तो यह 250 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। इसका भारत में 50 प्रतिशत मार्केट शेयर है। 15 लाख ड्राइवर हैं। एक अरब राइड्स सालाना होती है। इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2019 में 30.8 करोड़ डॉलर रहा है। वित्त वर्ष 2016 से 2019 के दौरान इसके रेवेन्यू में 39 प्रतिशत की बढ़त हुई है। कंपनी ने कुल 3.3 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसका वैल्यूएशन 7 अरब डॉलर है। इसका आईपीओ 2021 तक आने की उम्मीद है।

फोन पे का 2023 में आईपीओ

फोन पे भी पेटीएम की तरह ही कारोबार में है। यह मेजर डिजिटल पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनी है। यह फ्लिपकार्ट सपोर्ट कंपनी है। फोन पे का सालाना 180 अरब डॉलर का पेमेंट वैल्यू है। इसका मासिक लेन-देन 50 करोड़ है। फोन पे के पास 18 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। कंपनी 2022 तक लाभ में आने की उम्मीद कर रही है। इसका आईपीओ 2023 तक आ सकता है। इसका वैल्यूएशन 7 अरब डॉलर है।

डेलहीवरी का 2021-22 में आईपीओ

डेलहीवरी भी ई-कॉमर्स में एक लॉजिस्टिक कंपनी है। इसका 20 प्रतिशत मार्केट शेयर रेवेन्यू में है। ई-कॉमर्स के बारे में अनुमान है कि यह सेक्टर 90 अरब डॉलर तक 2023 तक जा सकता है। डेलहीवरी करीबन 18 हजार पिन कोड तक सेवा देती है। कंपनी ने अब तक 78 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसका आईपीओ 2021-22 तक आ सकता है।

जोमैटो का आईपीओ 2021 में

जोमैटो भी फूड सर्विस इंडस्ट्री में है। यह इंडस्ट्री करीबन 80 अरब डॉलर की है। ऑन लाइन फूड डिलिवरी के बारे में अनुमान है कि यह 2025 तक 22 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। सालाना यह 40 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़ सकती है। इस सेगमेंट में जोमैटो की बाजार हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है। यह 2021 में आईपीओ ला सकती है। इसका वैल्यूएशन 3.3 अरब डॉलर है।



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With Flipkart, Paytm, Zomato, Big Bosquet, many companies are planning IPO, may come from next year


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