आज फ्रेंडशिप डे है। मित्रता में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ये ग्रंथों में बताया गया है। ग्रंथों के कुछ ऐसे मित्रों के बारे में जानिए, जिनकी मित्रता से हम सुखी और सफल जीवन के सूत्र सीख सकते हैं...
दुर्योधन और कर्ण
महाभारत में दुर्योधन और कर्ण की मित्रता थी। दुर्योधन ने कर्ण को अपना प्रिय मित्र माना और उचित मान-सम्मान दिलवाया। इसी बात की वजह से कर्ण दुर्योधन को कभी भी अधर्म करने से रोक नहीं सका और उसका साथ देता रहा। जबकि सच्चा मित्र वही है जो अधर्म करने से रोकता है। अगर दोस्ती में ये बात ध्यान नहीं रखी जाती है तो बर्बादी तय है। महाभारत में दुर्योधन की गलतियों की वजह से उसका पूरा कुल नष्ट हो गया। कर्ण धर्म-अधर्म जानता था, लेकिन उसने दुर्योधन को रोकने की कोशिश नहीं।
श्रीराम और सुग्रीव
रामायण में हनुमानजी ने श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता करवाई तो श्रीराम ने वचन दिया था कि वे बाली से सुग्रीव का राज्य और पत्नी वापस दिलवाएंगे। सुग्रीव ने सीता माता की खोज में सहयोग करने का वचन दिया था। बाली को मार श्रीराम ने अपना वचन पूरा कर दिया था। सुग्रीव को राजा बना दिया।
सुग्रीव राज्य और पत्नी वापस मिल गई। इसके बाद वह श्रीराम को दिया अपना वचन ही भूल गया, तब लक्ष्मण ने क्रोध किया। इसके बाद सुग्रीव को अपनी गलती का अहसास हुआ। तब श्रीराम और लक्ष्मण से सुग्रीव में क्षमा मांगी। इसके बाद सीता की खोज शुरू हुई। इनकी मित्रता से ये सीख मिलती है कि हमें मित्रता में कभी भी अपने वचन को नहीं भूलना चाहिए।
श्रीकृष्ण और अर्जुन
महाभारत में इन दोनों की मित्रता सबसे श्रेष्ठ थी। श्रीकृष्ण ने हर कदम अर्जुन की मदद की। अर्जुन ने भी अपने प्रिय मित्र श्रीकृष्ण की हर बात को माना। श्रीकृष्ण की नीति के अनुसार युद्ध किया और पांडवों की जीत हुई। इनकी मित्रता की सीख यह है कि मित्र को सही सलाह देनी चाहिए और मित्र की सलाह पर अमल भी करना चाहिए।
श्रीकृष्ण और द्रौपदी
महाभारत में श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच मित्रता का रिश्ता था। श्रीकृष्ण द्रौपदी को सखी कहते थे। द्रौपदी के पिता महाराज द्रुपद चाहते थे कि उनकी पुत्री का विवाह श्रीकृष्ण से हो, लेकिन श्रीकृष्ण ने द्रौपदी का विवाह अर्जुन से करवाया। श्रीकृष्ण ने हर मुश्किल परिस्थिति में द्रौपदी की मदद की। जब श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तो चक्र की वजह से उनकी उंगली में चोट लग गई और रक्त बहने लगा। तब द्रौपदी ने अपने वस्त्रों से एक कपड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांधा था। इसके बाद जब भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ, तब श्रीकृष्ण ने उंगली पर बांधे उस कपड़े का ऋण उतारा और द्रौपदी की साड़ी लंबी करके उसकी लाज बचाई थी। इसके बाद भी श्रीकृष्ण ने कई बार द्रौपदी को परेशानियों से बचाया।
आज रविवार का दिन है और तारीख 2 अगस्त है। महीने की शुरुआत ईद के त्यौहार की खुशखबरी के साथ हुई है तो इसी महीने 5 तारीख को अयोध्या में मंदिर निर्माण की नींव रखी जाएगी। सोमवार को रक्षाबंधन भी है। ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि अगस्त महीना शानदार गुजरे, कोरोना के प्रकोप से राहत मिले और जिंदगी फिर ढर्रे पर चल पड़े।
इन सबके साथ अब आगे बढ़ते हैं और ऐसी खबरों की ओर चलते हैं, जिन्होंने ईद के दिन भी हलचल बनाए रखी। एक तरफ टिकटॉक को लेकर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं तो राजस्थान का सियासी नाटक जैसलमेर पहुंच चुका है। सुशांत की बहन ने प्रधानमंत्री से न्याय की अपील की। कभी हमेशा चर्चित रहने वाले अमर सिंह भी नहीं रहे।
पहले बात करते हैं टिकटॉक की। ऐसा लगता है कि टिकटॉक हमेशा बज में बना रहेगा और कोई न कोई धुन बजती ही रहेगी। अब, एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प टिकटॉक को बैन करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ माइक्रोसॉफ्ट टिकटॉक के अमेरिकी कारोबार को खरीदने की बात कर रही है। अगर बिल गेट्स टिकटॉक को खरीदते हैं तो टिकटॉक फायदे में रह सकती है और उसे दूसरे देशों में भी कारोबार करने में आसानी हो जाएगी। बैन से बचने की टिकटॉक रणनीति भारत के बाद अमेरिका की भी टिकटॉक पर सख्ती
अगर आप इतने दिनों से राजस्थान की राजनीति से ऊब चुके हैं तो आज जोड़तोड़ की इस राजनीति से विराम लेते हैं लेकिन सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ी खबरों का अपडेट आपको जरूर देना चाहेंगे। सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने प्रधानमंत्री के नाम पर लिखा- ‘मैं सुशांत सिंह राजपूत की बहन हूं और मैं पूरे मामले की तत्काल जांच का अनुरोध करती हूं। हम भारत की न्याय व्यवस्था में विश्वास करते हैं और किसी भी कीमत पर न्याय की उम्मीद करते हैं।’ कंगना ने एक बार फिर लोगों को निशाने पर लिया है। बॉलीवुड में मेरे भाई का कोई गॉडफादर नहीं था
अब हम एक ऐसे शख्स की बात करते हैं जो हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चाओं में बने रहते थे। शनिवार को उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। हम बात कर रहे हैं अमर सिंह जो कभी मुलायम सिंह के बेहद करीबी थे। छह महीने से सिंगापुर में उनका किडनी का इलाज चल रहा था। अमर 2002 और 2008 में भी राज्यसभा के लिए चुने गए। अमिताभ बच्चन परिवार से भी अमर के बेहद करीबी रिश्ते रहे। पूरी खबर पढ़े आपके परिवार को भला-बुरा कहा, इसका अफसोस है
बिजनेस की दुनिया की तरफ तरफ चलें तो कोरोना टाइम में टेक कंपनियों को जलवा बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को तिमाही नतीजे में एपल, फेसबुक, गूगल और अमेजन ने रिकॉर्ड प्रॉफिट की घोषणा की तो शनिवार को एपल ने एक और नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। सऊदी अरामको को पीछे छोड़कर एपल अब दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। कुछ समय पहले ही सऊदी अरामको दुनिया में सबसे बड़ा आईपीओ लेकर आई थी। रिलायंस के साथ भी कंपनी की डील पटरी पर दौड़ती नजर नहीं आ रही है। मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी बनी एपल
पर्सनल फाइनेंस की बात करें तो सोमवार से गाेल्ड में निवेश करने का आपके पास मौका है। निवेश और सेविंग जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। इनवेस्टमेंट डिक्लेरेशन के लिए 31 जुलाई आखिरी तारीख थी। जाहिर है आप भी इस काम को निपटा चुके होंगे लेकिन आज रविवार है और आपके पास बचत के बारे में सोचने का वक्त थोड़ा ज्यादा होगा तो पीएफ से जुड़ी इस खबर को भी जरूर पढ़े।
अनुमानित कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर आपके रिटायरमेंट में 30 साल का समय बाकी है और अभी आप पीएफ अकाउंट से 1 लाख रुपए निकालते हैं तो इससे आपके रिटायरमेंट फंड पर 11.55 लाख रुपए का असर पड़ेगा। बहुत ज्यादा जरूरत होने पर ही PF अकाउंट से निकालें पैसा
अब एक ग्राउंड रिपोर्ट की ओर चलते हैं और बात करते हैं ऐसे बच्चों की जो सीखने और पढ़ने की धुन में कोरोना काे मात दे रहे हैं। कश्मीर में ज्यादातर बच्चों के पास न तो मोबाइल है और न ही उनके घर तक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच है। अधिकतर पैरेंट्स मोबाइल खरीदना अफोर्ड नहीं कर सकते थे, लेकिन बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में व्यवधान न पहुंचे, इसके लिए ओपन एयर कम्युनिटी स्कूल शुरू किया गया। अकेले बडगाम के ऐसे स्कूलों में 8,000 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों के पास मोबाइल नहीं थे तो शुरू किया नए स्टाइल का स्कूल
चलते-चलते देखते हैं रविवार का दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है-
रविवार, 2 अगस्त का मूलांक 2, भाग्यांक 5, दिन अंक 1, 4, मासांक 8 और चलित अंक 1, 4 है। न्यूमेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार गणेश के अनुसार अंक 1 की अंक 4 के साथ विरोधी युति और अंक 8 के साथ परस्पर प्रबल विरोधी युति बनी हुई है। अंक 2 की अंक 1, 4 के साथ प्रबल मित्र युति और अंक 5 की अंक 1, 4 के साथ मित्र युति बनी हुई है।
रविवार, 2 अगस्त 2020 को टैरो राशिफल के मुताबिक 12 में 8 राशियों के लिए दिन कई मामलों में बड़ी उपलब्धि वाला हो सकता है। कुछ लोगों के लिए दिन किसी पुरानी इच्छा के पूरा होने का है। कुछ लोगों के लिए अपने काम के मामले में सबसे आगे रहने का समय है
दोस्ती का भी एक साइंस है जो कहता है लंबी उम्र चाहिए है तो दोस्तों की संख्या बढ़ाइए। अमेरिका की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है दोस्त न होना बढ़ते मोटापे से भी ज्यादा खतरनाक है जान को जोखिम बढ़ाता है। सबसे अच्छा दोस्त वही है जो आपके कभी अकेला नहीं छोड़ता, अपनों के दूरी बनाने के बाद भी नहीं। आज फ्रेंडशिप डे है, जानिए दोस्ती के ऐसे 4 मशहूर किस्से जो सही मायनों में दोस्ती शब्द के मायने समझाते हैं और सिखाते हैं कि दुनिया भले ही साथ छोड़ दे, सच्चा दोस्त कभी साथ नहीं छोड़ता।
सचिन तेंदुलकर-विनोद कांबली : खत्म नहीं होती थी रन बनाने और वड़ा पाव खाने की भूख
भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित दोस्ती है सचिन और विनोद कांबली की। इन्हें मुम्बई क्रिकेट के ‘जय-वीरू’ के नाम से भी जाना है। दोस्ती की शुरुआत तब हुई जब सचिन की उम्र 9 और विनोद कांबली की 10 साल थी। जगह थी मुंबई का शारदा श्रम स्कूल। यहां पढ़ाई, मजाक, मस्ती और सजा भी दोनों को साथ मिलती थी। क्रिकेट भी साथ ही खेलते थे। गहरी दोस्ती का ही नतीजा था कि 1988 में दोनों ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए। दोनों ने मिलकर स्कूल क्रिकेट में 664 रन बनाए, जिसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इस घटना के बाद दोनों लाइमलाइट में आए और कुछ साल बाद भारतीय टीम में शामिल हुए।
विनोद कांबली के मुताबिक, कैंटीन में दोनों का फेवरेट फूड वड़ापाव था। कौन कितने वड़ा पाव खा सकता है इसकी भी शर्त लगती थी। सचिन के 100 रन बनाने पर विनोद उन्हें 10 वड़ा पाव खिलाते थे। यही सचिन भी विनोद के लिए करते थे। स्कूल में भाषण देने की बारी आने पर चालाकी से विनोद सचिन को पीछे छोड़ देते थे। ऐसा ही एक वाकया है जब सचिन को स्पीच देनी थी। सचिन का भाषण बमुश्किल एक से दो मिनट का था। लेकिन कांबली ने अंग्रेजी के टीचर से भाषण लिखवाया और उसे मंच पर पढ़कर सचिन को हैरानी में डाल दिया।
दोस्ती का कारवां आगे बढ़ा और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पहुंचा। जी तोड़ मेहनत रंग लाई और दोनों क्रिकेट जगत में सितारे की तरह चमके। लेकिन इस बीच पहली बार दोनों का प्यार भरा झगड़ा भी हुआ। वजह थी किसमें कितनी ताकत है। जगह थी स्टेडियम की विट्ठल स्टैंड की चौथी कतार। हाथापाई शुरू हुई लेकिन सचिन को खुश देखने के लिए कांबली जानबूझकर जमीन पर गिर गए।
कांबली ने एक इंटरव्यू बताया, मुझे हराने में सचिन को बहुत मजा आता था चाहें क्रिकेट का मैदान हो या स्कूल में ताकत दिखाने की आदत। सचिन उनसे उम्र में छोटे थे वह उन्हें निराश नहीं करना चाहते थे। कांबली के मुताबिक, सचिन को हमेशा से ही पंजा लड़ाकर ताकत दिखाने का शौक रहा है। दोनों ने 14-15 साल की उम्र में 1987 वर्ल्ड कप में बतौर बॉल ब्वॉय क्रिकेट से जुड़े। मैच इंग्लैंड और भारत के बीच था। यह वो दिन था जब दोनों ने मिलकर सपना देखा कि अगला वर्ल्ड कप हम साथ मिलकर ही खेलेंगे और ऐसा ही हुआ। 1992 में वर्ल्ड कप खेला। अब तक के सफर में दोनों के बीच कई बार दोस्टी टूटने की खबरें भी आईं लेकिन दोनों हमेशा इस पर शांत रहे और कभी एक-दूसरे का विरोध नहीं किया।
संजय दत्त - राजकुमार हीरानी: दोस्ती दुनिया के सामने जाहिर नहीं की, लेकिन हमेशा निभाई
दोस्त की बिगड़ी छवि को सुधारने और उसे सही पटरी पर लाने का काम एक दोस्त ही कर सकता है, फिल्ममेकर राजकुमार हीरानी और अभिनेता संजय की दोस्ती भी इसी पटरी पर आगे बढ़ती है। फिल्म संजू बनाने के बाद राजकुमार हीरानी पर संजय की बिगड़ी छवि को बदलने के आरोप लगे। यूं तो संजय और राजकुमार हीरानी ने कभी खुलकर एक-दूसरे से दोस्ती को नहीं स्वीकारा लेकिन फिल्म संजू में छवि बदलने के आरोप लगे तो आखिरकार हीरानी ने स्वीकारा कि उन्होंने फिल्म में कई ऐसे सीन डाले जो संजय के प्रति लोगों के दिन में सहनभूति पैदा करते हैं।
राजकुमार और संजय की पहली मुलाकात 2003 में हुई। हीरानी फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए जिम्मी शेरगिल के रोल में संजय दत्त को लेना चाहते थे और मुन्नाभाई के लिए शाहरुखा पहली पसंद थे। लेकिन बात नहीं बन पाई और अंत में संजय ने मुन्नाभाई का किरदार निभाया। दोनों की दोस्ती आगे बढ़ी और संजय की पत्नी मान्यता के कहने पर हीरानी ने संजू की बायोपिक की तैयारी शुरू की।
राजकुमार के मुताबिक, जब फिल्म का एक हिस्सा बनकर तैयार हुआ उसे उन पहले लोगों को दिखाया गया जो संजय दत्त से नफरत करते थे। उन लोगों का जवाब था, हम इस इंसान से नफरत करते हैं और ऐसी फिल्म नहीं देखना चाहते। इसके बाद फिल्म में कुछ बदलाव किए गए जिसमें कुछ ऐसे सीन भी डाले गए जो संजय दत्त की छवि को सुधारने का काम करते हैं।
आनंद महिंद्रा और उदय कोटक : दोस्त ही नहीं मेंटर और गाइड भी
बिजनेसमैन उदय कोटक आनंद महिंद्रा को सिर्फ दोस्त ही नहीं मेंटर और गाइड भी मानते हैं। दोस्ती की शुरुआत उस समय हुई जब उदय कोटक की शादी हो रही थी, तो मेहमानों में आनंद महिंद्रा भी थे। आनंद विदेश से पढ़कर तभी लौटे थे और महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह की कंपनी महिंद्रा स्टील का कारोबार देख रहे थे। यह स्टील कंपनी कोटक की क्लाइंट थी। बातों-बातों में कोटक के व्यापार में निवेश की बात निकल आई और 30 लाख रुपए के शुरुआती इक्विटी कैपिटल के साथ नई कंपनी की शुरुआत करने की बात तय हुई। आनंद के पिता भी उदय की कंपनी के चेयरमेन बनने कोराजी हो गए। जब आनंद की एंट्री बोर्ड मेंबर्स में हुई, तो उन्होंने कंपनी को नाम दिया-कोटक महिंद्रा। इस तरह कोटक महिंद्रा फाइनेंस की शुरुआत हुई।
महिंद्रा के जुड़ने से कंपनी की विश्वसनीयता और बढ़ गई। हालांकि 2009 में आनंद महिंद्रा ने अपने आप को इस कंपनी से अलग कर लिया, पर आज भी महिंद्रा का नाम इस कंपनी से जुड़ा है।2017 में कोटक-महिंद्रा बैंक की एक स्कीम की लॉन्चिंग पर कोटक महिंद्रा ग्रुप के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर उदय कोटक ने यह बात साझा की थी। इसको लेकर आनंद ने ट्वीट किया जिसमें लिखा था, ‘साल 1985 में युवा उदय कोटक मेरे ऑफिस में आए थे, वह बहुत स्मार्ट थे और मैंने पूछा हूं कि क्या मैं उसकी कंपनी ने निवेश कर सकता हूं, यह मेरा सबसे बेहतरीन निर्णय था। इसका जवाब देते हुए उदय कोटक ने लिखा, ‘धन्यवाद आनंद, इस पूरी यात्रा में आप मेरे दोस्त, मेंटर और मार्गदर्शक रहे हैं।’
किरण मजूमदार शॉ : जब बात पति और दोस्त की जिंदगी की आई तो दोनों फर्ज निभाए
दोस्ती का एक बेहतरीन किस्सा बायोकॉन की मैनेजिंग डायरेक्टर किरन मजूमदार शॉ से भी जुड़ा है। जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब पति और दोस्त दोनों कैंसर से जूझ रहे थे लेकिन उन्होंने बिजनेस, परिवार और दाेस्ती के बीच तीनों ही जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं भीं दूसरों की मदद का रास्ता भी साफ किया।किरन की सबसे करीबी दोस्त नीलिमा रोशेन को 2002 में कैंसर डिटेक्ट हुआ था।
आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवार से होने के बाद भी ज्यादातर दवाएं बाहर से आने कारण नीलिमा को पैसों की बेहद जरूरत थी। ऐसे में किरन उनके साथ खड़ी रहीं और आर्थिक मदद की। किरन दोस्त की बीमारी के तनाव से बाहर निकल पाती इससे पहले उन्हें एक और खबर ने परेशान कर दिया। 2007 में पता चला कि पति जॉन शॉ भी कैंसर से जूझ रहे हैं। दोनों ही घटनाओं ने किरन को इस हद तक परेशान किया कि भविष्य में दूसरे के साथ ऐसा न हो इसका हल सोचने पर मजबूर कर दिया।
किरन ने नारायण हृदयालय के देवी शेट्टी के साथ मिलकर बेंगलुरू में 2007 में मजूमदार-शॉ कैंसर हॉस्पिटल की शुरुआत की जो बेहद कम खर्च में कैंसर का इलाज उपलब्ध कराता है। कई महीने के चले इलाज के साथ पति की कैंसर मुक्त होने की खबर मिली। किरन के मुताबिक, जब डॉक्टर के मुंह से यह खबर सुनी जॉन अब पूरी तरह स्वस्थ हैं, इस खुशी मैं शब्दों में नहीं बता सकती। दोस्त के इलाज के दौरान किरन ने उनके साथ काफी समय बिताया, उसके साथ टूर पर भी गईं ताकि वह अच्छा महसूस करे।
किरन हर वीकेंड पर हैदराबाद दोस्त से मिलने आती थीं उन्हें सरप्राइज पार्टी देती थीं। व्ययस्तता के बावजूद उनके साथ समय बिताती थीं लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब नीलिमा ने अंतिम सांस ली और यह दोस्ती अंतिम समय तक कायम रही।
दोस्तों का साथ कितना कुछ बदलता है, इस पर अब विज्ञान की मुहर भी लग गई है। लम्बी उम्र चाहिए तो दोस्त बनाएं, डिप्रेशन से दूर रहना चाहते हैं तो भी दोस्तों की संगत जरूरी है। इतना ही नहीं, वर्क प्लेस पर काम करने की क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो एक कलीग आप में जोश भरने का काम कर सकता है। ये सभी बातें रिसर्च में साबित हो चुकी हैं। आज फ्रेंडशिप डे है, इस मौके पर रिसर्च की जुबानी समझते हैं क्या कहता है, दोस्ती का विज्ञान।
दोस्तों पर हुई 5 रिसर्च से 5 असरदार बातें पता चलती हैं
पहली बात: दोस्तों का सर्कल बढ़ने पर डिप्रेशन से रिकवरी दोगुना तेजी से होती है
डिप्रेशन से दूर रहना चाहते हैं और लम्बी उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो दोस्तों की संख्या को बढ़ाएं। प्रोसीडिंग्स ऑफ रॉयल सोसायटी जर्नल में प्रकाशित शोध दोस्ती के बारे में नई बात सामने रखता है। इसे समझने के लिए रिसर्च की गई। शोधकर्ताओं ने रिसर्च में ऐसे दो हजार स्टूडेंट्स को शामिल किया जिनमें डिप्रेशन के लक्षण दिखे।
रिसर्च में सामने आया कि जिन स्टूडेंट्स के पास दोस्तों की संख्या बढ़ी थी उनमें डिप्रेशन के लक्षण घटे। इनमें दोगुना तेजी से रिकवरी की सम्भावना देखी गई।
अमेरिका में हुई एक और रिसर्च बताती है कि अकेलापन डिप्रेशन बढ़ाने के साथ सेहत को भी प्रभावित करता है। एन्नल्स ऑफ बिहेवियरल मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक कि दोस्तों का सर्कल आपकी उम्र भी बढ़ाता है और आपको खुश भी रखता है।
दूसरी बात: वर्क प्लेस पर दोस्तों का साथ आपको खुशहाल और मेहनती बनाता है
ब्रिटेन में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, दोस्तों का साथ निजी जिंदगी में ही नहीं, वर्क प्लेस पर भी आपको खुश रखता है। रिसर्च के मुताबिक, 66 फीसदी लोगों का कहना वर्क प्लेस पर मौजूद दोस्तों के कारण ऑफिस में काम करने का उत्साह बढ़ जाता है।
57 फीसदी का कहना है कि वर्क प्लेस होने वाली दोस्ती आपको खुशहाल बनाने के साथ काम करने की क्षमता को भी बढ़ाती है। 2020 में हुई यह बताती है कि 77 फीसदी लोगों का अपने कलीग्स के साथ पॉजिटिव रिलेशनशिप रहता है।
तीसरी बात: एक इंसान केवल पांच दोस्तों से ही नजदीकी रिश्ते बना पाता है
ब्रिटिश एंथ्रोपोलॉजिस्ट और शोधकर्ता रॉबिन डनबार की रिसर्च कहती है कि एक इंसान 150 से अधिक दोस्तों से दोस्ती नहीं निभा सकता। इनमें से इंसान के दिल के करीब कुछ ही दोस्त होते हैं। सबसे अच्छे दोस्त कितने होते हैं, इस पर शोधकर्ता रॉबिन का कहना है एक इंसान भले ही 150 दोस्तों का सर्कल मेंटेन कर सकता है लेकिन मात्र 5 दोस्त ही ऐसे होते हैं जिनसे वह अपनी हर बात शेयर कर सकता है।
चौथी बात:. दोस्त कितने भी हों, मात्र 50 फीसदी ही आपको अपना सच्चा दोस्त मानते हैं
आपके दोस्त वाकई में आपको कितना अपना दोस्त मानते हैं, इस पर अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने 2016 में रिसर्च की। रिसर्च में सामने आया कि आपके पास जितने भी दोस्त हैं उनमें से सिर्फ 50 फीसदी ही आपको अपना सच्चा दोस्त मानते हैं। यह रिसर्च 23 से 38 उम्र के लोगों पर की गई थी।
रिसर्च में शामिल 94 फीसदी दोस्तों ने एक-दूसरे के प्रति अपनी फीलिंग शेयर की लेकिन परिणाम के तौर पर सामने आया कि मात्र 53 फीसदी दोस्तों की बातें ही सच्ची थी।
पांचवी बात: उम्र बढ़ने पर परिवार से ज्यादा काम आते हैं दोस्त
जब बात बढ़ती उम्र में साथ निभाने की आती है तो परिवार से ज्यादा दोस्त सबसे विश्वसनीय विकल्प साबित होते हैं। अमेरिकी की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि जब हमारी उम्र बढ़ रही होती है तो दोस्त ही कई तरह से मददगार साबित होते हैं। शोधकर्ता विलियन चोपिक ने इसे समझने के लिए दुनियाभर के 100 देशों के 271,053 लोगों पर सर्वे किया।
सर्वे कहता है कि जिनके दोस्त अधिक होते हैं वे ज्यादा खुश और स्वस्थ रहते हैं।
शोधकर्ताओं ने इसका दूसरा पहलू भी बताया। उनका कहना है इंसान उम्रदराज है और दोस्ती में खटास आ गई है तो यही दोस्ती तनाव की वजह बन सकती है। इंसान को ब्लड प्रेशर की समस्या, हार्ट डिसीज और डायबिटीज से जूझना पड़ सकता है।
शनिवार की देर शाम अचानक ट्रेड के हवाले से खबर चली कि राजकुमार राव और उनकी गर्लफ्रेंड पत्रलेखा का ब्रेकअप हो गया है। इस बारे में जब दैनिक भास्कर ने पत्रलेखा ने संपर्क किया तो एक नई कहानी निकलकर सामने आई और इस बारे में उन्होंने काफी कुछ क्लियर किया।
पत्रलेखा ने कहा, 'दरअसल ढेर सारे प्रोड्यूसर और फाइनेंसर अपनी फिल्मों के लिए राजकुमार राव को अप्रोच करते हैं। इसके लिए राज ने एक पैटर्न बनाया हुआ है। जो लोग उसे जानते हैं, वे उसी पैटर्न को फॉलो करते हुए उनकी एजेंसी और मैनेजर से संपर्क करते हैं।'
मैं तो कह देती हूं हमारा ब्रेकअप हो गया है
आगे उन्होंने कहा, 'और जो लोग उस पैटर्न को नहीं जानते, वो मुझसे संपर्क करते हैं ताकि मेरे जरिए वो राज को नैरेशन दे सकें। मेरे पास राज के लिए लगातार फोन आते रहते हैं, कि उनसे नैरेशन करवा दें। हर एकाध महीनों में ऐसा होता रहता है। ऐसे ही किसी कॉल के दौरान मैंने गुस्से में कह दिया था कि हमारा ब्रेक अप हो चुका है।'
एक-दूसरे के काम में दखल नहीं देते
आगे उन्होंने बताया, 'असल में ऐसा कुछ नहीं है। हम दोनों साथ में हैं और एक-दूसरे की कंपनी एन्जॉय कर रहे हैं। हम दोनों एक-दूसरे को काफी स्पेस देते हैं। एक-दूसरे के प्रोफेशनल कमिट्मेंट्स के आड़े नहीं आते। ना वो मेरी स्क्रिप्ट्स के बारे में कुछ पूछते हैं और ना मैं उनके अपकमिंग प्रोजेक्टों के बारे में टोकाटाकी करती हूं।'
हमने एक-दूसरे से आई लव यू नहीं कहा
पत्रलेखा ने कहा, 'फिल्म 'लव सेक्स और धोखा' से पहले हम मिले थे। पहले अच्छे दोस्त बने, फिर हम समझ गए कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। हमारे बीच वैसा फिल्मी इजहार जैसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने या मैंने वो तीन मैजिकल वर्ड्स ‘आई लव यू’ कभी नहीं बोले। हम दोनों एक-दूसरे को बेपनाह प्यार करते हैं, और ये बात हमें पता है और हमारा भरोसा कायम है।
हमारे बीच दोस्ती वाली फीलिंग ज्यादा
शादी के सवाल पर उन्होंने कहा, 'अभी तो हम दोनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ में बिजी हैं। अगले एक-दो साल हमारा शादी के बंधन में बंधने का इरादा नहीं है। समय आने पर हम वो काम भी कर लेंगे। हमारे बीच दोस्ती वाले भाव ज्यादा हैं। उसके चलते हमारा रिश्ता खूबसूरत है।'
विद्युत जामवाल स्टारर एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'खुदा हाफिज' 14 अगस्त से डिज्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम होने वाली है। इस फिल्म में बतौर एक्ट्रेस शिवालिका ओबेरॉय नजर आएंगी। जिन्होंने पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'ये साली आशिकी' से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरूआत की थी। इस मौके पर शिवालिका ने दैनिक भास्कर के साथ अपनी अपकमिंग फिल्म से जुड़े कुछ रोचक किस्से साझा किए।
सवाल- असिस्टेंट डायरेक्टर कि भूमिका निभाते हुए कैमरे के सामने आने की इच्छा कब हुई? शिवालिका- 'मैं हमेशा से एक्टिंग करना चाहती थी। लेकिन क्योंकि मेरी फैमिली में कोई भी इस फील्ड से ताल्लुक नहीं रखता था, इसीलिए मैंने 'हाउसफुल 3' और 'किक' जैसी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका निभाई और उसके बाद ऑडिशन देने चालू किए। तब जाकर पिछले साल मुझे मेरी पहली फिल्म मिली। असिस्टेंट के रूप में काम करने के बाद फिल्म मेकिंग के बारे में मुझेबहुत सारी बातें पता चलीं। मैंने काफी कुछ सीखा जो कि अब मैं अपने अभिनय में भी अपना रही हूं।'
सवाल- अपने किरदार के बारे में बताएं? किस तरह खुद को तैयार किया? शिवालिका- 'इस फिल्म में मैं नरगिस का किरदार निभा रही हूं जो कि एक मुस्लिम महिला है और जिसे बचाने के लिए उनके पति विद्युत जामवाल अपनी जान जोखिम में डालते हैं। मेरा रोल एक बेहद ही सरल महिला का है जो आंखों से भी बात कर लेती है और बहुत सिंपल है।'
सवाल- शूटिंग के दौरान कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा चैलेंजिंग रहा और सबसे ज्यादा मजेदार भी? शिवालिका- 'मुझे याद है कि हम उज़्बेकिस्तान में शूटिंग करने गए थे। शुरुआत में तो वहां का तापमान 12-13 डिग्री सेल्सियस था लेकिन धीरे-धीरे तापमान माइनस में चला गया। कम होते-होते वो -7 डिग्री तक भी चला गया था। उस कड़ाके की ठंड में शूट करना अपने आप में बहुत मुश्किल था। सभी लोग ठंड से जूझ रहे थे, फिर भी क्योंकि हम मुंबई में रहते हैं जहां अक्सर काफी गर्मी होती है तो ऐसी खूबसूरत और ठंडी जगह पर शूट करना अपने आप पर में मजेदार भी था। मैंने पूरी टीम को कड़ाके की ठंड में भी उतने ही जोश से काम करते देखा है।'
सवाल- बॉलीवुड में किसकी फिल्में आप को सबसे ज्यादा इंस्पायर करती हैं? शिवालिका- 'मैं कहना चाहूंगी कि मुझे आयुष्मान खुराना की जर्नी बहुत इंस्पायर करती है। बहुत ही अलग-अलग किरदार और खूबसूरत किरदार निभाते हैं वो। इसके साथ ही मुझे दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट, श्रद्धा कपूर भी बहुत पसंद है। मुझे लगता है श्रद्धा पूरा पैकेज हैं, चाहे वो सिंगिंग हो या डांसिंग हो। वहीं आलिया की फिल्मों की चॉइस मुझे बहुत पसंद है।'
सवाल- विद्युत जामवाल के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा? क्या सलाह दी उन्होंने सेट पर? शिवालिका- 'विद्युत ना सिर्फ एक बेहतरीन एक्शन हीरो हैं, बल्कि एक बहुत ही अच्छे इंसान भी हैं। सेट पर भी हम हमेशा बातें करते थे, चाहे वह खाने के बारे में हो या फिटनेस के बारे में हो। मुझे याद है कि जब कभी मैं सीन देती थी, जो उन्हें पसंद आता था तो वो अक्सर एक लाइन कहते थे 'स्टार और कितना अच्छा करेंगी तू।'
'वहीं फिटनेस को लेकर उन्होंने मुझे सलाह दी कि मैं अपनी जिंदगी में योगा को अपनाऊं और सच कहूं तो उनकी बात मानकर इस लॉकडाउन में मैंने योगा करना शुरू किया, जिसने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी।'
देशभर में 22 अगस्त से गणेशोत्सव शुरू होगा। इसकी तैयारी तेज हो गई हैं। यह कोरोना काल है। इसलिए कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के मूर्तिकारों ने इस बार भगवान गणेश की मूर्ति को डॉक्टर के वेशभूषा से सजाया है। दृश्य ऐसा है कि डॉक्टर बने गणेश जी पीपीई किट पहनकर कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वहीं बगल में उनकी मदद के लिए मूषकराज खड़े हैं, जिनके हाथ में डॉक्टरों के टूल्स की ट्रे है।
नहीं मिले गले, फासले से बोले- ईद मुबारक
भोपाल समेत देशभर में शनिवार को त्याग और बलिदान का पर्व ईद-उल-अजहा सादगी के साथ मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते लोगों ने घरों में नमाज अदाकर कोरोना से मुक्ति की दुआ मांगी। कुर्बानी भी घरों में रहकर ही दी गई। इस बार लोग एक-दूसरे के गले नहीं मिले, बल्कि सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए दूर से ही मुबारकबाद दी।
मरीजों के बीच डांस करती पहुंची नर्स
फोटो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल की है। अस्पताल में 400 मरीजों के बीच जब पहली बार ड्यूटी करने डांस करते ये नर्सें वार्ड में पहुंचीं और मरीजों से बोलीं- कोरोना से डरो ना, हम हैं ना
नींव पूजन से पहले अयोध्या में भव्य सजावट
प्रभु राम के आने की सूचना पर अयोध्या की शोभा काफी बढ़ गई। शीतल और सुगंधित वायु मंद-मंद बहने लगी। सरयू का जल अति निर्मल हो गया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के नींव पूजन से पहले अयोध्या में भव्य सजावट की जा रही है। पूरा शहर रोशनी से जगमगा रहा है। शनिवार रात की यह फोटो राम की पैड़ी की है।
2.43 लाख रुपए और 95 डॉलर से शृंगार
चिमटी भभूत में है खजाना कुबेर का, भगवान शिव के भजन की यह पंक्ति आज शहर के गौरीशंकर महादेव मंदिर शिवबाग में चरिर्ताथ हुई। श्रावण मास का शनिवार और प्रदोष होने के उपलक्ष्य में शिवभक्तों ने राजस्थान के नागौर में भगवान भाेले का नोटों से शृंगार किया। इन दिनों भगवान का नित्य नया शृंगार किया जा रहा है। शनिवार को दो हजार, 500, 200, 100, 50, 20, 10, 5, 2 और एक के नोटों व डॉलर से शृंगार किया। 2.43 लाख रुपए और 95 डॉलर से गौरीशंकर महादेव का श्रृंगार किया गया।
वन विभाग को सौंपा पक्षी
राजस्थान के लंगेरा गांव की कोजाणियों की ढ़ाणी में पर्यावरण प्रेमी नरपत सिंह लंगेरा ने एक घायल उल्लू देखा। इसके बाद उन्होंने उल्लू का अपने स्तर पर प्राथमिक उपचार करने के साथ पानी भी पिलाया। उल्लू की जान बचाने के बाद वन विभाग बाड़मेर में स्थित रेस्क्यू सेंटर पर पहुंचाया। अच्छे मौसम के चलते चारों ओर हरियाली
फोटो एशियाई सिंहवंश की शरणस्थली गिर अभयारण्य का है। यहां अच्छे मानसून के चलते चारों ओर हरियाली की चादर पसरी हुई है। सिंहवंश का एक समूह अभयारण्य के खुले मैदानी क्षेत्र में अठखेलियां कर रहा है। सासणगिर के डिप्टी कंजरवेटर, फॉरेस्ट ने वनराज समूह का यह फोटो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा है कि गिर में सिंहवंश का कुनबा 674 हो गया है। मानसून में जलभराव-बाढ़ की समस्या तथा घास वाले इलाकों में मच्छरों से बचने के लिए सिंहवंश समूह ऊंचाई वाले और पर्वतीय इलाके में पड़ाव डाल देते हैं।
सावन तो नहीं बरसा, पर मन मयूर नाचे
फोटो राजस्थान के बीकानेर की है। सावन आते ही झूले लग जाते हैं। भले ही अब परंपरागत झूलों का आनंद लेना लोगों ने कम कर दिया। बच्चे-महिलाएं पेड़ों की टहनियों से झूले बांधकर आनंद लेते हैं। हालांकि इस बार शहर में सावन नहीं बरसा। मेडिकल कॉलेज के पास झूलों का आनंद लेते बच्चे।