पेट्रोल एवं डीजल की मार्केटिंग में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार ने बल्क और रिटेल मार्केटिंग के नियमों को आसान बना दिया है। अब पेट्रोल और डीजल के रिटेल अथॉराइजेशन के लिए किसी भी कंपनी को कम से कम 100 रिटेल आउटलेट लगाने होंगे। साथ ही उसकी नेटवर्थ कम से कम 250 करोड़ रुपए होनी चाहिए।
देश में ईंधन की मार्केटिंग करने में आसानी होगी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि 250 करोड़ रुपए की नेटवर्थ आवेदन के समय होनी चाहिए। सरकार ने कहा कि कड़ी शर्तों को हटाकर अब पेट्रोलियम उत्पादों की मार्केटिंग के लिए आसान नियम लाए गए हैं। इससे देश में ईंधन की मार्केटिंग करने में आसानी होगी। नई गाइडलाइंस के मुताबिक आवेदन अब सीधे मंत्रालय को ही दिए जाएंगे।
ग्राहकों को अच्छी क्वालिटी की सेवा मिल सकेगी
निजी सेक्टर के साथ विदेशी कंपनियां भी बल्क और रिटेल मार्केटिंग के लिए अधिकृत होंगी। सरकार का प्रयास अल्टरनेट ईंधन को डिस्पेंस करने के लिए उत्साहित करना और रिटेल नेटवर्क को देश के दूर दराज इलाकों में बढ़ाने का है। इससे ग्राहकों को अच्छी क्वालिटी की सेवा मिल सकेगी।
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप 23,757 थी
अभी तक पेट्रोलियम पदार्थों की रिटेल मार्केटिंग देश में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) ही करती रही हैं। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, एचपीसीएल, बीपीसीएल, एनआरएल, एमआरपीएल, बीओआरएल और कुछ निजी कंपनियां भी हैं। इसमें रिलायंस, एस्सार और सेल हैं। एक मई 2019 तक कुल 313 टर्मिनल थे। 192 एलपीजी बाटलिंग प्लांट्स और 64703 रिटेल आउटलेट्स थे। इसमें निजी कंपनियों के भी आउटलेट थे। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप 23,757 थी जबकि लाइट डीजल ऑयल 6,528 थी। सुपीरियर केरोसीन ऑयल के डीलरों की संख्या भी देश में समय थी।
ग्रामीण इलाकों में रिटेल नेटवर्क को बढ़ाने पर जोर
दरअसल, सरकार की कोशिश है कि ग्रामीण इलाकों में रिटेल नेटवर्क को बढ़ाया जाए ताकि लोगों को आसानी से पेट्रोलियम पदार्थ मिल सकें। इसके लिए सरकार इस तरह के प्रयास कर रही है। अभी तक सरकारी कंपनियों के भरोसे चल रही इस व्यवस्था में अब निजी सेक्टर की और ज्यादा भागीदारी बढ़ाने की सरकार की योजना है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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