‘2007 में मुझे एक रिसर्च के लिए चीन जाना था। कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए मैंने तय किया कि हवाई सफर नहीं करूंगी। तीन महीने के सफर के बाद ट्रेन से चीन पहुंची। अगले साल मुझे 20 हजार किमी दूर ऑस्ट्रेलिया में नौकरी मिली।
चुनौती थी कि बिना हवाई जहाज के इतना लंबा सफर कैसे पूरा होगा? गूगल पर सर्च करने पर बायोफ्यूल से चलने वाली अर्थरेस बोट के बारे में पता चला। मैंने उस बोट के कैप्टन से बात की और 120 दिन के समुद्री सफर पर निकल पड़ी। यात्रा के बीच हमारी बोट प्लास्टिक के कचरे से जा टकराई। सवाल आया कि यहां इतना प्लास्टिक कैसे आया?
2014 में ई-एक्सपीडिशन संस्था की शुरुआत हुई
इसी सवाल से समुद्र को प्लास्टिक मुक्त बनाने की मेरी यात्रा शुरू हुई। 2014 में ई-एक्सपीडिशन संस्था की शुरुआत हुई। मैंने खुद प्लास्टिक से शरीर में जाने वाले 35 प्रकार के केमिकल का असर जानने के लिए अपना टेस्ट कराया। पाया कि 29 केमिकल शरीर में पहुंच चुके हैं। कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से और प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से यह केमिकल शरीर में पहुंचते हैं।
मुझे आभास हुआ कि असल में यह मुद्दा महिलाओं का है
इसी वजह से कैंसर, फर्टिलिटी या हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मुझे आभास हुआ कि असल में यह मुद्दा महिलाओं का है। यह उनकी सेहत से जुड़ा हुआ है, इसलिए तय किया कि दुनिया को इन समस्याओं से अवगत कराने महिलाएं समुद्री यात्रा के जरिए यह मुहिम चलाएं। असल में यह कदम हमें प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की दिशा में प्रेरित करता है।
80 महिला रिसर्चर्स 10330 नॉटिकल मील की यात्रा कर चुकी हैं
अभी तक 28 देशों से 80 महिला रिसर्चर्स 10330 नॉटिकल मील की यात्रा कर चुकी हैं। इसमें 9 देशों को कवर किया गया है। 2019 में हमने ‘ई-एक्सपीडिशन राउंड द वर्ल्ड’ यात्रा शुरू की है। इससे 30 देशों की 300 महिला रिसर्चर जुड़ी हैं।
इसके तहत 3 साल में 38 हजार नॉटिकल मील की यात्रा कर समुद्र की सेहत को समझा जाएगा। फिलहाल दुनिया में कुल प्लास्टिक उत्पादन का 20% ही रिसाइकिल हो रहा है, जिसे बढ़ाना होगा। मुझे भरोसा है कि अगर हम सब मिलकर इस दिशा में काम करें तो समुद्र फिर से स्वस्थ हो सकते हैं।’
शिफ्ट टूल लॉन्च किया
एमिली और उनकी टीम ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म SHiFT लॉन्च किया है, ताकि वर्चुअल इम्पैक्ट पता किया जा सके। यह टूल लोगों को उनके हितों, कौशल और स्थान से मेल खाने वाले प्लास्टिक के मुद्दे का हल खोजने में मदद करता है।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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