तेलंगाना की दीप्ति रावुला वुमन इंटरप्रेन्योरशिप हब की सीईओ हैं। तेलंगाना में अपनी सेवाएं देने से पहले दीप्ति 15 साल तक अमेरिका में रहीं। यहां उन्होंने 2002 में सेन डियेगो स्टेट यूनिवर्सिटी से हायर एजुकेशन पूरी की।
फिर से भारत आने पर 2016 में वे तेलंगाना के इलेक्ट्रॉनिक प्रमोशन की जॉइंट डायरेक्टर बनीं।
फिलहाल वे तेलंगाना और उससे जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को इंटरप्रेन्योरिशप में नए अवसर प्रदान कर रही हैं। जो लॉकडाउन में उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है। वैसे भी कोरोना काल में अधिकांश लोग बेरोजगारी से परेशान हैं। ऐसे में वी हब महिलाओं के लिए विकास के नए रास्ते प्रदान कर रहा है।
दीप्ति रावुला इस काम से कैसे जुड़ी और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या प्रयास कर रही हैं, जानिए खुद उन्हीं की जुबानी :
यहां के कल्चर को जाना
तेलंगाना के इलेक्ट्रॉनिक प्रमोशन की जॉइंट डायरेक्टर बनने के दिनों याद करती हूं तो ये लगता है कि ये वही समय था जब मैंने पहली बार सरकारी नौकरी की और यहां के कल्चर को भी जाना।
परिवार की जिम्मेदारी भी होती है
इससे पहले मेरे परिवार में कोई गर्वमेंट जॉब में नहीं था। यहां काम करते हुए मैने महसूस किया कि 10-12 घंटे की नौकरी उन महिलाओं के लिए नहीं हो सकती जिनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी भी होती है।
वुमन इंटरप्रेन्योरशिप की शुरुआत की
कई बार इसी वजह से योग्य होने के बाद भी महिलाएं ऐसे जॉब को करना पसंद नहीं करती हैं जिनसे परिवार प्रभावित हो। ऐसी ही महिलाओं को उचित अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वुमन इंटरप्रेन्योरशिप हब की शुरुआत की गई।
आंत्रप्रेन्योरशिप के अवसर देता है
2017 में तेलंगाना सरकार ने वी हब की घोषणा की और मुझे इसका सीईओ नियुक्त किया गया। वी हब भारत का पहला स्टेट लेड इनक्यूबेटर है जो महिलाओं को आंत्रप्रेन्योरशिप के अवसर प्रदान करता है।
2 करोड़ तक कमाने की क्षमता
इसके अंतर्गत उन बिजनेसवुमन के साथ भी काम किया जाता है जिनका हर महीने का टर्नओवर 2 लाख है या जो हर महीने 2 करोड़ तक कमाने की क्षमता रखती हैं।
आगे बढ़ने के अवसर दिए जाते हैं
वी हब के माध्यम से इंटरप्रेन्योरिशप करने वाली महिलाओं के लिए फंड का प्रबंध किया जाता है। उन्हें बिजनेस में आगे बढ़ने के अवसर और आइडियाज दिए जाते हैं।
इनक्यूबेशन प्रोग्राम ऑर्गेनाइज किया
वी हब के मेंटर एक्सपर्ट की मदद से महिलाओं के लिए वे सारे अवसर भी उपलब्ध कराती हैं जो उन्हें अपने स्तर पर नहीं मिल पाते। जर्मन डेवलपमेंट एजेंसी के साथ मिलकर वी हब ने तेलंगाना के गांवों में रहने वाली महिलाओं के लिए एक साल का इनक्यूबेशन प्रोग्राम भी ऑर्गेनाइज किया है। इससे गांव में रहने वाली महिलाओं को रोजगार मिल सकेगा।
कई विकल्प अपना सकती हैं
लॉकडाउन के दौरान तमाम मुश्किलों के बाद महिलाएं खुद को विकसित करने के कई विकल्प अपना सकती हैं। आज महिलाएं कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे मे आंत्रप्रेन्योरिशप महिलाओं की भलाई के काम आने वाला एक ऐसा विकल्प है जिसे अपनाकर वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
जीवन में बहुत संघर्ष कर रही हैं
वी हब की सीईओ बनने के बाद मैं रोज ऐसी महिलाओं से मिलती हूं जो जीवन में बहुत संघर्ष कर रही हैं। मुझे लगता है कि लड़कियों को पढ़ाई के माध्यम से साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स और मैथ्स जैसे विषय चुनकर इंटरप्रेन्योरशिप की शुरुआत करना चाहिए। इस तरह उन्हें कम उम्र से आंत्रप्रेन्योरशिप के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
मुझे ये प्रोजेक्ट करने का मौका मिला
ऐसे कई काम है जिसके बारे में हम सोचते नहीं लेकिन वे हो जाते हैं जैसे मेरा अमेरिका से तेलंगाना आना और सरकार के वी हब प्रोजेक्ट के लिए चुने जाना। ये मेरी खुशनसीबी है कि मुझे ये प्रोजेक्ट करने का मौका मिला।
पूरी तरह समर्पित होकर करें
मैं वुमन आंत्रप्रेन्योर से कहना चाहती हूं कि आप अक्सर उस काम को करने के बाद पछताते हैं जो आपने किसी की देखादेखी करते हुए किया हो। काम करने का सही तरीका यह होना चाहिए कि जो भी काम वर्तमान में आपके पास हो उसे पूरी तरह समर्पित होकर करें। इस तरह आपके काम निश्चित समय पर पूरे होते जाएंगे और नए अवसर मिलते जाएंगे।
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Source From
RACHNA SAROVAR
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