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केंद्र सरकार ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। देश की शिक्षा नीति में 34 सालों बाद यह बदलाव हुआ है। इसमें प्राइमरी एजुकेशन से लेकर रिसर्च लेवल तक के बदलाव शामिल हैं।

अब तक यही समझा जा रहा है कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति पूरी तरह 2019 में आए ड्राफ्ट के आधार पर ही तैयार की गई है। लेकिन, यह पूरी तरह सही नहीं है। नई शिक्षा नीति पर कोविड-19 महामारी का भी असर हुआ है। ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़ा एक नया चैप्टर साल 2020 में ही जोड़ा गया है।

2019 के ड्राफ्ट में कुल 23 चैप्टर थे। जबकि बुधवार को जारी की गई नई शिक्षा नीति में 24 चैप्टर हैं। यह 24वां चैप्टर है Online and Digital Education: Ensuring Equitable Use of Technology यानी सभी के लिए तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करना।

क्या है इस नए चैप्टर में?

सरकार की तरफ से जारी किए गए नई शिक्षा नीति के आधिकारिक दस्तावेज में इस चैप्टर को लेकर लिखा है: महामारी से उपजी परिस्थितियों से यह पता चला कि शिक्षा के पारंपरिक तरीकों के अलावा हमें नए विकल्पों की भी जरूरत है, इसलिए इसे जोड़ा गया।

नई शिक्षा नीति की ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य आर.एस कुरील कहते हैं: यह चैप्टर ड्राफ्ट में नहीं था। सरकार ने बाद में महामारी से उपजी परिस्थितियों को देखते हुए इसे जोड़ा है। हालांकि, यह बदलाव वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तो सही है ही। इसके भविष्य में भी अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

देश में डिजिटल डिवाइड है

ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर दिए जाने के साथ पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन एजुकेशन का हम पूरी तरह फायदा तब तक नहीं उठा सकते, जब तक देश में डिजिटल डिवाइड है। डिजिटल डिवाइड से सीधा मतलब है अधिकतर लोगों के पास ऑनलाइन एजुकेशन के लिए संसाधन उपलब्ध न होना।

सात चरणों में तैयार होगा ऑनलाइन एजुकेशन का ढांचा

  • ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़े इस नए चैप्टर में सात चरणों के बारे में बताया गया है। जिनके तहत देश में ऑनलाइन एजुकेशन का ढांचा तैयार किया जाएगा।
  • NETF, CIET, NIOS, IGNOU, IITs, NITs के जरिए ऑनलाइन एजुकेशन के पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।
  • देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
  • SWAYAM, DIKSHA जैसे ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को पहले से ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाया जाएगा।
  • डिजिटल कंटेंट का एक बड़ा भंडार तैयार किया जाएगा। जिसमें नए कोर्स-वर्क, लर्निंग गेम्स आदि डेवलप किए जाएंगे।
  • डिजिटल डिवाइड को देखते हुए टेलीविजन, रेडियो और कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से भी ई-लर्निंग कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा।
  • DIKSHA, SWAYAM और SWAYAMPRABHA जैसे ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए वर्चुअल लैब तैयार होंगे। जिनसे ऑनलाइन ही स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल और एक्सपेरिमेंट्स भी कर सकें।
  • टीचर्स को सिखाया जाएगा कि वे किस एक ऑनलाइन एजुकेशन के लिए कंटेंट क्रिएटर बन सकते हैं।

एक्सपर्ट की राय



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Impact of Covid-19 on National education policy, new chapter related to online education added, this chapter was not in the draft released last year.


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RACHNA SAROVAR
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पिछले कई सालों में अनेक बार अयोध्या पुलिस छावनी बनी है। पांच अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन अयोध्या आएंगे। इस लिहाज से एक बार फिर अयोध्या की किलेबंदी शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं। हर मुख्य सड़क पर पुलिस की बैरिकेडिंग है।

मतलब, एक बार फिर अयोध्या छावनी में तब्दील हो जाएगी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अयोध्या में कई छावनियां सालों से हैं और वहां साधु-संत रहते आ रहे हैं।

इन छावनियों का इतिहास भारत में मुगल काल के कमजोर होने के साथ शुरू होता है। हालांकि, इनका कोई लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि वैरागी साधुओं ने धर्म की रक्षा के लिए अयोध्या में एक साथ गुट बनाकर रहना शुरू किया और इनके एक साथ रहने की वजह से अंग्रेजों के समय उनके रहने की जगह को छावनी कहा जाने लगा।

कुछ समय पहले तक अयोध्या में चार प्रमुख छावनियां थीं- तुलसी दास जी की छावनी, बड़ी छावनी, तपसी जी की छावनी और छोटी छावनी। तुलसी दास जी की छावनी खत्म हो गई। खत्म होने की कोई साफ-साफ वजह तो कोई नहीं बताता लेकिन अयोध्या के रहने वाले मानते हैं कि उस छावनी में संतों का जाना-आना बंद हुआ और फिर धीरे-धीरे उसका वजूद ही खत्म हो गया।

बाकी बची तीन छावनियां आज भी आबाद हैं। आइए, एक-एक करके इन तीनों छावनियों में चलते हैं।

बड़ी छावनी
मुख्य अयोध्या शहर से दूर, एक किनारे में लगभग तीन एकड़ जमीन पर आबाद है ये छावनी। चारों तरफ बुलंद चारदीवारी है और आने-जाने के लिए एक दरवाजा है। इसे बड़ी छावनी क्यों कहते हैं? इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है। अलग-अलग जवाब हैं। एक का वजूद आस्था पर टिका है तो दूसरे का आकलन पर।

संतों के मुताबिक, बहुत पहले एक संन्यासी अपने साथ बारह सौ साधु-संतों के साथ घूमते हुए अयोध्या आए। वो चार महीने के लिए अयोध्या में डेरा डालना चाहते थे। चुकी उनके साथ और ग्यारह सौ साधु थे सो कोई तैयार नहीं हो रहा था। तब इस छावनी के पहले महंत श्री रघुनाथ दास जी महाराज ने उन्हें और उनके साथी साधुओं को यहां साल भर के लिए रोका। तभी इसे बड़ी छावनी कहते हैं।

बड़ी छावनी अयोध्या शहर से दूर तीन एकड़ में बनी है।

वहीं, पिछले कई साल से धर्म और उसके पीछे के मर्म पर लिखने वाले और इस वास्ते कई बार अयोध्या आ चुके पत्रकार भव्य श्रीवास्तव का मानना है कि संभवतः इसका लेना-देना केवल उस क्षेत्रफल से है, जिसमें छावनी आबाद है।

छावनी के बीच में एक मंदिर है और चारों तरफ छोटे-छोटे कमरे बने हैं। एक तरफ जो कमरे हैं, उनके सामने साधू निवास लिखा है और दूसरी तरफ जो कमरे हैं उनके दरवाजे पर अलग-अलग लोगों के नाम और उनके जन्मस्थान लिखे हैं। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे होटल में एक तरफ गर्ल्स होटल लिखा होता है तो दूसरी तरफ बॉयज होटल।

बड़ी छावनी में रहने वाले और खुद को छावनी का भक्त बताने वाले राम सरस इस बारे में बताते हैं, “देखिए। एक तरफ संत रहते हैं। उनकी दिनचर्या अलग होती है। एक तरफ भक्त रहते हैं और वो अपने हिसाब से रहते हैं। ऐसा इसलिए बनाया गया है ताकि भक्तों को संतों से और संतों को भक्तों से कोई दिक्कत ना हो।”

तपसी (तपस्वी) जी की छावनी
अयोध्या शहर के रामघाट इलाके में स्थित है ये छावनी। भव्य इमारत और इमारत पर की गई कारीगरी से सहज अंदाजा हो जाता है कि छावनी बहुत पहले से आबाद है। छावनी के बाहर पुलिस का पहरा रहता है। इसकी वजह आपको आगे बताएंगे।

अभी तो आप ये जानिए कि ये छावनी उन साधु-संन्यासियों के लिए बनवाया गया था जो जंगलों और पहाड़ों में तपस्या करते थे। जब वो घूमते-घूमते अयोध्या आते थे तो उनको ठहरने में और अपनी दिनचर्या बनाए रखने में दिक्कत होती थी। इन्हीं बातों का ख्याल रखते हुए इस छावनी का निर्माण हुआ।

तपस्या करने वाले साधु-संतों के ठहरने के लिए तपसी छावनी का निर्माण हुआ था।

खुद का परिचय जगतगुरु परमहंस आचार्य जी के रूप में करवाते हैं और इनके समर्थक इनको इस छावनी के वर्तमान महंत बताते हैं। जब हमने इनसे पूछा कि इस छावनी का निर्माण कब हुआ तो वो बोले, “अयोध्या में सबसे प्राचीनतम पीठ और सबसे सिद्ध पीठ तपसी जी की छावनी है। इसके बाद अयोध्या में कई छावनियां बनीं लेकिन सबसे पुरानी छावनी यही है।”

ऐसे ही दावे बड़ी छावनी में रहने वाले संत भी कर चुके हैं। इन दावों का कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। बस अपनी-अपनी मान्यताओं के आधार पर जो जिस छावनी से जुड़ा है उसे सबसे पुराना बताता है।

तपसी छावनी के महंत परमहंस आचार्य जी।

तपसी छावनी का जिक्र पिछले साल नवंबर में तब राष्ट्रीय स्तर पर हुआ था जब परमहंस आचार्य यानी संत परमहंस दास ने राम जन्मभूमि न्यास के महंत नृत्यगोपालदास पर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी की। इसके बाद महंत नृत्यगोपालदास के समर्थकों ने उनको घेर लिया। उन पर हमला किया। पुलिस आई तो ही वो बाहर जा सके।

तब परमहंस दास को तपस्वी छावनी ने ये कहते हुए निष्कासित कर दिया था कि उनका आचरण अशोभनीय था। स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि इसके बाद वो महीनों तक इधर-उधर भागे-भागे फिर रहे थे। जब उन्होंने अपने गुरु से माफी मांगी तो उनकी वापसी हुई। इसी घटना के बाद से छावनी के बाहर पुलिस के जवानों की तैनाती रहती है।

छोटी छावनी
आज की तारीख में अयोध्या की सबसे महत्वपूर्ण यही छावनी है। बाकी सभी छावनियों की तुलना में यहां चहल-पहल ज्यादा रहती है। सीआरपीएफ के चार जवान सुरक्षा में तैनात रहते हैं। वजह ये है कि इस छावनी के वर्तमान महंत नृत्यगोपालदास हैं।

सबसे ज्यादा चहल-पहल छोटी छावनी में ही रहती है।

राम मंदिर आंदोलन के अहम किरदार रहे अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास हैं और सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं।

छोटी छावनी के महंत नृत्यगोपालदास।

इस छावनी को छोटी छावनी के नाम से ही अयोध्या में लोग जानते हैं, लेकिन कुछ साल पहले इसका नाम बदलकर श्री मणिराम दास छावनी कर दिया गया। बिना अपनी पहचान जाहिर किए एक संत इसकी वजह बताते हैं। वो कहते हैं, “हम तो छोटी छावनी ही जानते थे। कुछ साल पहले नाम बदल दिया गया। शायद महंत जी को छोटी छावनी कहने में अच्छा नहीं लगता होगा।”

छोटी छावनी के अंदर सीआरपीएफ की पोस्ट।

पांच अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की सम्भावना है। तैयारियां हर ओर हो रही हैं। छोटी छावनी यानी श्री मणिराम दास छावनी में भी चहल-पहल बढ़ी हुई है। अयोध्या की सभी छावनियों में आज इस छावनी का कद और प्रभाव सबसे ज्यादा है। इस वजह से बाकी छावनियों के महंतों के मन में एक कसक दिखती है। कोई भी खुलकर नहीं बोलता लेकिन करने पर ये साफ-साफ समझ आता है कि छोटी छावनी के प्रभाव का बड़ा हो जाना, बाकियों को रास नहीं आ रहा है।

अयोध्या से जुड़ी हुई ये खबरें भी आप पढ़ सकते हैं...

1. राम जन्मभूमि कार्यशाला से ग्राउंड रिपोर्ट:कहानी उसकी जिसने राममंदिर के पत्थरों के लिए 30 साल दिए, कहते हैं- जब तक मंदिर नहीं बन जाता, तब तक यहां से हटेंगे नहीं

2. अयोध्या से ग्राउंड रिपोर्ट:मोदी जिस राम मूर्ति का शिलान्यास करेंगे, उस गांव में अभी जमीन का अधिग्रहण भी नहीं हुआ; लोगों ने कहा- हमें उजाड़ने से भगवान राम खुश होंगे क्या?

3. अयोध्या से ग्राउंड रिपोर्ट / जहां मुस्लिम पक्ष को जमीन मिली है, वहां धान की फसल लगी है; लोग चाहते हैं कि मस्जिद के बजाए स्कूल या अस्पताल बने

4. अयोध्या में शुरू होंगे 1000 करोड़ के 51 प्रोजेक्ट / राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद 251 मीटर ऊंची श्रीराम की प्रतिमा का भी होगा शिलान्यास; 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर 4 किमी लंबी सीता झील बनेगी

5. अयोध्या के तीन मंदिरों की कहानी:कहीं गर्भगृह में आज तक लाइट नहीं जली, तो किसी मंदिर को 450 साल बाद भी है औरंगजेब का खौफ



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Ayodhya Ram Mandir (Janmabhoomi) Ground Report Latest; Know How Many Chhaavanee (Cantonment) in Uttar Pradesh Ayodhya


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RACHNA SAROVAR
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राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी हैं सत्येंद्र दास। कहते हैं "सबसे बड़ी बात है कि राममंदिर बन रहा है। 28 साल से मैं पुजारी के रूप में रामलला की सेवा कर रहा हूं। मन मे एक टीस थी कि रामलला टेंट में हैं, लेकिन ठाकुर जी की कृपा से सब सही हो गया। अब हमारे आराध्य श्री राम टाट से निकल कर ठाट में आ गए हैं।

चूंकि, अब ट्रस्ट बन गया है मंदिर बनने के बाद मैं आगे पुजारी रहूंगा या नहीं, यह नहीं कह सकता हूं। क्योंकि बीच मे मेरे रिश्ते विहिप से खराब हो गए थे। साल 2000 में अशोक सिंघल समेत कई बड़े विहिप के नेता जबरदस्ती जन्मस्थान में घुस आए थे। उनके पीछे मीडिया भी थी।

तत्कालीन डीएम भगवती प्रसाद मामले को रफा-दफा करना चाह रहे थे। लेकिन, मीडिया में खबर चलने के बाद यह संभव नही हो सका। बाद में पत्रकारों ने हमसे भी पूछा तो हमने भी नाम बता दिया। इसके बाद विहिप वाले हमसे नाराज हो गए।

हालांकि, हमने संबंध बनाए रखा, लेकिन सही बात यह है कि अब वो बात नहीं है। 80 साल उम्र हो चुकी है। रामलला की सेवा में 28 साल बिता दिए हैं। अगर मौका मिलेगा तो बाकी जिंदगी भी उन्हीं की सेवा में बिताना चाहता हूं।’

अभी तक हम सभी उन्हें एक पुजारी के रूप में जानते आए हैं। आज हम आपको उनकी पिछली जिंदगी में ले चलते हैं।

1958 में घर छोड़ चले आए थे अयोध्या
सत्येंद्र दास बताते हैं कि मैं संत कबीरनगर का रहने वाला हूं। अपने पिताजी के साथ बचपन से अयोध्या आता रहता था। उस समय आसपास का माहौल भी बहुत धार्मिक रहता था। पिता जी अभिराम दास जी के पास आया करते थे। अभिराम दास वही हैं जिन्होंने राम जन्मभूमि में 1949 में गर्भगृह में मूर्तियां रखीं थी। उनसे भी मैं प्रभावित था।

साथ ही पढ़ने की इच्छा थी, तो 8 फरवरी 1958 को मैं अयोध्या आ गया। मेरे परिवार में हम दो भाई और एक बहन थी। जब पिताजी को पता चला कि मैं संन्यासी बनना चाहता हूं तो उन्हें बड़ी खुशी हुई। उन्होंने कहा कि एक भाई घर पर रहेगा और एक भगवान की सेवा में जाएगा। फिर मैं चला आया। अब परिवार में भाई है। कभी-कभी आता-जाता रहता है। त्योहार, उत्सव, पूजा इत्यादि पर मैं भी घर जाता रहता हूं। बहन की मृत्यु हो चुकी है।

राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास दो भाई हैं। उनका एक भाई घर पर है। उनकी बहन का निधन हो चुका है।

1976 में मिली सहायक अध्यापक की नौकरी
सत्येंद्र दास बताते हैं कि यहां मैंने संस्कृत विद्यालय से आचार्य 1975 में पास किया। 1976 में फिर अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरण विभाग में सहायक अध्यापक की नौकरी मिल गई। उस समय 75 रुपए तनख्वाह थी। इस दौरान मैं राम जन्मभूमि भी आया जाया करता था। श्री अभिराम दास हमारे गुरु थे। इस दौरान मैं कथा, पूजा इत्यादि भी करने जाया करता था। नवरात्रों में जन्मभूमि में कलश स्थापना का कार्य भी करता था। तब कभी नहीं सोचा था कि कभी यहां का मुख्य पुजारी बनूंगा।

1 मार्च 1992 को को मिला रामलला की सेवा का मौका
सत्येंद्र दास कहते हैं कि सब कुछ जीवन में सामान्य चल रहा था। 1992 में रामलला के पुजारी लालदास थे। उस समय रिसीवर की जिम्मेदारी रिटायर जज पर हुआ करती थी। उस समय जेपी सिंह बतौर रिसीवर नियुक्त थे। उनकी फरवरी 1992 में मौत हो गई तो राम जन्मभूमि की व्यवस्था का जिम्मा जिला प्रशासन को दिया गया। तब पुजारी लालदास को हटाने की बात हुई।

उस समय मैं तत्कालीन भाजपा सांसद विनय कटियार विहिप के नेताओं और कई संत जो विहिप नेताओं के संपर्क में थे, उनसे मेरा घनिष्ठ संबंध था। सबने मेरे नाम का निर्णय किया। तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल की भी सहमति मिल चुकी थी। जिला प्रशासन को सबने अवगत कराया और इस तरह 1 मार्च 1992 को मेरी नियुक्ति हो गई। मुझे अधिकार दिया गया कि मैं अपने 4 सहायक पुजारी भी रख सकता हूं। तब मैंने 4 सहायक पुजारियों को रखा।

सत्येंद्र दास 28 साल से रामलला की सेवा कर रहे हैं।

मंदिर से स्कूल और स्कूल से मंदिर यही दिनचर्या थी
सत्येंद्र दास बताते हैं कि उस समय स्कूल और मंदिर में सामंजस्य बिठाना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन सहायक पुजारियों की वजह से सब आसान हो गया था। सुबह तड़के से 10 बजे तक मंदिर में रहता, फिर 10 बजे से 4 बजे तक स्कूल में रहता। फिर 4 बजे के बाद से शाम तक मंदिर में। इस तरह पूजा का काम भी चल रहा था और स्कूल का भी चल रहा था।

100 रुपए पारिश्रमिक बतौर पुजारी मिलता था
सत्येंद्र दास बताते हैं कि मैं चूंकि सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़ाता था, तो मुझे वहां से भी तनख्वाह मिलती थी। ऐसे में मंदिर में मुझे बतौर पुजारी सिर्फ 100 रुपए पारिश्रमिक मिलता था। जब 30 जून 2007 को मैं अध्यापक के पद से रिटायर हुआ, तो मुझे फिर यहां 13 हजार रुपए तनख्वाह मिलने लगी। मेरे सहायक पुजारियों को अभी 8000 रुपए तनख्वाह मिलती है।

28 साल से रामलला टेंट में विराजमान थे। अब उनका मंदिर बनने जा रहा है।

जब बाबरी विध्वंस हुआ तो मैं रामलला को बचाने में लगा था
सत्येंद्र दास कहते हैं कि जब बाबरी विध्वंस हुआ तो मैं वहीं था। सुबह 11 बज रहे थे। मंच लगा हुआ था। लाउड स्पीकर लगा था। नेताओं ने कहा पुजारी जी रामलला को भोग लगा दें और पर्दा बंद कर दें। मैंने भोग लगाकर पर्दा लगा दिया। एक दिन पहले ही कारसेवकों से कहा गया था कि आप लोग सरयू से जल ले आएं। वहां एक चबूतरा बनाया गया था।

ऐलान किया गया कि सभी लोग चबूतरे पर पानी छोड़ें और धोएं, लेकिन जो नवयुवक थे उन्होंने कहा हम यहां पानी से धोने नही आए हैं। हम लोग यह कारसेवा नही करेंगे। उसके बाद नारे लगने लगे। सारे नवयुवक उत्साहित थे। वे बैरिकेडिंग तोड़ कर विवादित ढांचे पर पहुंच गए और तोड़ना शुरू कर दिया। इस बीच हम रामलला को बचाने में लग गए कि उन्हें कोई नुकसान न हो। हम रामलला को उठाकर अलग चले गए। जहां उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ।

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Ayodhya Ram Mandir Pujari Satyendra Das News | All You Need to Know About Ram Janmabhoomi Temple Chief Priest Satyendra Das


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केरल के कोल्लम में रहने वाली 105 साल की असमा बीवी 3 माह तक कोरोना से लड़ने के बाद घर लौटी हैं। असमा केरल की सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर हैं। उन्हें 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा बीवी को कोरोना का संक्रमण उनकी बेटी से हुआ था।

बेटी का कहना है कि पूरे इलाज के दौरान मां ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उम्र अधिक होने के कारण वह पहले ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रही थीं, इस दौरान डॉक्टर्स में लगातार नजर बनाए रखी।

स्वास्थ्य मंत्री ने उनके जज्बे की तारीफ की
असमा बीवी ने जिस तरह कोरोना का डटकर मुकाबला किया है, उसके लिए केरल की स्वास्थ्यमंत्री केके शैलजा ने उनकी तारीफ की है। स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, उन्होंने इस उम्र में जो जज्बा दिखाया वह काबिलेतारीफ है। स्वास्थ्यमंत्री ने डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थ वर्कर्स का भी शुक्रिया अदा किया।

केरल में बुधवार को कोरोना के 903 मामले सामने आए। इसमें हेल्थ वर्कर भी शामिल हैं। संक्रमितों का आंकड़ा 21,797 तक पहुंच गया है।

अप्रैल में केरल के थॉमस बने थे देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर
असमा बीवी से पहले सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर केरल के 93 साल के थॉमस अब्राहम रहे। थॉमस ने अप्रैल की शुरुआत में कोरोना को मात दी थी और देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर बने थे। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अधिक उम्र वाले कोरोना सर्वाइवर के मामले सामने आए।

93 साल के थॉमस अब्राहम अपनी 88 वर्षीय पत्नी मरियम्मा के साथ।

अब्राहम एक किसान हैं। उनके साथ उनकी 88 वर्षीय पत्नी मरियम्मा का इलाज कोट्‌टायम मेडिकल कॉलेज में हुआ था।



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A 105-year-old woman becomes Kerala's oldest COVID-19 survivor 105-year-old Asma Biwi, who defeated Corona


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नए महीने की पहली तारीख, गुड मॉर्निंग और ईद मुबारक!

सबसे पहले थोड़ी बात इस खास महीने की कर लेते हैं। 2020 के गर्भ में ये 8वां महीना है। इसे बिगड़े हालात में उम्मीद का महीना भी कह सकते हैं। उम्मीद इसलिए कि इस महीने कोरोना वैक्सीन अंतिम परीक्षा पास कर लेगा। ईद के साथ महीने में आमद दी है और अब आगे अयोध्या से राम लहर उठेगी, श्रीकृष्ण जन्म लेंगे और गणपति बप्पा विराजेंगे और आजादी के 73वें साल का जश्न भी मनेगा। हां, मानसून सबके मजे ले रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जैसे-तैसे कोटा पूरा कर जाएगा।

बहरहाल, नए महीने में बढ़ते कोरोना आंकड़े, उलझे राजस्थान, अस्पताल में भर्ती अमिताभ और सुशांत केस की नाटकीयता के साथ देखते हैं कि आज की मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ में आपके लिए क्या खास है-

नए महीने के साथ राजस्थान का सियासी घमासान चौथे हफ्ते में प्रवेश कर गया। होटल बंदी के बाद अब शहर बंदी होने लगी है। शह और मात में वक्त लगेगा इसलिए चालें सोच-समझकर चली जा रही हैं।

1. राजनीति की बिगड़ी रेलगाड़ी, अब जयपुर- टू- जैसलमेर रूट पर

इस बीच, गहलोत खेमे के 90 विधायकों को 3 स्पेशल प्लेन से जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट किया गया। मजेदार बात यह रही कि प्लेन में जगह नहीं होने के कारण 2 विधायक होटल लौट आए। जाते-जाते गहलाेत अमित शाह पर निशाना साध गए और बोले, ‘अमित जी आपको यह क्या हो गया है? हर वक्त सोचते हैं कि सरकार कैसे गिराऊं?’ ये सभी विधायक 13 जुलाई से जयपुर की फेयरमॉन्ट होटल में जमे थे और अब इन्हें जैसलमेर में फाइव स्टार होटल सूर्यगढ़ में ठहराया गया है। राज्यपाल कलराज मिश्र ने 14 अगस्त से विधानसभा सत्र की मंजूरी दी है और तब तक उठापटक की खबरें जयपुर-टू-जैसलमेर रूट से आएंगी।

पढे़ं: पूरी खबर

अब इस महीने के सबसे बड़े इवेंट की बात, जिसकी चर्चा दुनियाभर में है। सबको 5 अगस्त का इंतजार है और इस दिन की तैयारियां अंतिम दौर में है-

2. अयोध्या में रामजी का काज, देशभर में बंटेंगे घी के लड्‌डू

अयोध्या में पीएम मोदी 5 अगस्त को राम मंदिर की नींव रखेंगे और इस शुभ दिन की मिठास बढ़ाएंगे शुद्ध घी में बने बेसन के लड्डू जो प्रसाद के रूप में बांटे जाएंगे। इसके लिए विंध्याचल के हलवाई 1.11 लाख लड्डू बना रहे हैं। यह काम देवराहा बाबा संस्था के माध्यम से किया जा रहा हैं।

चार अगस्त तक लड्डू बनकर तैयार हो जाएंगे। 5 अगस्त को श्रीराम लला को भोग लगाया जाएगा। इसके बाद प्रसाद को अयोध्या व देश के सभी तीर्थ स्थलों तक पहुंचाया जाएगा। संत तुषारदास ने बताया कि 15 कारीगर लड्डू बना रहे हैं और इन्हें डिब्बों में पैक किया जा रहा है। 2 अगस्त को सीएम योगी तैयारियां देखने अयोध्या पहुंचेंगे।

पढे़ं: पूरी खबर

अब थोड़ी खबर सुशांत सुसाइड केस की जिसने बॉलीवुड की सांसें चढ़ा रखी हैं। खत्म होते जुलाई में इस केस ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि बड़े सितारे ही नहीं, दो राज्य भिड़ गए हैं-

3. हे ईश्वर! सुशांत की आत्मा को शांति देना, अब केस तो लंबा चलेगा

तेजी से बदलते घटनाक्रम में शुक्रवार को सुशांत के पिता के गंभीर आरोपों के बाद पहली बार उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती हाथ जोड़े रोते हुए सामने आईं। रिया ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्हें भगवान और न्यायपालिका पर अटूट विश्वास है। उन्हें भरोसा है कि उन्हें इंसाफ मिलेगा। इसके बाद रिया ने कहा- सत्यमेव जयते, सच की जीत होगी।

रिया के खिलाफ सुशांत के पिता ने पटना में खुदकुशी के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया है। रिया ने वकील सतीश मानशिंदे के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। बुधवार को पटना पुलिस रिया से पूछताछ के लिए उनके मुंबई वाले घर पहुंची। लेकिन, वहां कोई नहीं मिला।

पढे़ं: पूरी खबर

अब बात कोरोना की। डरते-डरते और सहते-सहते अगस्त आ गया लेकिन महामारी एक बड़ी लहर बनकर सबको बहाए ले जा रही है। उम्मीद यही है कि बस, एक बार वैक्सीन आ जाए तो जिंदगी पटरी पर लौटे-

4. पौने दो करोड़ हुआ संक्रमितों का आंकड़ा, कब आएगी वैक्सीन?

दुनिया में कोरोनावायरस से संक्रमण के अब तक 1 करोड़ 74 लाख 76 हजार 105 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1 करोड़ 9 लाख 39 हजार 477 ठीक भी हो चुके हैं। वहीं, 6 लाख 76 हजार 759 की मौत हो चुकी है। नंबर 1 पर अमेरिका, 2 पर ब्राजील और 3 पर भारत है। कोरोना संक्रमण की वजह से मौतों के मामले में भारत अब इटली को पछाड़कर 5वें नंबर पर पहुंच गया है।

अमेरिका में जहां दो वैक्सीन के फेज-3 का ट्रायल शुरू हो चुका है। भारत और इजराइल के वैज्ञानिक साथ मिलकर रैपिड टेस्टिंग किट विकसित करने पर बीते 3 दिन से काम कर रहे हैं। प्रयोग सफल हुआ तो सिर्फ 30 सेकेंड के अंदर जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। हालांकि, दूसरी ओर चीन फिर से डरा रहा है। यहां पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 127 नए मामले सामने आए हैं।

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कोरोना के बीच भास्कर डेटा स्टोरी की ऐसी बात जो चौंकाती है क्योंकि इसमें साल 2100 तक भारत और चीन की आबादी बढ़ने की बजाए, घटने के संकेत हैं-

5. साल 2048 का अनुमान, भारत नहीं बढ़ाएगा दुनिया की आबादी

हाल ही में जारी की गई नामी संस्था लैंसेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की आबादी 2064 में पीक पर होगी। इसके बाद ये घटने लगेगी। इससे पहले यूएन ने 2100 में इसके पीक पर पहुंचने का अनुमान लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक 2064 में दुनिया की आबादी 973 करोड़ हो जाएगी। 2100 तक ये घटकर 879 रह जाएगी।

भारत दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होगा। लेकिन, उसकी आबादी 2048 के बाद घटने लगेगी। ग्लोबल फर्टीलिटी रेट 2100 तक घटकर 1.66 हो जाएगा। भारत समेत दुनिया के उन देशों में फर्टिलिटी रेट 70% तक कम होगा जिनकी आबादी ज्यादा है।

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अब हालचाल जान लेते हैं बॉलीवुड के बिग बी का, जिन्हें अस्पताल में आज पूरे 21 दिन पूरे हो चुके हैं। उनकी बहू और पोती घर जा चुकी हैं, लेकिन बेटा अभिषेक साथ है-

6. गेट वेल सून अमित जी, जल्दी ठीक होकर घर पहुंचिए

शुक्रवार को अस्पताल में अमिताभ का 21वां दिन था। उन्होंने आइसोलेशन वार्ड से अपना हाल साझा किया है। अपने दार्शनिक अंदाज में उन्होंने ब्लॉग पर लिखा, “दिन में उन्हें सबसे ज्यादा इंतजार उस वक्त का रहता है, जब वार्ड में डॉक्टर्स और नर्सेस का दौरा होता है, क्योंकि उन पर ही उनकी उम्मीद टिकी होती है। आइसोलेशन, क्वारैंटाइन, एकांत, मेडिकल केयर रूम...और कुछ नहीं।"

वे आगे लिखते हैं, "सोचते हैं कि अब एक घंटे में नर्स आ जाएंगी, इंजेक्शन के जरिए दवा दी जाएगी, फेफड़ों की जांच होगी, शरीर की जांच होगी। कितनी सांस ली, कितनी देर सांस रोकी...पिछले दिन की टाइमिंग को पछाड़ना है...बेहतर करना है...।"

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अब खबरों से दूर, जान लेते हैं कि शनिवार का यह दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है, क्योंकि भविष्य बांचने वाले भी उसी उम्मीद के सहारे हैं जिसमें जिंदगी जीतती है-

आज का राशिफल: एस्ट्रोलॉजर डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार आज चंद्रमा पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में रहेगा। जिससे मातंग नाम का शुभ योग बन रहा है। इस शुभ योग का फायदा मेष, वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले लोगों को मिलेगा। बाकी 4 राशि वालों को संभलकर रहना होगा।

आज का अंकफल: न्यूमेरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार गणेश के अनुसार 1 अगस्त का मूलांक 1, भाग्यांक 4, दिन अंक 8, मासांक 8 और चलित अंक 1, 4 है। शनिवार को अंक 1, 4 के साथ अंक 8 की परस्पर प्रबल विरोधी युति बनी है। अंक 1 की अंक 4 के साथ विरोधी युति बनी हुई है।

आज का टैरो राशिफल: टैरो कार्ड रीडर शीला एम. बजाज कहती हैं कि 12 में से 9 राशियों के लिए दिन कई मामलों में भाग्य का साथ मिलने का है। मेष राशि वालों के लिए सहायता और संसाधन दोनों मिलने के संकेत हैं, वृष राशि वालों के लिए दिन नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का हो सकता है।

आखिर में, आज का दिन क्यों है खास और क्या-क्या बदलेगा आज से: 1 अगस्त से देश में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इसका असर सीधा आपकी जिंदगी और जेब पर पड़ेगा। इन बदलावों में कुछ खास हैं-

1. नाइट कर्फ्यू आज से खत्म

देशभर में नाइट कर्फ्यू आज से खत्म हो जाएगा। अनलॉक-1 में रात 9 बजे से और अनलॉक-2 में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक बाहर निकलने पर पाबंदी थी। अब इसे पूरी तरह हटा लिया गया है।

2. वाहन इंश्योरेंस से जुड़े नियम बदलेंगे

भारतीय बीमा विकास व नियामक प्राधिकरण (इरडा) के निर्देशों के अनुसार, 1 अगस्त से गाड़ी खरीदते समय कार के लिए 3 साल का और टू व्हीलर्स के लिए 5 साल का थर्ड पार्टी कवर लेना जरूरी नहीं रहेगा।

3. बैंकिंग नियमों में बदलाव

कई बैंकों ने 1 अगस्त से अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस न होने पर चार्ज लगाने की घोषणा की है। तीन मुफ्त लेनदेन के बाद शुल्क भी वसूला जाएगा। बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और आरबीएल बैंक में सबसे पहले यह चार्ज लगने लगेगा।

4.बताना होगा प्रॉडक्ट कहां बना है

1 अगस्त से ई-कॉमर्स कंपनियों को यह बताना जरूरी होगा की वो जिस प्रॉडक्ट को बेच रही हैं वो कहां बना हैं। इस तरह से ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने सभी न्यू प्रॉडक्ट लिस्टिंग के साथ कंट्री ऑफ ओरिजिन के बारे में अपडेट करना होगा।

5. PM-Kisan की छठी किश्त मिलेगी

किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 2000 रुपये की छठवीं किस्त डाली जाएगी। दावा है कि मोदी सरकार ने योजना की शुरुआत से लेकर अब तक देश के 9.85 करोड़ किसानों को नकद राशि देकर लाभ पहुंचाया है।

6. आज से 12% EPF कटेगा

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत छूट की सीमा खत्म हो रही है और आज से ईपीएफ 12% कटेगा।। मई में मोदी सरकार ने लॉकडाउन के महा पैकेज में ईपीएफ में मासिक योगदान 24 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया था, पर अब ये पुराने स्तर पर आ जाएगा।

7. आज युवा दिमागों के बीच मोदी

पीएम मोदी एक अगस्‍त को शाम 7 बजे से दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन हैकेथॉन के ग्रैंड फिनाले में करीब 10 हजार युवा दिमागों से रूबरू होंगे। हैकेथॉन एक नॉन स्टॉप डिजिटल प्रोडक्ट डेवलपमेंट प्रतियोगिता है जिसमें नई चुनौतियों के समाधान खोजे जाते हैं और टेक्नोलॉजी इनोवेशंस की पहचान की जाती है।



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01 august 2020 EID Mubarak|Corona virus, Rajasthan politics|High court Sushant singh case|News Brief/Dainik Bhaskar Morning Latest [Updates]; Rajasthan, Ashok Gehlot, Sachin Pilot, Ram Mandir & Aaj Ka Rashifal


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RACHNA SAROVAR
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भारत में स्कूल बंद होने के कारण बच्चे स्मार्टफोन के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास स्मार्टफोन खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। यही नहीं धीमा इंटरनेट भी बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में बाधा बन रहा है। कोरोना के चलते भारत में करीब 24 करोड़ स्कूली बच्चे घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

पालमपुर के किसान कुलदीप कुमार ने अपनी गाय बेचकर स्मार्टफोन खरीदा ताकि उनके बच्चे ऑनलाइन क्लास में हिस्सा ले सकें। पिछले चार महीनों से लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद है। कुमार के ऊपर पहले से ही कर्ज था और गाय ही उनकी एकमात्र संपत्ति थी। पिछले हफ्ते उन्होंने इस गाय को 6,000 रुपए में बेच दिया और करीब-करीब पूरा पैसा स्मार्टफोन में लग गया।

कुमार रॉयटर्स से बातचीत में कहते हैं, "मेरे पड़ोसी के पास स्मार्टफोन है, लेकिन मेरे बच्चे हर दिन वहां जाने के खिलाफ हैं, मैं उनकी पढ़ाई को लेकर चिंतित था, इसलिए मैंने गाय बेच दी।' चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। भारत में करीब एक अरब आबादी के पास ऐसे फोन हैं जो इंटरनेट की सुविधा से लैस हैं।

कुमार और उनकी पत्नी के लिए स्मार्टफोन एक नई चीज है। ना ही कुमार और ना ही उनकी पत्नी कभी ऑनलाइन हुए हैं और इसलिए उनके बच्चे ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

स्कूल बंद होने के चलते बच्चों के लिए इंटरनेट सबसे अहम

स्कूल बंद होने के कारण इंटरनेट तक पहुंच बच्चों के लिए सबसे अहम चीज हो गई है, जिससे वे अपनी पढ़ाई से जुड़े रहें। इसी वजह से कई गरीब या कम आय वाले परिवार सस्ता या फिर सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीद रहे हैं। भारत में करीब 24 करोड़ बच्चे स्कूल जाते हैं। इनकी वजह से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री और बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में इस्तेमाल हो चुके हैंडसेट की बिक्री बढ़ी है।

टीचर स्मार्टफोन डोनेट करने की अपील कर रहे हैं

पुणे के एक शिक्षक नागनाथ विभूते ने अपने ब्लॉग के जरिए लोगों से इस्तेमाल किए हुए स्मार्टफोन दान करने की अपील की, जिसका इस्तेमाल ऐसे बच्चे कर सकें जो गरीब परिवार से आते हैं।

गांवों में इंटरनेट की धीमी स्पीड बच्चों के लिए मुसीबत से कम नहीं

शिक्षक वॉट्सऐप के जरिए घर पर किए जाने वाला सबक दे रहे हैं या वर्चुअल क्लास ले रहे हैं। लेकिन, स्मार्टफोन की कमी ऑनलाइन स्कूली शिक्षा के लिए एकमात्र बाधा नहीं है। महाराष्ट्र के पंचगनी में केमिस्ट्री की टीचर मौमिता भट्टाचार्जी को धीमे इंटरनेट के साथ काम करना पड़ता है। भट्टाचार्जी ने बच्चों को क्लासरूम का अहसास देने के लिए दीवार पर ब्लैकबोर्ड भी लगाया है। मौमिता सबक को रिकॉर्ड करती हैं और बाद में बच्चे उसे इंटरनेट के जरिए डाउनलोड कर लेते हैं।

सरकार ने वन क्लास वन चैनल की शुरुआत की

खराब कनेक्शन, फोन की लागत और महंगे डाटा प्लान के अलावा स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने की चिंताओं के बीच पढ़ाने के तरीके को वापस ऑफलाइन की तरफ जाने पर विचार करने पर मजबूर किया जाने लगा है। हाल ही में मानव संसाधन मंत्रालय ने 'वन क्लास वन चैनल' की शुरूआत की थी। इसके तहत बच्चों को पढ़ाने के लिए टीवी और रेडियो का सहारा लिया जाता है।

46 फीसदी परिवारों ने अपने बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया है

ऑनलाइन शिक्षा होने के कारण गरीब परिवारों के लाखों बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। गैर लाभकारी संस्था कैरिटास इंडिया द्वारा 600 से अधिक प्रवासी श्रमिकों पर किए गए एक सर्वे में पता चला कि उनमें से 46 फीसदी परिवारों ने अपने बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया है। पुणे स्थित शिक्षक विभूते बताते हैं कि ईंट भट्टों में काम करने वाले उन मजदूरों के बच्चों से उनका संपर्क टूट गया जो लॉकडाउन के कारण बेरोजगार हो गए हैं।



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शिक्षक अब व्हाट्स-ऐप के जरिए घर पर किए जाने वाला सबक दे रहे हैं या वर्चुअल क्लास ले रहे हैं।


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कोरोना के चलते भारत में तीन महीने का लॉकडाउन रहा। मार्च के आखिरी हफ्ते से लेकर जून तक लोगों की डिजिटल डिपेंडेंसी और भी बढ़ गई। लोगों ने इंटरनेट के जरिए घर से ही सारा काम किया और इससे टाइम पास भी किया। इस बात की चर्चा भी थी कि लॉकडाउन के चलते, इंटरनेट यूज बढ़ेगा और टेलीकॉम कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ेगा।

हाल ही में रिलायंस जियो और एयरटेल ने वित्त वर्ष 2020-2021 के पहले तिमाही के लिए अपने आंकड़े जारी किए। जियो को लॉकडाउन में नए यूजर भी मिले और हर यूजर से उसकी कमाई भी बढ़ी। इसके साथ ही उसका फायदा भी बढ़ा।

लेकिन, एयरटेल के साथ ऐसा नहीं हुआ। लॉकडाउन में बीती इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसके यूजर घट गए। एयरटेल का बिजनेस 18 देशों में है उसके बाद भी उसका ये हाल है। वहीं, जियो सिर्फ भारत में बिजनेस करके भी एयरटेल के 18 देश के यूजर बेस के लगभग बराबरी पर आ खड़ी हुई है। एयरटेल को हर यूजर से उसकी कमाई में थोड़ा इजाफा तो हुआ लेकिन, उसका घाटा दो गुने से ज्यादा बढ़ गया।

अप्रैल-जून तिमाही इन दोनों कंपनियों की परफॉर्मेंस कैसी रही? दोनों कंपनियों के यूजर्स का डेटा कंजम्पशन कितना बढ़ा? दोनों के यूजर्स कितने बढ़े या घटे? लॉकडाउन में लोगों की कॉलिंग कितनी बढ़ी? इस रिपोर्ट में हम इन सभी सवालों का जवाब देंगे।



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Jio Vs Airtel; Mukesh Ambani Reliance Jio Profit Vs Airtel Revenue 2020 | Who is the Biggest? How Many Reliance Jio Airtel User (Subscriber Base) In India


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